UP: बरेली में साइबर ठगी करने वाले डॉक्टर समेत पांच आरोपी गिरफ्तार, चीन के गिरोह संग मिलकर करते थे वारदात
बरेली में कैंट थाना पुलिस ने चीन के गैंग से मिलकर देश में साइबर ठगी करने वाले पांच शातिरों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल है। पुलिस ने इनके पास से हथियार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंक खातों के प्रपत्र बरामद किए हैं।
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साइबर अपराध करने वाले चीन के गैंग के साथ मिलकर देश में साइबर ठगी करने वाले पांच शातिरों को बरेली के कैंट थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। साइबर ठग गिरोह के तीन सदस्य बरेली के हैं जबकि एक आरोपी अंबेडकर नगर निवासी होम्योपैथिक डॉक्टर और एक ठग बाराबंकी जिले का है। गिरोह के पास से हथियार और इलेक्ट्रानिक उपकरण, कई बैंक खातों के प्रपत्र आदि सामान बरामद हुए हैं।
सीओ प्रथम आशुतोष शिवम व सीओ हाईवे शिवम आशुतोष ने बताया कि शुक्रवार रात कैंट थाना प्रभारी संजय धीर ने मुखबिर की सूचना पर कृष्णा कॉलोनी रोड पर दीवार की आड़ में खड़ी काली कार को घेरकर खिड़की खुलवाई। कार में बैठे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इन्होंने अपने नाम फरीदपुर के बक्सरिया मोहल्ला निवासी शाकिब अली, भमोरा के बल्लिया निवासी राजकुमार, सुभाषनगर के जागृति नगर निवासी आशीष सिंह, अंबेडकरनगर के अकबरपुर निवासी डॉक्टर सचेंद्र कुमार (बीएचएमएस) व बाराबंकी के टिकैत नगर अगानपुर निवासी बब्लू उर्फ माधोराम बताया। पुलिस को इनसे बरामद डिवाइस में बड़ी मात्रा में ठगी का डाटा मिला है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया। पुलिस गैंग के सरगना सुमित और अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
सरगना सुमित व्हाट्सएप से संचालित करता है गिरोह
शाकिब अली ने बताया कि उसके गिरोह का सरगना नवाबगंज कस्बे का निवासी सुमित है, जो लखनऊ में रहता है। गिरोह में शाकिब नंबर दो और होम्योपैथिक डॉ. सचेंद्र नंबर तीन की हैसियत में हैं। सुमित ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ रखा है। उनके ग्रुप में चीन के साइबर ठग और गैंगस्टर जुड़े हैं। यही गैंगस्टर एपीके फाइल, गेमिंग एप का डाटा उपलब्ध कराते हैं। साइबर ठगी कर करोड़ों रुपये डॉक्टर सचेंद्र के खाते में डाले जाते थे। इसके बाद ठगों के खुलवाए अन्य खातों में यह रकम ट्रांसफर कर दी जाती है। रकम को खातों में डेबिट कार्ड, चेक आदि से वह नकदी में बदल लेते हैं।
तिहाड़ जेल में सीखी साइबर ठगी
शाकिब ने पुलिस को बताया कि पहले गिरोह की कमान तिहाड़ जेल में बंद साथियों के हाथ में थी। उनसे ही उसने साइबर ठगी का फंडा सीखा। इसके बाद डॉक्टर सचेंद्र, सुमित और बबलू के साथ मिलकर साइबर ठगों का गिरोह बना लिया। सचेंद्र के नाम से एसआर संस एंड ग्रुप्स ट्रस्ट बनाया। ट्रस्ट में बेनिफिशयली खाते जुड़वाकर साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर कराते थे। ठगी की रकम से 15 प्रतिशत सचेंद्र रख लेता था। बबलू, राजकुमार और आशीष लोगों को लालच देकर खाते खुलवाते थे और ठगी की रकम डलवाने में सहयोग करते थे। ठगी की अधिकतर रकम सुमित रख लेता था।
गैंग से मिला खातों के प्रपत्र और इलेक्ट्रानिक उपकरण का जखीरा
सीओ प्रथम ने बताया कि पुलिस को गैंग के पास से हथियार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंक खातों से संबंधित प्रपत्रों का जखीरा मिला है। शाकिब से पुलिस ने लैपटॉप, एक तमंचा, दो कारतूस, 240 रुपये मिले। राजकुमार के पास से आईफोन, सचेंद्र के पास मिले बैग से कई चेकबुक, दो मोबाइल, एक ट्रस्ट की मोहर, ट्रस्ट के दस्तावेज, एक आधार कार्ड, दो पैनकार्ड, कई डेबिट कार्ड और 200 रुपये बरामद हुए। आशीष के पास से एक मोबाइल, 130 रुपये, यूजर आईडी, पासवर्ड, पिन, जुनैद के आधार की प्रतिलिपि आदि दस्तावेज बरामद हुए। वहीं बबलू के पास से एक तमंचा, दो कारतूस, दो मोबाइल, 510 रुपये बरामद हुए।
ट्रस्ट के 22 खातों से की देशभर में ठगी, सैकड़ों शिकायतें
सीओ प्रथम ने बताया कि डॉक्टर सचेंद्र के एसआर संस एंड ग्रुप्स ट्रस्ट में शातिरों ने 22 बेनिफिशयल खाते जोड़े। केरल राज्य के कई खातों को भी ट्रस्ट से जोड़ा गया था। इनमें देश भर से ठगी कर करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। ठगी होने पर तमाम राज्यों में इन खातों की शिकायतें भी हुई। जब पुलिस ने समन्वय पोर्टल पर ट्रस्ट के खाते की जानकारी डाली तो पता चला कि एनसीआरपी पोर्टल पर इन खातों की सैकड़ों शिकायतें विभिन्न राज्यों में हुई है। 1.55 करोड़ रुपये ट्रेडिंग धोखाधड़ी से हड़पे गए थे। चूंकि खाता ट्रस्ट के नाम है और पांच करोड़ की लिमिट है, इसलिए इसमें करोड़ों रुपये के लेनदेन पर न तो आसानी से होल्ड लगता था और न ही बैंक या किसी एजेंसी की नजर जाती थी।
एपीके फाइल, ट्रेडिंग निवेश, डिजिटल अरेस्ट थे साइबर ठगों के हथियार
इंस्पेक्टर संजय धीर ने जांच में पाया कि गिरोह के सदस्यों को सुमित ठगी की ट्रेनिंग देता है। सुमित से चीन के साइबर ठगों का भी गठजोड़ है। शाकिब के मोबाइल में सुमित की व्हाट्सएप चैट मिली। इसमें सुमित ने एसएमएस लिसनर नाम की एपीके फाइल बनाकर भेजी थी। इस फाइल के जरिये ठगी की ट्रेनिंग दी गई थी। सचेंद्र ने भी गिरोह के सदस्यों को ठगी की ट्रेनिंग दी थी। गिरोह के पास मिली डिवाइस से बड़ी मात्रा में ठगी का डाटा मिला है। गिरोह के सदस्य एपीके फाइल भेजकर, ट्रेडिंग निवेश और डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करते थे। कई हथकंड़ों से लोगों को शिकार बनाया जा रहा था। सीओ ने बताया कि अब सुमित की तलाश की जा रही है।