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मौत के आठ महीने बाद शासन से आई कॉल.. पूछा हालचाल

Fri, 08 Jan 2021 01:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 01:29 AM IST
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Eight months after the death, a call from the government .. asked
कोरोना वैक्सीन - फोटो : pixabay

हजियापुर के कोरोना संक्रमित युवक की 27 अप्रैल को हो गई थी मौत
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परिवार ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग पर लगाया फर्जीवाड़े का आरोप

बरेली। करीब आठ महीने पहले कोरोना से जिले में जान गंवाने वाले पहले युवक के परिवार के जख्म तंत्र की एक चूक से फिर हरे हो गए हैं। हाल ही में शासन की हेल्पलाइन से युवक की पत्नी को फोन करके उनके पति का हालचाल पूछा गया। युवक की मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा चुके परिवार ने इसके बाद फिर कई सवाल खड़े किए हैं। सीएमओ ने इस मामले में जिला सर्विलांस अधिकारी और आईडीएसपी प्रभारी से पूछताछ करने की बात कही है।
हजियापुर में रहने वाले एक युवक की तबीयत खराब होने पर उसे भोजीपुरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना संक्रमित होने की आशंका में अस्पताल से युवक का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही 27 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। कुछ घंटे बाद आई रिपोर्ट में युवक को संक्रमित बताया गया तो हड़कंप मच गया। कोरोना संक्रमण से यह जिले में पहली मौत थी। युवक के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि उसे बेवजह कोरोना संक्रमित बताया गया, फिर रिपोर्ट के इंतजार में अस्पताल स्टाफ ने दो दिन तक इलाज भी नहीं किया। इसी वजह से उसकी हालत बिगड़ी और फिर मौत हो गई।
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परिवार की ओर से आरोप लगाने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ भेजा मगर वहां से भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। हालांकि युवक के परिवार ने केजीएमयू की रिपोर्ट को भी नकार दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर रिपोर्ट को बदलवा देने भोजीपुरा के कोविड अस्पताल पर भी स्वास्थ्य विभाग से मिलीभगत का आरोप लगाया था। मृतक युवक की पत्नी ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मामले की गहन जांच की मांग की थी। हालांकि प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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करीब आठ महीने बाद दो जनवरी को शासन की हेल्पलाइन से मृतक युवक की पत्नी के पास फोन कॉल आई। सीएम हेल्पलाइन से महिला से पूछा गया कि उनके परिवार के एक सदस्य वजीर अहमद कोरोना संक्रमित हैं, क्या उन्हें इसकी जानकारी है। महिला ने जवाब दिया कि वजीर अहमद संक्रमित नहीं थे। साथ ही यह भी पूछा कि क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि आठ महीने पहले ही उनकी मौत हो चुकी है। यह सुनकर हेल्पलाइन से कॉल करने वाले युवक ने कहा कि उससे गलती हो गई है। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी मौत हो चुकी है। महिला ने कहा कि वजीर की कोरोना से मौत नहीं हुई, उनकी हत्या की गई थी। युवक ने उनसे फिर माफी मांगी और फोन काट दिया।

आरोप: अब लीपापोती कर रहा है स्वास्थ्य विभाग

वजीर अहमद की पत्नी का आरोप है कि शासन में शिकायत करने के बाद स्वास्थ्य विभाग लीपापोती करने में जुट गया है। जब वजीर को संक्रमित बताया गया था तब शासन-प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें कोई कॉल नहीं की। अब जब उनकी मौत के नौ महीने बाद शासन से फोन पर यह पूछना कि वजीर अहमद के संक्रमित होने की उन्हें जानकारी है या नहीं, इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। करीब दो महीने पहले ही उन्होंने केंद्र सरकार के पोर्टल पर शिकायत की थी जो जांच के लिए प्रदेश सरकार को भेजी गई होगी। उन्हें आशंका है कि प्रदेश सरकार के प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगने के बाद ही आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग ने रिकॉर्ड अपडेट किया होगा तभी पोर्टल पर दर्ज नंबर देखकर शासन की हेल्पलाइन से उनके पास कॉल आई। उन्होंने इस मामले में सघन जांच की मांग की है।

इस प्रकरण की मुझे जानकारी नहीं है। जिला सर्विलांस अधिकारी और आईडीएसपी प्रभारी से जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा। आठ महीने से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद अगर कोरोना से मृत किसी व्यक्ति के परिवार के पास हेल्पलाइन नंबर से वेरिफिकेशन के लिए कॉल जाती है तो कहीं न कहीं चूक ही हुई होगी। इस पड़ताल कराई जाएगी। - डॉ सुधीर गर्गए सीएमओ

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