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Bareilly News: महंगी फीस तोड़ रही बच्चों को बेहतर स्कूल में शिक्षा दिलाने का सपना

Wed, 03 Apr 2024 02:18 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Wed, 03 Apr 2024 02:18 AM IST
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Expensive fees are breaking the dream of providing education to children in better schools.
बरेली। अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा प्रदान करना हर अभिभावक का सपना होता है। ऐसे में निजी विद्यालयों की बढ़ती फीस उनके कंधों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। आलम यह है कि नामचीन विद्यालयों में प्रवेश शुल्क के नाम पर ही लाखों रुपये ले लिए जा रहे हैं।
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विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। जिले के नामचीन स्कूलों के प्रीएनसी कक्षा में प्रवेश के लिए अभिभावकों को सिफारिशें लगानी पड़ी रही हैं। प्रवेश शुल्क के नाम पर भी बड़ी रकम ली जा रही है। इससे अभिभावक परेशान हैं। कोहाड़पीर निवासी विनोद ने बताया कि उनके पड़ोसी ने अपने बच्चे का एक नामचीन स्कूल में प्रवेश कराया है। उसी स्कूल में वह अपने बेटे का प्रवेश कराने ले गए तो मना कर दिया गया। सिफारिश लगाने पर वे प्रवेश देने के लिए राजी तो हो गए पर लाखों रुपये की फीस सुनकर उन्होंने अपने बच्चे को दूसरे स्कूल में पढ़ाने का निर्णय लिया है।
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मध्यम स्तर के निजी विद्यालय की तीन माह की फीस
कक्षा फीस
प्रीएनसी व केजी 9,300 से 10,000
एक व दो 10,450 से 11,000
तीन व पांच 10,800 से 12,000
प्रवेश शुल्क 5,000 से 10,000
पंजीकरण शुल्क 500

शहर के नामचीन विद्यालय की तिमाही फीस
कक्षा फीस
प्रीएनसी से पांचवीं 16,000
छह से दसवीं 16,500
11वीं और 12वीं 18,000
पंजीकरण शुल्क 1,000
प्रवेश शुल्क 2,50,000

नोट : शुल्क रुपये में है। यह विद्यालयों के हिसाब से कम या अधिक भी हो सकता है।

वर्जन
फीस बढ़ाने के लिए उपभोक्ता उत्पाद सूचकांक (सीपीआई) और पांच प्रतिशत को जोड़ा जाता है। इसका योग अगर अधिक होता है तो शुल्क निर्धारण समिति से अनुमति लेनी होती है।
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- निर्भय बेनीवाल, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
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उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अधिनियम लागू कराने में जिला प्रशासन और जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति असफल साबित हुई है। शुल्क अधिनियम का अस्तित्व में आना और उसे लागू कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता में है। इसके बाद भी छह साल बीतने के बाद भी नतीजा शून्य है। इससे अभिभावकों में अविश्वास पैदा हुआ है। साथ ही स्कूलों की मनमानी पहले से अधिक बढ़ गई है। - मुहम्मद खालिद जीलानी, समन्वयक, पैरेंट्स फोरम बरेली


जिला शुल्क निर्धारण समिति की लंबे समय से बैठक नहीं हुई है। समिति को देखना है कि स्कूल जरूरत हिसाब से फीस बढ़ा रहे हैं या नहीं। कानून में सीपीआई और पांच फीसदी तक फीस बढ़ाने का प्रावधान है। समिति बैठक कर स्कूलों के दस्तावेजों का अध्ययन करे। इसको लेकर डीआईओएस से मुलाकात की जाएगी। - अंकुर सक्सेना, प्रदेश अध्यक्ष, अभिभावक संघ
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