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Bareilly News: बीस हजार रुपये घूस लेते विद्युत निगम का लिपिक गिरफ्तार, आरोपी के बैग से मिले 1.76 लाख रुपये
Sat, 02 Aug 2025 06:41 PM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 02 Aug 2025 06:41 PM IST
सार
बरेली में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने मुख्य अभियंता कार्यालय में छापा मारकर बिजली निगम के क्लर्क को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान बैग से भी रकम बरामद हुई है।
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आरोपी क्लर्क
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरेली में एंटी करप्शन टीम ने शनिवार को बीस हजार रुपये घूस लेते हुए विद्युत निगम के लिपिक अजीत कुमार को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के बैग से 1.76 लाख रुपये और मिले। वह इस रकम का कोई हिसाब नहीं दे सका। वह रकम से जुड़ी रसीद आदि भी नहीं दिखा सका, जिस पर एंटी करप्शन की टीम ने इस रकम को भी जब्त कर लिया। कोतवाली में आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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मीरगंज के गांव गूला निवासी आभाष सिंह चौहान ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत दर्ज कराई थी कि बिजली का बिल ठीक करने के बदले अजीत 20 हजार रुपये घूस मांग रहा है। इस पर शनिवार अपराह्न साढ़े तीन बजे एंटी करप्शन टीम मुख्य अभियंता कार्यालय परिसर में बने अधिशासी अभियंता प्रथम मनोज कुमार के दफ्तर पहुंची। वहां लिपिक अजीत कुमार को आभाष सिंह चौहान से 20 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे कोतवाली ले गई। टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है।
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एक्सईएन और एसडीई बोले- बाबू से ही बात करो
घूस लेते पकड़ा गया विद्युत निगम का लिपिक अजीत कुमार अफसरों का दुलारा है। उसने सात माह से आभाष को चकरघिन्नी बना रखा था। एक्सईएन व उप खंड अभियंता (एसडीई) ने भी अजीत की मनमानी के खिलाफ आभाष की फरियाद अनसुनी कर दी थी। उन्होंने कह दिया कि अजीत ही समाधान करेगा। परेशान होकर उसने एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी।
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आभाष ने बताया कि उनके घर का कनेक्शन पिता रनवीर सिंह के नाम पर है। उनके घर का बिल 24 नवंबर 2023 से जमा नहीं हुआ था, जो 88,703 रुपये का था। बिल में राहत के लिए सात माह पहले वह रामपुर बाग स्थित विद्युत निगम के कार्यालय गए थे। तब से वह चक्कर लगा रहे थे। इसी बीच विद्युत निगम की ओर से उन पर बिल जमा करने का दबाव बनाया जाने लगा। आर्थिक तंगी की वजह से वह बिल जमा नहीं कर पा रहे थे।
बताया कि वह अफसरों के चक्कर लगाते रहे, इस दौरान तीन एसडीई बदल गए। समस्या का समाधान करने के बजाय सबने बाबू के कमरे की ही राह दिखाई। हालांकि, मौजूदा एसडीई से उनकी मुलाकात नहीं हुई है। बिल जमा न करने पर उनके खिलाफ रिपोर्ट भी लिखा दी गई। फिर लिपिक अजीत ने 65 हजार से घूसखोरी की बोली शुरू की। 55 हजार में सौदा तय हुआ। अजीत ने कहा कि इसमें से 20 हजार उसके होंगे और 35 हजार की वह रसीद कटवा लें। उनका बिल ठीक हो जाएगा।
किराये के मकान की ली तलाशी
एंटी करप्शन टीम ने अजीत के कक्ष और उसके किराये के मकान पर भी छापा मारा। टीम को 1.76 लाख रुपये अलग से बरामद हुए। अजीत इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इतनी नकदी उसके पास कहां से आई, टीम इसकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
किराये के मकान की ली तलाशी
एंटी करप्शन टीम ने अजीत के कक्ष और उसके किराये के मकान पर भी छापा मारा। टीम को 1.76 लाख रुपये अलग से बरामद हुए। अजीत इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इतनी नकदी उसके पास कहां से आई, टीम इसकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
करता है ब्याज का काम
अजीत जनवरी 2023 में बरेली आया था। वह मूल रूप से लखनऊ के गाजीपुर का रहने वाला है। वह एक्सईएन ग्रामीण प्रथम का लिपिक बनने से पहले मीरगंज में तैनात था। उसके कार्यालय के कई कर्मचारियों ने दबी जुबान बताया कि अजीत महंगे कपड़ों का शौक रखता है। उसके चश्मे से लेकर जूते तक, सभी ब्रांडेड होते हैं। चर्चा है कि वह ब्याज बट्टे का भी काम करता था।
ये उठ रहे सवाल
- पीड़ित के मुताबिक वह एक्सईएन और एसडीई के पास कई बार गया तो उसकी फरियाद क्यों नहीं सुनी गई?
- उसके बैग से जो रकम बरामद हुई, क्या ये एक दिन की अवैध कमाई थी, क्या इसमें किसी और का भी हिस्सा था?
मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि अगर पीड़ित एक्सईएन और एसडीई के पास गया था तो उसकी समस्या का समाधान होना चाहिए था। जिन अधिकारियों ने उसकी बात नहीं सुनी है, शिकायत के आधार पर उनकी विभागीय जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अजीत जनवरी 2023 में बरेली आया था। वह मूल रूप से लखनऊ के गाजीपुर का रहने वाला है। वह एक्सईएन ग्रामीण प्रथम का लिपिक बनने से पहले मीरगंज में तैनात था। उसके कार्यालय के कई कर्मचारियों ने दबी जुबान बताया कि अजीत महंगे कपड़ों का शौक रखता है। उसके चश्मे से लेकर जूते तक, सभी ब्रांडेड होते हैं। चर्चा है कि वह ब्याज बट्टे का भी काम करता था।
ये उठ रहे सवाल
- पीड़ित के मुताबिक वह एक्सईएन और एसडीई के पास कई बार गया तो उसकी फरियाद क्यों नहीं सुनी गई?
- उसके बैग से जो रकम बरामद हुई, क्या ये एक दिन की अवैध कमाई थी, क्या इसमें किसी और का भी हिस्सा था?
मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि अगर पीड़ित एक्सईएन और एसडीई के पास गया था तो उसकी समस्या का समाधान होना चाहिए था। जिन अधिकारियों ने उसकी बात नहीं सुनी है, शिकायत के आधार पर उनकी विभागीय जांच कर कार्रवाई की जाएगी।