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चैयरमैन को नहीं ईओ को हटाने का अधिकार
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 19 Mar 2016 12:34 AM IST
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ईओ को एक तरफा कार्यमुक्त करने का अधिकार नगर पालिका परिषद अध्यक्ष को नहीं है। दो दिन पहले नवाबगंज की चेयमैन शहला ताहिर ने अपने स्तर से बोर्ड बैठक बुलाकर ईओ पर कार्यालय न बैठने का आरोप लगाते हुए एक तरफा कार्य मुक्त करने के आदेश कर दिए थे। यह आदेश शुक्रवार की शाम तक कलक्ट्रेट नहीं पहुंचा है। इससे पहले भी अध्यक्ष ईओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को लिख चुकी है और उनके अनुरोध पर डीएम शासन को संस्तुति भेज चुके हैं। संकेत मिले हैं कि शासन ने इन आरोपों को गंभीर नहीं माना है इसीलिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
25 जुलाई 1985 को तत्कालीन उप सचिव जेएन सक्सेना ने सभी डीएम और नगर पालिका के प्रशासकों को लिखे पत्र में लिखा था कि अधिशासी अधिकारी केंद्रीयकृत सेवा के कर्मचारी हैं। उनको प्रशासक एवं अध्यक्ष अपने स्तर से एक तरफा कार्यमुक्त नहीं कर सकते। क्योंकि उनके नियुक्ति अधिकारी निदेशक हैं। उन्हीं में तबादले और निलंबन जैसी कार्रवाई के अधिकार निहित हैं। यदि किसी भी निकाय में ईओ अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ निलंबन, तबादला और विभागीय कार्रवाई के लिए सीधे या फिर डीएम के माध्यम से निदेशक को लिख सकते हैं। सक्षम अधिकारी के माध्यम से कराई गई जांच में जो भी दोष सिद्ध होगा, उसके आधार पर ईओ के खिलाफ कार्रवाई होगी।
नवाबगंज के मौजूदा ईओ नरेंद्र कुमार जौहरी की तरह 1997 में बिजनौर की बहटोरा नगर पालिका के अध्यक्ष ने ईओ को कार्यमुक्त कर दिया था। उन दिनों आयुक्त एवं निदेशक योगेश कुमार ने डीएम को अध्यक्ष का आदेश निरस्त करने के साथ-साथ वहां पर तैनात करने के निर्देश दिए थे। साथ में यह भी कहा कि ईओ के खिलाफ आरोप हैं तो उनकी वरिष्ठ अधिकारी से विभागीय जांच कराके कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजें। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी लेकिन एक तरफा कार्य मुक्त करने का आदेश गलत है।
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25 जुलाई 1985 को तत्कालीन उप सचिव जेएन सक्सेना ने सभी डीएम और नगर पालिका के प्रशासकों को लिखे पत्र में लिखा था कि अधिशासी अधिकारी केंद्रीयकृत सेवा के कर्मचारी हैं। उनको प्रशासक एवं अध्यक्ष अपने स्तर से एक तरफा कार्यमुक्त नहीं कर सकते। क्योंकि उनके नियुक्ति अधिकारी निदेशक हैं। उन्हीं में तबादले और निलंबन जैसी कार्रवाई के अधिकार निहित हैं। यदि किसी भी निकाय में ईओ अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ निलंबन, तबादला और विभागीय कार्रवाई के लिए सीधे या फिर डीएम के माध्यम से निदेशक को लिख सकते हैं। सक्षम अधिकारी के माध्यम से कराई गई जांच में जो भी दोष सिद्ध होगा, उसके आधार पर ईओ के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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नवाबगंज के मौजूदा ईओ नरेंद्र कुमार जौहरी की तरह 1997 में बिजनौर की बहटोरा नगर पालिका के अध्यक्ष ने ईओ को कार्यमुक्त कर दिया था। उन दिनों आयुक्त एवं निदेशक योगेश कुमार ने डीएम को अध्यक्ष का आदेश निरस्त करने के साथ-साथ वहां पर तैनात करने के निर्देश दिए थे। साथ में यह भी कहा कि ईओ के खिलाफ आरोप हैं तो उनकी वरिष्ठ अधिकारी से विभागीय जांच कराके कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजें। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी लेकिन एक तरफा कार्य मुक्त करने का आदेश गलत है।
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