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Bareilly News: विवेचना में झोल...अदालतों से दोषमुक्त हो रहे हत्या और दुष्कर्म के आरोपी
Thu, 20 Aug 2026 01:35 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 20 Aug 2026 01:35 AM IST
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बरेली। पुलिस की विवेचना में झोल का लाभ आरोपियों को मिल रहा है। कहीं दुष्कर्म के मामलों में गवाहों के बयान बदलने के कारण आरोपी अदालत से बरी हो रहे हैं तो कहीं हत्या जैसे संगीन मामलों मेंं भी कमजोर विवेचना आरोपियों को दोषी साबित करने में नाकाम साबित हो रही। जून से अब तक 12 गंभीर मामलों में आरोपियों को अदालतें दोषमुक्त करार दे चुकी हैं।
जिला एवं सत्र अदालत समेत आंवला, नवाबगंज और फरीदपुर की अदालतों में 45 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती है। इसके अलावा स्थायी लोक अदालत, किशोर न्याय बोर्ड, फैमिली कोर्ट, उपभोक्ता प्रतितोष आयोग और मोटर वाहन दुर्घटना दावा प्राधिकरण भी हैं। रेलवे संबंधी वादों की सुनवाई अलग से होती है। इन अदालतों में लाखों की संख्या में संपत्ति, फौजदारी, पारिवारिक आदि वाद विचाराधीन हैं। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद तेजी से सुनवाई हो रही है। जल्द फैसले भी आने लगे हैं। अदालतें पुराने वादों में फैसले को प्राथमिकता दे रही हैं, लेकिन कई मामलों में विवेचना में त्रुटि का लाभ आरोपियों को मिल रहा है। अभियोजन पक्ष की कमजोर पैरवी भी इसका कारण बन रही है।
सात साल बाद भी नहीं सुलझी हत्या की गुत्थी
बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के गांव रजऊ परसपुर निवासी सर्वेश मिश्रा के बेटे रोहित मिश्रा का सड़ा-गला शव 25 जुलाई 2019 को परसोना नहर से मिला था। सर्वेश ने कैंट थाने में रोहित की सौतेली बहन अर्चना और गांव की ही मीना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने अर्चना, धर्मेंद्र और मैसर के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। कमजोर विवेचना की वजह से आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त करार दिया। रोहित की हत्या किसने की, सात साल बाद भी यह सवाल बना हुआ है।
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पुलिस ने आरोपियों को दी क्लीन चिट
सिरौली थाना क्षेत्र के गांव आलमपुर कोट निवासी अमृतलाल के बेटे दीनदयाल की 31 मई 2023 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। अमृतलाल ने दीनदयाल की पत्नी पूजा, उसके भाइयों और पिता पर हत्या का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने 26 सितंबर को अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। सीजेएम कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। वादी ने अपर अदालत में चुनौती दी तो दोबारा विवेचना का आदेश हुआ। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में कीटनाशक से मौत की पुष्टि हुई।
पॉक्सो एक्ट के आरोपी भी हुए बरी
पॉक्सो एक्ट के मामलों में ज्यादा आरोपी बरी हो रहे हैं। इस माह चार मामलों में आरोपी दोषमुक्त हो चुके हैं। स्पेशल जज पाॅक्सो एक्ट ने बदायूं के बिसौली थाना क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर निवासी आशू उर्फ आशीष को बरी कर दिया। उसके खिलाफ अगस्त 2015 में अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में विवेचना के दौरान किशोरी की आयु निर्धारित नहीं हो सकी। किशोरी ने कई बार बयान भी बदले। इसी माह पीलीभीत के एक गांव निवासी व्यक्ति को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट ने दोषमुक्त करार देते हुए वादी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। दरअसल, मेडिकल जांच में युवती की आयु 19 साल पाई गई। अदालत में वह बयान से मुकर गई। मालूम पड़ा कि रिपोर्ट पेशबंदी में दर्ज करा दी गई थी। एक अन्य मामले में आरोपी बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के मनपुलिया दलेल निवासी तालिब उर्फ हम्मान को दोषमुक्त करार दिया गया। उसके खिलाफ मई 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सुनवाई के दौरान विवेचना में झोल पाया गया।
गैंगस्टर के मामलों में हुई सबसे लचर विवेचना
अदालत के फैसलों पर गौर करें तो गैंगस्टर एक्ट के मामलों में सबसे लचर विवेचना उजागर हुई है। अगस्त में अलग-अलग थानों में दर्ज गैंगस्टर के पांच मामलों में 12 से ज्यादा आरोपियों को अदालत बरी कर चुकी है। अदालत ने विवेचना में त्रुटि को लेकर टिप्पणी भी की हैं। इज्जतनगर थाने में मई 2002 में और सितंबर 2002 में जीआरपी थाने में दर्ज एक-एक मामले में पांच आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।
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किशोर न्याय बोर्ड का आदेश निरस्त, ताऊ के संरक्षण में रहेगा बाल अपचारी
बरेली। बाल न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने किशोर न्याय बोर्ड के 28 जुलाई के आदेश को निरस्त करते हुए पॉक्सो एक्ट के आरोपी कक्षा छह के छात्र को उसके ताऊ के संरक्षण में देने का आदेश दिया है।
क्योलड़िया थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 18 मार्च को उसकी आठ साल की बेटी को किशोर अपने एक अन्य दोस्त के साथ बहला-फुसलाकर खेत में ले गया। वहां उसके साथ बुरा काम किया। किशोर अपचारी आठ मई से संप्रेषण गृह में है। उसके ताऊ ने किशोर न्याय बोर्ड में अर्जी दाखिल कर उसका संरक्षण मांगा था। इस अर्जी को 28 जुलाई को खारिज कर दिया गया। किशोर न्याय बोर्ड के फैसले को बाल न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट में चुनौती दी गई।
बचाव पक्ष ने कहा कि वादी पक्ष आदतन धन वसूली के लिए इस तरह के मामले दर्ज कराता रहा है। कुछ मामलों का हवाला भी दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने बाल अपचारी को 50 हजार रुपये के बंधपत्र पर उसके ताऊ के संरक्षण में देने का आदेश दिया है।
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उपभोक्ता आयोग ने वादी को माना तथ्यों को छिपाने का दोषी
बरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने बिजली बिल की भू-राजस्व की वसूली के खिलाफ दायर वाद को पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया है। पीठ के अध्यक्ष दीपक कुमार त्रिपाठी एवं सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता ने माना कि विद्युत निगम द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गई। वादी ने स्वयं आयोग को भ्रमित करने का प्रयास किया है।
तहसील आंवला के ग्राम सादुल्लागंज निवासी नईम खां ने विद्युत वितरण खंड आंवला के विरुद्ध वाद दर्ज कराया था। उसका कहना था कि उसने वर्ष 2019 में पहली बार अपने व अपनी पत्नी के नाम विद्युत कनेक्शन लिया था। विद्युत विभाग ने वर्ष 2008 के किसी अन्य व्यक्ति के 3,21,000 रुपये के बकाया बिल का नोटिस देकर उससे आरसी के तहत जबरन 1,00,000 रुपये जमा करा लिए।
विद्युत निगम की ओर से आयोग को बताया कि वादी के नाम से वर्ष 2008 में ही विद्युत संयोजन (नंबर 190454) जारी किया गया था। इस पर बिल बकाया चल रहा था। विभाग ने उपभोक्ता इंफॉर्मेशन शीट और बिलिंग रसीदों के आधार पर यह साबित किया कि वादी द्वारा पूर्व में भी उक्त संयोजन के बिल का भुगतान किया जाता रहा है। इस पर आयोग ने वाद को खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का निर्देश दिया।
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जिला एवं सत्र अदालत समेत आंवला, नवाबगंज और फरीदपुर की अदालतों में 45 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती है। इसके अलावा स्थायी लोक अदालत, किशोर न्याय बोर्ड, फैमिली कोर्ट, उपभोक्ता प्रतितोष आयोग और मोटर वाहन दुर्घटना दावा प्राधिकरण भी हैं। रेलवे संबंधी वादों की सुनवाई अलग से होती है। इन अदालतों में लाखों की संख्या में संपत्ति, फौजदारी, पारिवारिक आदि वाद विचाराधीन हैं। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद तेजी से सुनवाई हो रही है। जल्द फैसले भी आने लगे हैं। अदालतें पुराने वादों में फैसले को प्राथमिकता दे रही हैं, लेकिन कई मामलों में विवेचना में त्रुटि का लाभ आरोपियों को मिल रहा है। अभियोजन पक्ष की कमजोर पैरवी भी इसका कारण बन रही है।
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सात साल बाद भी नहीं सुलझी हत्या की गुत्थी
बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के गांव रजऊ परसपुर निवासी सर्वेश मिश्रा के बेटे रोहित मिश्रा का सड़ा-गला शव 25 जुलाई 2019 को परसोना नहर से मिला था। सर्वेश ने कैंट थाने में रोहित की सौतेली बहन अर्चना और गांव की ही मीना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने अर्चना, धर्मेंद्र और मैसर के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। कमजोर विवेचना की वजह से आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त करार दिया। रोहित की हत्या किसने की, सात साल बाद भी यह सवाल बना हुआ है।
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पुलिस ने आरोपियों को दी क्लीन चिट
सिरौली थाना क्षेत्र के गांव आलमपुर कोट निवासी अमृतलाल के बेटे दीनदयाल की 31 मई 2023 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। अमृतलाल ने दीनदयाल की पत्नी पूजा, उसके भाइयों और पिता पर हत्या का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने 26 सितंबर को अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। सीजेएम कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। वादी ने अपर अदालत में चुनौती दी तो दोबारा विवेचना का आदेश हुआ। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में कीटनाशक से मौत की पुष्टि हुई।
पॉक्सो एक्ट के आरोपी भी हुए बरी
पॉक्सो एक्ट के मामलों में ज्यादा आरोपी बरी हो रहे हैं। इस माह चार मामलों में आरोपी दोषमुक्त हो चुके हैं। स्पेशल जज पाॅक्सो एक्ट ने बदायूं के बिसौली थाना क्षेत्र के गांव पृथ्वीपुर निवासी आशू उर्फ आशीष को बरी कर दिया। उसके खिलाफ अगस्त 2015 में अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में विवेचना के दौरान किशोरी की आयु निर्धारित नहीं हो सकी। किशोरी ने कई बार बयान भी बदले। इसी माह पीलीभीत के एक गांव निवासी व्यक्ति को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट ने दोषमुक्त करार देते हुए वादी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। दरअसल, मेडिकल जांच में युवती की आयु 19 साल पाई गई। अदालत में वह बयान से मुकर गई। मालूम पड़ा कि रिपोर्ट पेशबंदी में दर्ज करा दी गई थी। एक अन्य मामले में आरोपी बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के मनपुलिया दलेल निवासी तालिब उर्फ हम्मान को दोषमुक्त करार दिया गया। उसके खिलाफ मई 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सुनवाई के दौरान विवेचना में झोल पाया गया।
गैंगस्टर के मामलों में हुई सबसे लचर विवेचना
अदालत के फैसलों पर गौर करें तो गैंगस्टर एक्ट के मामलों में सबसे लचर विवेचना उजागर हुई है। अगस्त में अलग-अलग थानों में दर्ज गैंगस्टर के पांच मामलों में 12 से ज्यादा आरोपियों को अदालत बरी कर चुकी है। अदालत ने विवेचना में त्रुटि को लेकर टिप्पणी भी की हैं। इज्जतनगर थाने में मई 2002 में और सितंबर 2002 में जीआरपी थाने में दर्ज एक-एक मामले में पांच आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।
किशोर न्याय बोर्ड का आदेश निरस्त, ताऊ के संरक्षण में रहेगा बाल अपचारी
बरेली। बाल न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने किशोर न्याय बोर्ड के 28 जुलाई के आदेश को निरस्त करते हुए पॉक्सो एक्ट के आरोपी कक्षा छह के छात्र को उसके ताऊ के संरक्षण में देने का आदेश दिया है।
क्योलड़िया थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 18 मार्च को उसकी आठ साल की बेटी को किशोर अपने एक अन्य दोस्त के साथ बहला-फुसलाकर खेत में ले गया। वहां उसके साथ बुरा काम किया। किशोर अपचारी आठ मई से संप्रेषण गृह में है। उसके ताऊ ने किशोर न्याय बोर्ड में अर्जी दाखिल कर उसका संरक्षण मांगा था। इस अर्जी को 28 जुलाई को खारिज कर दिया गया। किशोर न्याय बोर्ड के फैसले को बाल न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट में चुनौती दी गई।
बचाव पक्ष ने कहा कि वादी पक्ष आदतन धन वसूली के लिए इस तरह के मामले दर्ज कराता रहा है। कुछ मामलों का हवाला भी दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने बाल अपचारी को 50 हजार रुपये के बंधपत्र पर उसके ताऊ के संरक्षण में देने का आदेश दिया है।
उपभोक्ता आयोग ने वादी को माना तथ्यों को छिपाने का दोषी
बरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने बिजली बिल की भू-राजस्व की वसूली के खिलाफ दायर वाद को पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया है। पीठ के अध्यक्ष दीपक कुमार त्रिपाठी एवं सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता ने माना कि विद्युत निगम द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गई। वादी ने स्वयं आयोग को भ्रमित करने का प्रयास किया है।
तहसील आंवला के ग्राम सादुल्लागंज निवासी नईम खां ने विद्युत वितरण खंड आंवला के विरुद्ध वाद दर्ज कराया था। उसका कहना था कि उसने वर्ष 2019 में पहली बार अपने व अपनी पत्नी के नाम विद्युत कनेक्शन लिया था। विद्युत विभाग ने वर्ष 2008 के किसी अन्य व्यक्ति के 3,21,000 रुपये के बकाया बिल का नोटिस देकर उससे आरसी के तहत जबरन 1,00,000 रुपये जमा करा लिए।
विद्युत निगम की ओर से आयोग को बताया कि वादी के नाम से वर्ष 2008 में ही विद्युत संयोजन (नंबर 190454) जारी किया गया था। इस पर बिल बकाया चल रहा था। विभाग ने उपभोक्ता इंफॉर्मेशन शीट और बिलिंग रसीदों के आधार पर यह साबित किया कि वादी द्वारा पूर्व में भी उक्त संयोजन के बिल का भुगतान किया जाता रहा है। इस पर आयोग ने वाद को खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का निर्देश दिया।