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Bareilly News: ऑर्गेनिक और नाइट्रोजन की कमी से खतरे में खेत की सेहत
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बरेली। कृषि विभाग ने इन दिनों खेतों की सेहत जांचने के लिए अभियान चलाया है। खरीफ सीजन में कुल 73 हजार मृदा नमूने में गुणवत्ता की जांच हो रही है। मृदा के नमूने एकत्र कर लिए गए हैं। अब उनमें न्यूट्रिएंट की जांच हो रही है। इस तरह प्रयोगशाला में अब तक 48 हजार नमूनों की जांच भी हो गई है। जांचे गए मृदा के नमूनों में ऑर्गेनिक, नाइट्रोजन की कमी मिली है, जबकि मृदा से फॉस्फोरस और पोटाश भी अभाव देखने को मिल रहा है।
सहायक निदेशक मृदा परीक्षण नरेंद्र प्रताप ने बताया कि मंडल के सभी चारों जिलों में खरीफ सीजन में खेतों की मिट्टी की जांचने के निर्देश मिले थे। मृदा के 72,800 नमूने संग्रहीत कर उनमें न्यूट्रिएंट जांचने का लक्ष्य मिला था। जिसके क्रम में बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर में मृदा के 21-21 हजार नमूने संग्रहीत किए गए हैं। इसी तरह पीलीभीत के खतों से 9800 नमूने लिए गए हैं। इन सभी नमूनों में 12 पैरामीटर में न्यूट्रिएंट की जांच होनी है। इन संग्रहीत मृदा के सभी नमूनों में एल-1 स्तर के जैसे नाइट्रोजन, पीएच, ईसी, ऑर्गेनिक, कार्बन, फॉस्फोरस, पोटाश, एनपीके आदि न्यूट्रिएंट की जांच हो चुकी है। इसके अलावा एल-2 स्तर की जांच में 48 हजार नमूनों के परीक्षण का भी काम पूरा हो गया है। सहायक निदेशक ने बताया कि कॉपर, मैग्ननीश, सल्फर, जिंक, कॉपर, आयरन, बोरान की जांच हो रही है। उन्होंने बताया कि अब तक जांचे गए मृदा के नमूनों से पता चला है कि मिट्टी में ऑर्गेनिक, नाइट्रोजन की भारी कमी है। इसी तरह फॉस्फोरस और पोटाश जैसे न्यूट्रिएंट की भी कमी सामने आ रही है। मृदा परीक्षण की रिपोर्ट में देखा गया है कि बरेली जिले के मृदा के 16,400 नमूने हैं, जिनकी जांच एल-2 स्तर पर भी हो गई है। इसके अलावा 21 हजार अन्य नमूनों के न्यूट्रिएंट की जांच हो रही है। सहायक निदेशक ने बताया कि 30 सितंबर के बाद सभी संबंधित किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटने का काम होगा। सहायक निदेशक मृदा परीक्षण ने बताया कि अभियान के क्रम में संबंधित किसानों के खेतों की मिट्टी जांच नि:शुल्क की जा रही है। वैसे सामान्य दिनों में मिट्टी की जांच के लिए 300 रुपये शुल्क है, जिसमें किसानों को सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद उन्हें केवल 102 रुपये देने होते हैं। संवाद
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सहायक निदेशक मृदा परीक्षण नरेंद्र प्रताप ने बताया कि मंडल के सभी चारों जिलों में खरीफ सीजन में खेतों की मिट्टी की जांचने के निर्देश मिले थे। मृदा के 72,800 नमूने संग्रहीत कर उनमें न्यूट्रिएंट जांचने का लक्ष्य मिला था। जिसके क्रम में बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर में मृदा के 21-21 हजार नमूने संग्रहीत किए गए हैं। इसी तरह पीलीभीत के खतों से 9800 नमूने लिए गए हैं। इन सभी नमूनों में 12 पैरामीटर में न्यूट्रिएंट की जांच होनी है। इन संग्रहीत मृदा के सभी नमूनों में एल-1 स्तर के जैसे नाइट्रोजन, पीएच, ईसी, ऑर्गेनिक, कार्बन, फॉस्फोरस, पोटाश, एनपीके आदि न्यूट्रिएंट की जांच हो चुकी है। इसके अलावा एल-2 स्तर की जांच में 48 हजार नमूनों के परीक्षण का भी काम पूरा हो गया है। सहायक निदेशक ने बताया कि कॉपर, मैग्ननीश, सल्फर, जिंक, कॉपर, आयरन, बोरान की जांच हो रही है। उन्होंने बताया कि अब तक जांचे गए मृदा के नमूनों से पता चला है कि मिट्टी में ऑर्गेनिक, नाइट्रोजन की भारी कमी है। इसी तरह फॉस्फोरस और पोटाश जैसे न्यूट्रिएंट की भी कमी सामने आ रही है। मृदा परीक्षण की रिपोर्ट में देखा गया है कि बरेली जिले के मृदा के 16,400 नमूने हैं, जिनकी जांच एल-2 स्तर पर भी हो गई है। इसके अलावा 21 हजार अन्य नमूनों के न्यूट्रिएंट की जांच हो रही है। सहायक निदेशक ने बताया कि 30 सितंबर के बाद सभी संबंधित किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटने का काम होगा। सहायक निदेशक मृदा परीक्षण ने बताया कि अभियान के क्रम में संबंधित किसानों के खेतों की मिट्टी जांच नि:शुल्क की जा रही है। वैसे सामान्य दिनों में मिट्टी की जांच के लिए 300 रुपये शुल्क है, जिसमें किसानों को सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद उन्हें केवल 102 रुपये देने होते हैं। संवाद
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