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कोरोना संकट का असरः विकास के नए प्रोजेक्टों में अड़ंगा, पुराने ही कराए जाएंगे पूरे

Tue, 19 May 2020 02:09 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 19 May 2020 02:09 AM IST
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Effect of Corona crisis: new projects of development will be hindered, old ones will be completed
बरेली के श्यामगंज में सीवर लाइन का कार्य करते श्रमिक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

एसडब्ल्यूएम, एसटीपी, नया रोडवेज सहित कई बड़े प्रोजेक्ट अटके

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बरेली। कोरोना संकट के चलते बजट की दिक्कत को देखते हुए सरकार ने विकास की नई परियोजनाओं को शुरू करने पर रोक लगा दी है। अब केवल अधूरी परियोजनाओं को ही पूरा करने के निर्देश हैं। ऐसे में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, एसटीपी के साथ ही कई सड़कों और फ्लाईओवर-ओवरब्रिज के काम फिलहाल रोक दिए गए हैं।
लॉकडाउन से पहले प्रशासन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए रजऊ परसरपुर के पास सथरापुर में करीब 10 एकड़ जमीन खरीदने का फैसला कर चुका था। वर्ष 2005 में मंजूरी मिलने के बाद से यह प्रोजेक्ट इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के पास सटी जमीन पर बना था, लेकिन 2014 में एनजीटी के आदेश पर प्लांट बंद हो गया। इसके बाद कई और अड़चर्नें आइं, लेकिन करीब छह महीने से इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा करने में प्रशासन और नगर निगम के अफसर जुटे हुए थे। रजऊ के पास सथरापुर में 43 किसानों से जमीन खरीदने का सौदा भी हो गया था, लेकिन शासन से मंजूरी मिलतने से पहले ही कोरोना संकट ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। इसी तरह नमामि गंगे परियोजना के तहत ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी के भी जल्द शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं है। प्रशासन यहां नदी के किनारे प्लांट लगाने के लिए चौबारी, कतारपुर, हरूनगला और तुलाशेरपुर में जमीन के अधिग्रहण की तैयारी कर रहा था। किसानों से बात भी हो गई थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी कोरोना संकट के चलते ठप हो गया है। उधर, पुराने रोडवेज बस अड्डे को मिनी बाईपास पर सेंट्रल जेल की जमीन पर शिफ्ट कराने की तैयारी थी। शासन से मंजूरी भी मिल गई थी। कमिश्नर ने स्मार्ट सिटी के तहत पुराने रोडवेज पर मल्टीस्टोरी पार्किंग की योजना भी तैयार कर ली थी लेकिन यह प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चला गया है।
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अब सेतु निगम की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने पर ही रहेगा फोकस

शासन के निर्देश के बाद अब अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना है। इसमें सेतु निगम की भी तमाम परियोजनाएं शामिल है। आईवीआरआई ओवरब्रिज का काम करीब डेढ़ साल से लटका है। रेलवे ने नवंबर-दिसंबर में तेजी दिखाई थी और गार्डर रखने सहित कई काम कराए थे, लेकिन बाद में ये काम ठप हो गया। लालफाटक पर कैंट एरिया में सेना की जमीन के अधिग्रहण को लेकर प्रशासन और सेतु निगम ने तीन महीने पहले जो तेजी दिखाई थी, वह भी अब ठहर गई है। इससे ओवरब्रिज और सर्विस रोड का काम बंद है। हालांकि चौपुला पर सेतु निगम ने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में लेबर लगाकर कुछ काम शुरू कराया है। सेटेेलाइट ओवरब्रिज पर पुल की छत बनानी शुरू कर दी है। रामगंगा चौबारी में भी पुल का अधूरा काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
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सीतापुर फोरलेन का अधूरा काम भी होगा पूरा

दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बरेली से सीतापुर के बीच फोरलेन का करीब चार साल से ठप काम पूरा हो सकेगा। एनएचएआई ने करीब सात सौ करोड़ के दोबारा टेंडर कराए हैं। अभी लेबर न मिलने से काम नहीं शुरू हो पा रहा है।

होटल में सेमिनार और स्टेशनरी खर्च पर भी रहेगा अंकुश

आर्थिक संकट के बीच शासन ने अवकाश यात्रा, सुविधा, स्टेशनरी खरीद, छपाई, वर्दी सहित कई मदों में 25 प्रतिशत तक की कमी के निर्देश दिए हैं। नए पद भी सृजित नहीं होंगे। नए सरकारी वाहनों की खरीद पर रोक के साथ ही अफसरों की एग्जीक्यूटिव और बिजनेस क्लास यात्रा पर भी प्रतिबंध रहेगा। होटलों में सेमिनार या दूसरे सरकारी आयोजन भी नहीं होंगे।

अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए शासन से गाइडलाइन मिलती रहती हैं। उनका अनुपालन होगा। खर्चीले सेमिनार और दूसरे सरकारी कार्यक्रमों पर अंकुश रहेगा। - नितीश कुमार, डीएम

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