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विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार नहीं रोक पा रहे कुलपति: प्रो. दुबे
बरेली
Updated Tue, 17 Mar 2015 01:52 AM IST
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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति भ्रष्टाचार नहीं रोक पा रहे हैं। इसकी वजह कुलपति की नियुक्ति में राजनीतिक दखल है। शिक्षा का स्तर भी इसीलिए बहुत अच्छा नहीं है। सौ की वर्ल्ड रैंकिंग में देश का कोई विश्वविद्यालय नहीं है। आईआईटी की हालत भी अच्छी नहीं है। प्रो. दुबे ने यह बात कई विश्वविद्यालयों में सामने आने वाले भ्रष्टाचार के मामलों के सवाल पर कही। वह मुक्त विश्वविद्यालय के बरेली रीजन के स्टडी सेंटरों के कोआर्डिनेटरों की कार्यशाला के सिलसिले में यहां आए हुए थे। इस दौरान सोमवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में बेहतर कुलपति की नियुक्ति के लिए कोई मैकेनिज्म अपनाना पड़ेगा।
लखनऊ में रविवार को हुए कुलपति सम्मेलन में छात्रसंघ को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को प्रो. दुबे ने गलत बताया। कहा कि छात्रसंघ को प्रतिबंधित करना अलोकतांत्रिक है। अगर ऐसा किया गया तो अच्छे लीडर्स तैयार नहीं हो पाएंगे, क्योंकि कैंपस लीडर्स की नर्सरी का काम भी करते हैं। सम्मेलन में कुलपति का कार्यकाल सात साल करने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि कोई काम करना चाहे तो तीन साल बहुत होते हैं। उन्होंने बताया कि अपने विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम होने की वजह से वह कुलपति सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। प्रो. दुबे ने कहा कि आज पढ़ाई के लिए नहीं नौकरियों के लिए डिग्री हासिल करने की होड़ है, इससे रोककर ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। यह तब होगा जब शिक्षा में हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं की डिग्री की पुरानी व्यवस्था खत्म कर दी जाए। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में डिग्री के स्तर पर प्रत्येक विद्यार्थी को निर्धारित समय सीमा तक सिर्फ पढ़ाया जाए और उस अवधि में वन टाइम परीक्षा के बजाय प्रत्येक माह उसकी परीक्षा होनी चाहिए।
इंसेट...
राजर्षि टंडन में 21 नए कोर्सों को मंजूरी
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लखनऊ में रविवार को हुए कुलपति सम्मेलन में छात्रसंघ को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को प्रो. दुबे ने गलत बताया। कहा कि छात्रसंघ को प्रतिबंधित करना अलोकतांत्रिक है। अगर ऐसा किया गया तो अच्छे लीडर्स तैयार नहीं हो पाएंगे, क्योंकि कैंपस लीडर्स की नर्सरी का काम भी करते हैं। सम्मेलन में कुलपति का कार्यकाल सात साल करने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि कोई काम करना चाहे तो तीन साल बहुत होते हैं। उन्होंने बताया कि अपने विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम होने की वजह से वह कुलपति सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। प्रो. दुबे ने कहा कि आज पढ़ाई के लिए नहीं नौकरियों के लिए डिग्री हासिल करने की होड़ है, इससे रोककर ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। यह तब होगा जब शिक्षा में हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं की डिग्री की पुरानी व्यवस्था खत्म कर दी जाए। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में डिग्री के स्तर पर प्रत्येक विद्यार्थी को निर्धारित समय सीमा तक सिर्फ पढ़ाया जाए और उस अवधि में वन टाइम परीक्षा के बजाय प्रत्येक माह उसकी परीक्षा होनी चाहिए।
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राजर्षि टंडन में 21 नए कोर्सों को मंजूरी
कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय को 21 नए कोर्सों को संचालित करने की अनुमति मिल गई है। इसके साथ ही आर्डिनेंस को मंजूरी मिलने से पीएचडी भी नए शैक्षिक सत्र से शुरू करा दी जाएगी। विश्वविद्यालय मोबाइल पर प्रवेश और परीक्षा की अलर्ट सेवा भी शुरू करेगा। मार्कशीट का ऑनलाइन वर्जन भी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री भेजने के लिए डाक विभाग से एमओयू हो चुका है। विश्वविद्यालय कौशल विकास केंद्र भी संचालित करेगा। प्रेसवार्ता में बरेली रीजन की कोआर्डिनेटर डॉ. मिथलेश मिश्रा और बरेली कॉलेज कोआर्डिनेटर डॉ. आरबी सिंह भी मौजूद रहे।
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