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शराब के खेल में घिरे कानपुर के आबकारी अफसर
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फाइल फोटो
- फोटो : demo photo
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देना होगा जवाब, टपरी डिस्टिलरी से 28 फरवरी को कानपुर भेजी गई शराब दुकानों तक क्यों नहीं पहुंची
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आगे बढ़ी पुलिस की छानबीन, पूरे गोलमाल में शामिल शराब कारोबारियों की जड़ बरेली में
बरेली। सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी से कानपुर भेजी गई शराब बरेली में मंगा लिए जाने के मामले में पुलिस की छानबीन जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आबकारी महकमा भी घिरता जा रहा है। अब पता चला है कि बरेली में पकड़ा गया शराब भरा ट्रक टपरी डिस्टिलरी से 28 फरवरी को निकला था। इसके बाद ट्रक कानपुर में ही खड़ा रहा और फिर बरेली में मंगा लिया गया। यह तथ्य उजागर होने के बाद अब कानपुर के आबकारी अफसरों पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।
पुलिस ने 24 मार्च को यहां बीसलपुर रोड पर शराब भरा ट्रक पकड़ा था। इस ट्रक में देसी शराब की 14 सौ से ज्यादा पेटियां भरी थीं। पुलिस की छानबीन शुरू होने के साथ चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे। पता चला कि टपरी डिस्टिलरी से शराब कानपुर में अजय जायसवाल के गोदाम को भेजी गई थी जो शराब को बरेली मंगाने वाले शराब कारोबारी मनोज जायसवाल का रिश्तेदार है। छानबीन में यह भी पता चला कि जिस गोदाम से शराब बरेली भेजी गई है, उसे एसटीएफ पहले ही सीज कर चुकी थी। टपरी डिस्टिलरी के मालिक भी बरेली के प्रणव अनेजा हैं।
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दरअसल तीन मार्च को टपरी डिस्टिलरी पर एसटीएफ ने छापा मारा था। इस दौरान सौ करोड़ की टैक्स चोरी के मामले का खुलासा हुआ तो डिस्टिलरी को सीज कर दिया गया। इसके साथ उन्नाव समेत कई और शहरों में उसके शराब डिपो भी सीज कर दिए गए थे। इनमें कानपुर का वह डिपो भी शामिल था जहां के लिए भेजी गई शराब बरेली भेज दी गई।
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डिप्टी एक्साइज कमिश्नर राजशेखर ने बताया कि जो ट्रक बरेली में पकड़ा गया है, वह 28 फरवरी को टपरी डिस्टिलरी से चला था। यह शराब तीन मार्च तक कानपुर में शराब की दुकानों पर पहुंच जानी चाहिए थी। ट्रक बरामद होने के बाद कानपुर के आबकारी महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल वहां के आबकारी विभाग की ही जिम्मेदारी थी कि शराब तय समय में दुकानों पर पहुंचे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसकी जानकारी वहां के आबकारी विभाग को होनी चाहिए थी। शासन स्तर पर इसकी जांच हो रही है। इसमें आबकारी विभाग के अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।
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आगे बढ़ी पुलिस की छानबीन, पूरे गोलमाल में शामिल शराब कारोबारियों की जड़ बरेली में बरेली। सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी से कानपुर भेजी गई शराब बरेली में मंगा लिए जाने के मामले में पुलिस की छानबीन जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आबकारी महकमा भी घिरता जा रहा है। अब पता चला है कि बरेली में पकड़ा गया शराब भरा ट्रक टपरी डिस्टिलरी से 28 फरवरी को निकला था। इसके बाद ट्रक कानपुर में ही खड़ा रहा और फिर बरेली में मंगा लिया गया। यह तथ्य उजागर होने के बाद अब कानपुर के आबकारी अफसरों पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।
पुलिस ने 24 मार्च को यहां बीसलपुर रोड पर शराब भरा ट्रक पकड़ा था। इस ट्रक में देसी शराब की 14 सौ से ज्यादा पेटियां भरी थीं। पुलिस की छानबीन शुरू होने के साथ चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे। पता चला कि टपरी डिस्टिलरी से शराब कानपुर में अजय जायसवाल के गोदाम को भेजी गई थी जो शराब को बरेली मंगाने वाले शराब कारोबारी मनोज जायसवाल का रिश्तेदार है। छानबीन में यह भी पता चला कि जिस गोदाम से शराब बरेली भेजी गई है, उसे एसटीएफ पहले ही सीज कर चुकी थी। टपरी डिस्टिलरी के मालिक भी बरेली के प्रणव अनेजा हैं।
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दरअसल तीन मार्च को टपरी डिस्टिलरी पर एसटीएफ ने छापा मारा था। इस दौरान सौ करोड़ की टैक्स चोरी के मामले का खुलासा हुआ तो डिस्टिलरी को सीज कर दिया गया। इसके साथ उन्नाव समेत कई और शहरों में उसके शराब डिपो भी सीज कर दिए गए थे। इनमें कानपुर का वह डिपो भी शामिल था जहां के लिए भेजी गई शराब बरेली भेज दी गई।
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डिप्टी एक्साइज कमिश्नर राजशेखर ने बताया कि जो ट्रक बरेली में पकड़ा गया है, वह 28 फरवरी को टपरी डिस्टिलरी से चला था। यह शराब तीन मार्च तक कानपुर में शराब की दुकानों पर पहुंच जानी चाहिए थी। ट्रक बरामद होने के बाद कानपुर के आबकारी महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल वहां के आबकारी विभाग की ही जिम्मेदारी थी कि शराब तय समय में दुकानों पर पहुंचे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसकी जानकारी वहां के आबकारी विभाग को होनी चाहिए थी। शासन स्तर पर इसकी जांच हो रही है। इसमें आबकारी विभाग के अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।