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Bareilly News: शहर की इन गलियों में आज भी अधूरी रह जाती हैं बेटियों की पढ़ाई

Sat, 08 Aug 2026 01:24 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sat, 08 Aug 2026 01:24 AM IST
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Even today, the education of daughters remains incomplete in these city streets.
बरेली। शहर के बाकरगंज, सराय खाम, हाजियापुर, शाहदाना और श्यामगंज की गलियों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा आज भी हकीकत से कोसों दूर है। यहां की कई बेटियां गरीबी, पारिवारिक मजबूरियों, जागरूकता की कमी और परिवार की रुढि़वादी सोच के कारण स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच पातीं। किसी की पढ़ाई तीसरी में छूट गई तो कुछ को पांचवीं या दसवीं के बाद घर बैठना पड़ा। पढ़ाई की उम्र में ये बेटियां जरी-जरदोजी और पतंग बनाने का काम कर रही हैं।
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दो वक्त की रोटी और बेटियों की पढ़ाई में करना पड़ा चुनाव

आजमनगर की रिहाना ने बताया कि पति रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पांच बच्चों में तीन बेटियां हैं। आर्थिक हालात ऐसे रहे कि कोई बेटी तीसरी कक्षा से आगे नहीं पढ़ सकी। जब घर में दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल हो तो पढ़ाई पीछे छूट जाती है। बेटियां पतंग बनाकर कुछ रुपये कमा लेती हैं, जिससे घर का खर्च चलाने में मदद मिलती है। इसी मोहल्ले की जैबुननिशा के शौहर का निधन हो चुका है। पांच बेटियों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। वह दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका कर परिवार चलाती हैं, जबकि बेटियां हथकरघा और कारचोबी का काम करती हैं। मैनाज भी पांच बेटियों के साथ कारचोबी का काम करती हैं। उनके पति लकवाग्रस्त हो गए हैं।
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बेटियाें को स्कूल भेजने में लगता है डर
श्यामगंज की आमना बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार जिम्मेदारी उन पर आ गई। तीनों बेटियां पतंग बनाती हैं। पड़ोस की बहुत कम लड़कियां स्कूल जाती हैं। इसलिए उनकी भी हिम्मत नहीं पढ़ती। परिवार को चलाने के लिए एक हजार पतंग बनाने पर मात्र सौ रुपये मिलते हैं। छोटी बेटी को स्कूल भेजा तो वहां भी पढ़ाई नहीं होती। इसीलिए पेट भरने के लिए कारचोबी का काम करेंगी। यहीं की मेहरुनिशां की तीन बेटियां हैं, लेकिन वे कक्षा तीन तक ही पढ़ सकीं। मेहरुनिशां के अनुसार माहौल ठीक नहीं है। बेटियों को स्कूल भेजने में डर लगता है।
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मां नहीं रहीं, पिता बीमार...बेटियां संभाल रहीं घर
हाजियापुर के मोहम्मद रईस की पत्नी नजमा का कई वर्ष पहले निधन हो गया। उनकी पांच बेटियां अब घर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। बड़ी बेटी नाजिश बताती हैं कि जब वह नौवीं कक्षा में थीं, तभी मां का निधन हो गया और पढ़ाई छूट गई। पिता हृदय रोग से पीड़ित हैं और नियमित काम नहीं कर पाते। शैक्षिक प्रमाणपत्र के बिना नौकरी मिलना मुश्किल है, इसलिए जरी का काम कर परिवार चला रही हैं। उनकी सभी बहनें पढ़ना चाहती थीं, लेकिन किसी की पढ़ाई पांचवीं तो किसी की दसवीं के बाद रुक गई।

बेटी बड़ी होगी तो शादी कर देंगे, नौकरी थोड़ी करानी है
शहदाना की फातिमा अपने पोते-पोतियों की परवरिश कर रही हैं। बहू मिराज का कई साल पहले निधन हो चुका है, जबकि बेटा पंजाब में मजदूरी करता है। घर की तीन छोटी बेटियां जो 15 वर्ष तक की हैं, स्कूल नहीं जातीं। फातिमा कहती हैं कि स्कूल एक किलोमीटर दूर है और बेटियों को ले जाने वाला कोई नहीं है। न ही कभी कोई अधिकारी समझाने आया। बेटियां बड़ी होंगी तो शादी कर देंगे, नौकरी तो करानी नहीं है। जरी का काम सीख लेंगी, वही काफी है।
कई स्कूलों में नहीं बढ़ रही छात्र संख्या
हर साल स्कूल चलो अभियान चलाए जाने के बावजूद प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही। प्राथमिक विद्यालय काजी टोला की प्रधानाध्यापक सुनीता आर्या ने बताया कि वर्ष 2025 की तरह इस वर्ष भी 57 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें करीब 20 छात्राएं हैं। प्राथमिक विद्यालय बांस मंडी में 35 बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि ख्वाजा कुतुब स्कूल में केवल दो छात्र हैं। शिक्षिका सामरीन बताती हैं कि वह अकेले ही दो विद्यालयों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ऐसे में कक्षाओं का संचालन प्रभावित होता है। प्राथमिक विद्यालय हजियापुर में बच्चों की संख्या पिछले वर्ष 78 थी। इस बार घटकर 58 रह गई है। प्रधानाध्यापक दुर्गेश के अनुसार कई छात्राएं जरी-जरदोजी, सिलाई-कढ़ाई और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण दाखिला लेने के बावजूद पढ़ाई छोड़ देती हैं। स्कूल में केवल दो शिक्षकों पर जिम्मेदारी, एसआईआर, जनगणना भी पढ़ाई को प्रभावित करती है।

वर्जन
विभाग की ओर से अभियान चलाया जाएगा। डीएलएड प्रशिक्षु घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनका दाखिला कराएंगे। - तौसीफ, खंड शिक्षा अधिकारी नगरीय क्षेत्र

छात्रों को स्कूलों से जोड़ने के लिए प्रतिवर्ष सर्वे कराया जाता है। इस संबंध में बीएसए व संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। - अविनाश सिंह, जिलाधिकारी
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