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नजीर बनी फिरदौस, पिता की फ्रूट आढ़त पर लिया कब्जा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Fri, 21 Sep 2018 04:59 PM IST
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पिता के निधन के बाद उनकी बेटी फिरदौस ताज ने कर्मचारी से मुचैटा लेकर कब्जा ले लिया। अब वह खुद आढ़त पर काबिज होकर काम करने लगी है। कब्जा लेने में पुलिस और व्यापारियों ने भी सहयोग दिया। उन्होंने लड़कियों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक संदेश दिया है।
फिरदौस ताज के पिता मोहम्मद ताज की डेलापीर स्थित मंडी में इंडिया फ्रूट हाउस के नाम से आढ़त है। दिसंबर 2017 में मोहम्मद ताज का निधन हो गया। आढ़त पर गोविंदापुर का अयूब नाम का कर्मचारी भी काम करता था। फिरदौस माता-पिता की अकेली संतान होने की वजह से अयूब की नीयत बिगड़ गई। मोहम्मद ताज के निधन के बाद उन्होंने आढ़त पर कब्जा नहीं छोड़ा। छह महीने पहले फिरदौस ने उससे कब्जा देने को कहा कि तो वह दबंगई दिखाने लगा। इसके बाद फिरदौस ने मंडी सचिव और पुलिस से शिकायत की। 16 सितंबर को पुलिस ने अयूब को हटाकर फिरदौस को कब्जा दिला दिया। सोमवार को वह सुबह छह बजे आढ़त पहुंची तो देखा कि अयूब चार-पांच दबंगों के साथ फिर बैठा हुआ था। इसके बाद उन्होंने इज्जतनगर इंस्पेक्टर उपेंद्र यादव को फोन करके जानकारी दी। इसके बाद मंडी पुलिस ने अयूब को बलपूर्वक हटा दिया और दोबारा आढ़त पर आने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। फिरदौस अब उन लड़कियों के लिए नजीर बन गई हैं जो समाज के डर से विरोध करने का साहस नहीं जुटा पाती हैं।
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फिरदौस ताज के पिता मोहम्मद ताज की डेलापीर स्थित मंडी में इंडिया फ्रूट हाउस के नाम से आढ़त है। दिसंबर 2017 में मोहम्मद ताज का निधन हो गया। आढ़त पर गोविंदापुर का अयूब नाम का कर्मचारी भी काम करता था। फिरदौस माता-पिता की अकेली संतान होने की वजह से अयूब की नीयत बिगड़ गई। मोहम्मद ताज के निधन के बाद उन्होंने आढ़त पर कब्जा नहीं छोड़ा। छह महीने पहले फिरदौस ने उससे कब्जा देने को कहा कि तो वह दबंगई दिखाने लगा। इसके बाद फिरदौस ने मंडी सचिव और पुलिस से शिकायत की। 16 सितंबर को पुलिस ने अयूब को हटाकर फिरदौस को कब्जा दिला दिया। सोमवार को वह सुबह छह बजे आढ़त पहुंची तो देखा कि अयूब चार-पांच दबंगों के साथ फिर बैठा हुआ था। इसके बाद उन्होंने इज्जतनगर इंस्पेक्टर उपेंद्र यादव को फोन करके जानकारी दी। इसके बाद मंडी पुलिस ने अयूब को बलपूर्वक हटा दिया और दोबारा आढ़त पर आने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। फिरदौस अब उन लड़कियों के लिए नजीर बन गई हैं जो समाज के डर से विरोध करने का साहस नहीं जुटा पाती हैं।
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