डेलापीर मंडी अग्निकांड: अव्यवस्था की आग में आढ़तियों के पांच करोड़ राख, लेनदेन से जुड़े बही खाते भी जले
बरेली में बृहस्पतिवार रात डेलापीर फल मंडी की 28 दुकानों में आग लगने से 40 आढ़तियों का करोड़ों का माल राख हो गया। पीड़ित आढ़तियों का कहना है कि मंडी में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। ओवरहेड टैंक बदहाल पड़ा है। यहां तक कि पीने के लिए पानी खरीदना पड़ता है।
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बरेली की डेलापीर फल मंडी में बृहस्पतिवार रात लगी आग की वजह से पांच करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। पीड़ित आढ़तियों का कहना है कि मंडी में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। ओवरहेड टैंक बदहाल पड़ा है। परिसर में एक अदद हैंडपंप तक नहीं है। आढ़ती पानी खरीदकर प्यास बुझाते हैं। ऐसे में भला आग बुझाने के लिए पानी कहां मिलता? नतीजा, आग धधकती रही। अब आरोपों से घिरे मंडी सचिव व अन्य अधिकारी आढ़तियों के जख्म पर बातों का मरहम लगा रहे हैं।
बृहस्पतिवार रात डेलापीर फल मंडी की 28 दुकानों में आग लगने से 40 आढ़तियों का करोड़ों का माल राख हो गया। शुक्रवार सुबह मंडी पहुंचे आढ़तियों ने सवालों की बौछार कर दी। उनका कहना था कि पानी का इंतजाम होता तो आग इतनी न भड़कती।
वे खुद ही उस पर काबू पा लेते। व्यवस्था की खामियों की वजह से उनको करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। आस-पास पानी नहीं मिलने से अग्निशमन दल भी बेबस नजर आया। आढ़तियों ने जल्द से जल्द कारोबार करने की जगह मुहैया कराने और करोड़ों के नुकसान का मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
मंडी में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं
डेलापीर मंडी में व्याप्त अव्यवस्था और जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से आग भड़की। आढ़ती मोहम्मद अफजल ने नुकसान की भरपाई करने की मांग उठाई। कहा कि बिल्डिंग को दोबारा बनाया जाए। इसमें फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं, उसे भी पूरा किया जाए। आढ़तियों का कहना है कि जब से उन्हें दुकान मिली है, तब से आज तक उसे पेंट तक नहीं कराया गया है।
मंडी में भड़की आग ने पानी की कीमत बता दी। हमारे अध्यक्ष ने कई बार शिकायत की। लिखकर भी दिया, लेकिन मंडी में एक नल भी नहीं लगाया गया। अगर मंडी में पानी का इंतजाम होता तो आग इतना नहीं भड़कती। - माजिद हुसैन, आढ़ती
मंडी में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। दुकानों के बीच में पर्याप्त दूरी तक नहीं है। 10 लाख से अधिक का माल राख हुआ है। लाखों के लेन-देन से जुड़े बही खातों के जलने से नई समस्या खड़ी हो रही है। लग रहा है पूरी उधारी डूब जाएगी। - मोहम्मद आबिद, आढ़ती
मंडी सचिव की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। अगर उन्हें आए एक माह हुआ है तो उनसे पहले के सचिवों ने क्या किया? सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए। पानी नहीं दिया, लेकिन नुकसान दे गए। रात को लगी आग ने पानी की कीमत बता दी। - मोहम्मद खुर्शीद, आढ़ती