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Bareilly News: कमीशन के बगैर आगे नहीं बढ़ती चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइल
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बरेली। बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त कर्मियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति पटल देख रहे प्रशासनिक अधिकारी के रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद विभाग में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कर्मचारियों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलें बगैर कमीशन आगे नहीं बढ़तीं। कई शिकायतें अफसरों तक पहुंची पर कार्रवाई नहीं हुई।
यहां तैनात लिपिकों पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि फाइलों का सत्यापन बगैर कमीशन होता ही नहीं। जिन प्रकरण में वीडियो या ऑडियो वायरल हुए उनमें भी कार्रवाई के नाम पर लिपिकों का महज पटल बदल दिया गया, पर व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। करीब दो सालों में 14 से ज्यादा बार प्रतिपूर्ति पटल का प्रभार बदला जा चुका है।
हैरत यह कि सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। चर्चाएं हैं कि पटल उन्हीं बाबुओं को दिया जाता है, जो उच्चाधिकारियों के करीबी होते हैं। कमीशन ऊपर तक पहुंचता है। लिहाजा, शिकायतों पर पटल बदलता है। कुछ दिन बाद मामला शांत होने पर फिर प्रभार दे दिया जाता है। प्रकरण में सीएमओ से बात करने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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शासन स्तर पर पहुंची थी शिकायत, कार्रवाई सिफर
बीते दिनों चिकित्सा प्रतिपूर्ति का पटल संभाल रहे बाबू पर रुपये मांगने का आरोप लगाकर अफसरों से शिकायत हुई। कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने शासन स्तर पर शिकायत की। तत्कालीन एडी हेल्थ को जांच सौंपी गई। आखिर में बाबू का पटल बदला पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में पटल देख रहे एक बाबू ने पत्नी के लिए नियमों को ताक पर रख दिया। मामला संज्ञान में आने पर यहां भी पटल बदला गया। ब्यूरो
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यहां तैनात लिपिकों पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि फाइलों का सत्यापन बगैर कमीशन होता ही नहीं। जिन प्रकरण में वीडियो या ऑडियो वायरल हुए उनमें भी कार्रवाई के नाम पर लिपिकों का महज पटल बदल दिया गया, पर व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। करीब दो सालों में 14 से ज्यादा बार प्रतिपूर्ति पटल का प्रभार बदला जा चुका है।
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हैरत यह कि सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। चर्चाएं हैं कि पटल उन्हीं बाबुओं को दिया जाता है, जो उच्चाधिकारियों के करीबी होते हैं। कमीशन ऊपर तक पहुंचता है। लिहाजा, शिकायतों पर पटल बदलता है। कुछ दिन बाद मामला शांत होने पर फिर प्रभार दे दिया जाता है। प्रकरण में सीएमओ से बात करने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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शासन स्तर पर पहुंची थी शिकायत, कार्रवाई सिफर
बीते दिनों चिकित्सा प्रतिपूर्ति का पटल संभाल रहे बाबू पर रुपये मांगने का आरोप लगाकर अफसरों से शिकायत हुई। कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने शासन स्तर पर शिकायत की। तत्कालीन एडी हेल्थ को जांच सौंपी गई। आखिर में बाबू का पटल बदला पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में पटल देख रहे एक बाबू ने पत्नी के लिए नियमों को ताक पर रख दिया। मामला संज्ञान में आने पर यहां भी पटल बदला गया। ब्यूरो