{"_id":"71160d18bcdf3d74d9acc3ecd6e6f256","slug":"fax-failed-to-gel-in-time-came-by-mail-order-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐन वक्त पर फेल हुआ जेल का फैक्स, मेल से आया आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐन वक्त पर फेल हुआ जेल का फैक्स, मेल से आया आदेश
बरेली
Updated Fri, 18 Dec 2015 01:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। टाडा बंदी बरियाम सिंह को पेरोल पर छोड़े जाने की गृहमंत्रालय से हरी झंडी मिल जाने के बाद बृहस्पतिवार सुबह से ही कार्रवाई शुरू हो गई थी। केंद्रीय कारागार से भी एक कर्मी डीएम का आदेश लेने के लिए शाहजहांपुर भेजा गया था। वहीं पेरोल की कार्रवाई दिन में पूरी होने पर शाम को बरियाम का बेटा जगदीश सिंह समेत कई परिजन और उसका स्वागत करने को व्यापारी नेता भी जेल गेट पर पहुंच गए थे। सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जेल अधीक्षक एके राय से संपर्क करने पर वह डीएम का आदेश मिलने के बाद ही बरियाम सिंह को जेल से निकालने की बात कह रहे थे। इसी दौरान शाहजहांपुर में मौजूद कारागार कर्मी ने जेल अधीक्षक को फोन पर अवगत कराया कि आदेश मिल गया है। तभी उन्होंने उसे आदेश फैक्स पर भेजने को कहा, लेकिन शाम 6:30 बजे फैक्स मशीन खराब हो गई। जिससे फैक्स बीच में ही अटक गया। इसके बाद 6:35 बजे जेल अधीक्षक ने मेल से आदेश की प्रतिलिपि मंगवाई। जिसे देखकर 7:50 बजे बरियाम सिंह को जेल से बाहर निकाला गया।
जेल गेट पर लगे ‘जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल’ के नारे
बरेली। पच्चीस साल सात माह बाद जेल से निकलते ही उसका इंतजार कर रहे यहां मौजूद व्यापार मंडल के विशाल मेहरोत्रा, प्रिंस सोडी सुहेल शम्सी ने फूल माला पहनाकर बरियाम सिंह का स्वागत किया। इस दौरान ‘जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल’ के नारे लगाए गए।
पुलिस ने पकड़ने के बाद कर दिया था चालान
कैदी बरियाम सिंह का कहना है कि वर्ष 1990 में उसे बंडा पुलिस ने पकड़ा और चालान कर दिया। जेल जाने के बाद ही उसे पता चला कि उस पर टाडा एक्ट लगाया गया है, जो बिल्कुल गलत लगाया गया।
विज्ञापन
बेटे ने कहा, टीवी पर सुना तो चला आया
छोटे बेटे जगदीश सिंह का कहना है कि उसने टीवी पर सुना कि उसके पिता को पेरोल पर छोड़ा जा रहा है। ये बात सुनकर वह बरेली सेंट्रल जेल चला आया। उसने बताया कि उनकी नदी किनारे चार एकड़ जमीन है, जिसे बटाई पर दे रखा है। इसी से परिवार का पालन पोषण होता है।
जेल में था इकलौता टाडा बंदी
केंद्रीय कारागार में बरियाम सिंह इकलौता टाडा बंदी था। जिसे बृहस्पतिवार को पेरोल पर छोड़ा गया।
विज्ञापन
जेल गेट पर लगे ‘जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल’ के नारे
बरेली। पच्चीस साल सात माह बाद जेल से निकलते ही उसका इंतजार कर रहे यहां मौजूद व्यापार मंडल के विशाल मेहरोत्रा, प्रिंस सोडी सुहेल शम्सी ने फूल माला पहनाकर बरियाम सिंह का स्वागत किया। इस दौरान ‘जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल’ के नारे लगाए गए।
विज्ञापन
पुलिस ने पकड़ने के बाद कर दिया था चालान
कैदी बरियाम सिंह का कहना है कि वर्ष 1990 में उसे बंडा पुलिस ने पकड़ा और चालान कर दिया। जेल जाने के बाद ही उसे पता चला कि उस पर टाडा एक्ट लगाया गया है, जो बिल्कुल गलत लगाया गया।
विज्ञापन
बेटे ने कहा, टीवी पर सुना तो चला आया
छोटे बेटे जगदीश सिंह का कहना है कि उसने टीवी पर सुना कि उसके पिता को पेरोल पर छोड़ा जा रहा है। ये बात सुनकर वह बरेली सेंट्रल जेल चला आया। उसने बताया कि उनकी नदी किनारे चार एकड़ जमीन है, जिसे बटाई पर दे रखा है। इसी से परिवार का पालन पोषण होता है।
जेल में था इकलौता टाडा बंदी
केंद्रीय कारागार में बरियाम सिंह इकलौता टाडा बंदी था। जिसे बृहस्पतिवार को पेरोल पर छोड़ा गया।