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Bareilly News: भू अधिग्रहण घोटाले के आरोपी अभियंताओं ने दाखिल किए जवाब
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बरेली। भू अधिग्रहण घोटाले के आरोपी लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने जवाब दाखिल कर दिए। जवाबों का परीक्षण किया जा रहा है। चार्जशीट के आधार पर सवाल-जवाब होंगे। इसके बाद जांच कर रहे मुख्य अभियंता अपनी रिपोर्ट शासन को देंगे। तब शासन स्तर से कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण और रिंग रोड के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के वक्त परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में लोक निर्माण विभाग के अभियंता आरोपों से घिर गए थे। डीएम के स्तर से कराई गई जांच में इन्हें जिम्मेदार माना गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) नारायण सिंह, सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता राकेश कुमार और अंकित सक्सेना को कार्रवाई के घेरे में लिया था। तीन अभियंता निलंबित किए गए थे। स्नेहलता श्रीवास्तव अब भी निलंबित चल रही हैं। राकेश कुमार और अंकित सक्सेना कोर्ट के हस्तक्षेप पर बहाल हुए हैं। इन चारों अभियंताओं के नाम आरोपपत्र जारी किए गए थे। ब्यूरो
ये है मामला
डीएम ने 30 अगस्त 2024 को सीडीओ और एडीएम की संयुक्त जांच समिति बनाई थी। जांच रिपोर्ट में परिसंपत्तियों के अधिक मूल्यांकन के लिए एनएचएआई की ओर से नामित कंसल्टेंसी और मूल्यांकन एजेंसी को दोषी माना गया है। इस मूल्यांकन को सत्यापित करने के लिए लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को जिम्मेदार ठहराया गया है।
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जवाब में अभियंताओं ने किया अपना बचाव
सूत्रों के मुताबिक, अभियंताओं ने दाखिल किए गए जवाब में खुद को निर्दोष बताते हुए एनएचएआई की कंसल्टेंट एजेंसी पर ही पूरा ठीकरा फोड़ दिया है। इस जवाब से जांच अधिकारी कितना संतुष्ट होते हैं, यह बात जांच पूरी होने पर ही साफ होगी।
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बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण और रिंग रोड के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के वक्त परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में लोक निर्माण विभाग के अभियंता आरोपों से घिर गए थे। डीएम के स्तर से कराई गई जांच में इन्हें जिम्मेदार माना गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) नारायण सिंह, सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता राकेश कुमार और अंकित सक्सेना को कार्रवाई के घेरे में लिया था। तीन अभियंता निलंबित किए गए थे। स्नेहलता श्रीवास्तव अब भी निलंबित चल रही हैं। राकेश कुमार और अंकित सक्सेना कोर्ट के हस्तक्षेप पर बहाल हुए हैं। इन चारों अभियंताओं के नाम आरोपपत्र जारी किए गए थे। ब्यूरो
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ये है मामला
डीएम ने 30 अगस्त 2024 को सीडीओ और एडीएम की संयुक्त जांच समिति बनाई थी। जांच रिपोर्ट में परिसंपत्तियों के अधिक मूल्यांकन के लिए एनएचएआई की ओर से नामित कंसल्टेंसी और मूल्यांकन एजेंसी को दोषी माना गया है। इस मूल्यांकन को सत्यापित करने के लिए लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को जिम्मेदार ठहराया गया है।
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जवाब में अभियंताओं ने किया अपना बचाव
सूत्रों के मुताबिक, अभियंताओं ने दाखिल किए गए जवाब में खुद को निर्दोष बताते हुए एनएचएआई की कंसल्टेंट एजेंसी पर ही पूरा ठीकरा फोड़ दिया है। इस जवाब से जांच अधिकारी कितना संतुष्ट होते हैं, यह बात जांच पूरी होने पर ही साफ होगी।