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विशेषज्ञ हैरानः विकास से तेज दौड़ा प्रदूषण
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : demo photo
सिविल लाइंस के बाद आईवीआरआई इलाके में भी सांस लेना मुश्किल
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बरेली। ढेर सारी विकास परियोजनाओं को शुरू कराकर उन्हें लंबे वक्त तक उनके हाल पर छोड़े रखने का पूरे शहर को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कई सालों से प्रदूषण स्तर के मामले में सिविल लाइंस जैसे व्यस्त इलाकों से अलग पहचान बनाए रखने वाला आईवीआरआई इलाका भी अब उनकी बराबरी पर आ गया है। हैरान विशेषज्ञों ने ओवरब्रिज निर्माण के दौरान बुरी तरह ध्वस्त हो चुकी सड़कों से उठते धूल के गुबार को इसकी वजह करार दिया है।
बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के एमिरेट डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने सिविल लाइंस और आईवीआरआई कैंपस में दो जगह वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगाए हुए हैं। कई सालों के रिकॉर्ड के मुताबिक सिविल लाइंस के मुकाबले आईवीआरआई में एक्यूआई 50 से 60 फीसदी कम रिकॉर्ड हो रहा था लेकिन अब कुछ दिनों से दोनों जगह का प्रदूषण एक्यूआई पर ढाई सौ के पार दर्ज हो रहा है। डॉ. सक्सेना के मुताबिक आईवीआरआई का आंकड़ा शहर में तेजी से फैल रहे प्रदूषण का प्रमाण है। आईवीआरआई ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान भी यह स्थिति नहीं हुई थी। अब इतना बड़ा परिवर्तन चौंकाने के साथ चिंता में डालने वाला भी है। उनकी पड़ताल में इस प्रदूषण का कारण धूल के गुबार पाए गए जो इस इलाके में बुरी तरह ध्वस्त सड़कों से उठ रहे हैं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को इसकी जानकारी दी है।
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बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के एमिरेट डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने सिविल लाइंस और आईवीआरआई कैंपस में दो जगह वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगाए हुए हैं। कई सालों के रिकॉर्ड के मुताबिक सिविल लाइंस के मुकाबले आईवीआरआई में एक्यूआई 50 से 60 फीसदी कम रिकॉर्ड हो रहा था लेकिन अब कुछ दिनों से दोनों जगह का प्रदूषण एक्यूआई पर ढाई सौ के पार दर्ज हो रहा है। डॉ. सक्सेना के मुताबिक आईवीआरआई का आंकड़ा शहर में तेजी से फैल रहे प्रदूषण का प्रमाण है। आईवीआरआई ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान भी यह स्थिति नहीं हुई थी। अब इतना बड़ा परिवर्तन चौंकाने के साथ चिंता में डालने वाला भी है। उनकी पड़ताल में इस प्रदूषण का कारण धूल के गुबार पाए गए जो इस इलाके में बुरी तरह ध्वस्त सड़कों से उठ रहे हैं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को इसकी जानकारी दी है।
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एनजीटी की गाइड लाइन का पालन नहीं
डॉ. सक्सेना के मुताबिक एनजीटी की गाइडलाइन में निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री को ढककर रखने के निर्देश हैं। उखड़ी सड़कों को भी तत्काल दुरुस्त करने का आदेश है। मगर सिस्टम का ध्यान इस पर नहीं है। कई बार अफसरों को प्रदूषण की रिपोर्ट दिखाने और चर्चा करने का भी कोई नतीजा नहीं निकला। प्रदूषण का स्तर दोनों ही इलाकों में 210 से 250 के बीच दर्ज हो रहा है।
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