Bareilly News: 11 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया स्काई वॉक, लोग बोले- यह तो फुट ओवरब्रिज है
बरेली के अय्यूब खां चौराहे पर बनाए गए स्काई वॉक की डिजाइन पर सवाल उठने लगे हैं। शहर के लोगों का कहना है कि इसे फुट ओवरब्रिज कहें तो ज्यादा अच्छा होगा।
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बरेली में स्मार्ट सिटी कंपनी ने 11 करोड़ रुपये खर्च करके जो स्काई वॉक बनाया है, अब उस पर सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि जिसे स्काई वॉक बताया जा रहा है, वह फुट ओवरब्रिज से ज्यादा कुछ नहीं। स्मार्ट सिटी कंपनी की तरफ से टेंडर निकाल दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई संचालक सामने नहीं आया है।
अय्यूब खां चौराहे पर स्काई वॉक बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2021 में पारित हुआ था। वर्ष 2022 में इसका निर्माण शुरू हुआ। इसके तहत स्काई वॉक पर दुकानें बननी थीं। लिफ्ट लगनी थी, टिन शेड व रेलिंग आदि लगनी थी। इनमें दुकानें बनाने को छोड़कर सभी काम पूरे हो चुके हैं। दुकानें इसलिए नहीं बनाई जा रहीं, क्योंकि जो कंपनी संचालन की जिम्मेदारी लेगी, वह अपने हिसाब से दुकानों का निर्माण कराएगी। उसे जगह एलॉट की जाएगी।
पारदर्शी होनी चाहिए थी पुल की सड़क
सेवानिवृत इंजीनियर राजेंद्र आर्य कहते हैं कि अय्यूब खां चौराहे पर बने स्काई वॉक को अगर फुट ओवरब्रिज कहें तो ज्यादा अच्छा होगा। स्काई वॉक में पुल की सड़क पारदर्शी होनी चाहिए, जिससे लोगों को यह महसूस हो कि जमीन के ऊपर हवा के बीच चल रहे हैं। इसमें सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा ध्यान रखना होता है।
अब तो कई जगह स्टील के खूबसूरत जाल लगाए जा रहे हैं। इससे हवा भी आती रहती है और ऊपर से किसी के गिरने की आशंका भी नहीं रहती है। मौजूदा कथित स्काई वॉक पर जो रेलिंग लगाई गई है, संचालन शुरू होने के बाद उसके साइड इफेक्ट सामने आएंगे।
चाहकर भी कुछ नहीं बोल पा रहे नेता
स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर में करीब छह सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। कुछेक को छोड़ दें तो अधिकतर प्रोजेक्ट अभी शुरू नहीं हो सके हैं। चूंकि, परियोजना खुद सरकार की तरफ से बनाई गई है, इसलिए सत्ता पक्ष के नेता सब कुछ जानते हुए भी इस पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
हालांकि, महापौर उमेश गौतम जरूर पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत कर आए कि स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टों को शुरू नहीं कराया जा रहा। दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी के अफसर इस बारे में कुछ बोलना ही नहीं चाहते।
यह है स्काई वॉक बनाने का मकसद
स्मार्ट सिटी के अफसरों की मानें तो स्काई वॉक बनाने का मकसद यह है कि यहां लोग शाॅपिंग कर सकें। चाट-पकौड़ी का स्वाद ले सकें। इसके लिए यहां दुकानें बनाई जाएंगी। दुकानों को किराये पर दिया जाएगा, जिससे स्काई वॉक की लागत निकलेगी।
नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि स्काई वॉक समेत गांधी उद्यान, फूड कोर्ट, मल्टीलेवल पार्किंग के टेंडर हो गए हैं। जल्द इनका संचालन शुरू हो जाएगा। मेरे आने से पहले स्काई वॉक की डिजाइन तय हो गई थी और काम भी शुरू हो गया था। तब स्काई वॉक के डिजाइन में पारदर्शिता क्यों नहीं रखी गई? उस समय तैनात रहे अधिकारी ही यह बता सकेंगे।