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यूपी बोर्ड परीक्षा-2020- 400 कॉलेजों का डाटा भेजा, कई की सूचनाएं अधूरी निकलीं
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बरेली। यूपी बोर्ड परीक्षा-2020 के लिए केंद्रों के निर्धारण को 400 कॉलेजों की सूची अपलोड की गई थी, लेकिन इसमें कई कॉलेजों ने अधूरी और गलत जानकारी भेज दी। कुछ कॉलेजों ने अग्निशमन यंत्रों की सूचना ही अपलोड नहीं की, जबकि कई कॉलेजों ने मनचाहे कॉलेजों में सेंटर बनें इसलिए आसपास के कॉलेजों के कोड ही गलत भर दिए। बोर्ड ने इस गलती को पकड़ा और सही कराने के निर्देश भी दिए। अब सभी कॉलेजों का डाटा अपलोड करके ओके कर दिया गया है। एक सप्ताह के भीतर शासन से प्रस्तावित परीक्षा केंद्रों की सूची जारी हो सकती है।
बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण इस बार शासन स्तर से ऑनलाइन ही होना है। इसके लिए कॉलेजों से आधारभूत सुविधाओं का ब्योरा ऑनलाइन अपलोड कराया गया। इसमें सीसीटीवी कैमरे, राउटर, हाईस्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्शन, कक्षाओं की स्थिति, जियो लोकेशन, अग्निशमन यंत्र, आसपास के कॉलेजों के कोड सहित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। चूंकि परीक्षा केंद्र पांच से दस किलोमीटर के दायरे में ही बनने हैं, लिहाजा आसपास के कॉलजों के कोड भी मांगे गए। कॉलेजों ने इसमें खेल कर दिया। जानबूझकर गलत कोड भरे ताकि उनकी सेटिंग वाले कॉलेजों में ही सेंटर बन सकें। जियो लोकेशन से मामला ट्रैस हुआ तो शासन ने डीआईओएस को पत्र जारी कर डाटा सही कराने को कहा। इसके अलावा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, राउटर की भी जानकारी गलत दी गई। टास्क फोर्स गठित करके आधारभूत सुविधाओं का सत्यापन कराया गया। कई कॉलेजों की छतों से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन उसकी भी जानकारी नहीं दी गई। अब 400 कॉलेजों की सूची शासन को फारवर्ड की गई है। इसी में से केंद्र निर्धारित किए जाएंगे। डीआईओएस मन भरन राम राजभर ने बताया कि सभी कॉलेजों का डाटा अपलोड हो गया है। अगर किसी कॉलेज ने गलत जानकारी दी है तो प्रस्तावित सूची जारी होने के बाद सत्यापन में पकड़ में आ जाएंगे। मानक पूरे होने पर ही केंद्र बनाए जाएंगे।
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बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण इस बार शासन स्तर से ऑनलाइन ही होना है। इसके लिए कॉलेजों से आधारभूत सुविधाओं का ब्योरा ऑनलाइन अपलोड कराया गया। इसमें सीसीटीवी कैमरे, राउटर, हाईस्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्शन, कक्षाओं की स्थिति, जियो लोकेशन, अग्निशमन यंत्र, आसपास के कॉलेजों के कोड सहित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। चूंकि परीक्षा केंद्र पांच से दस किलोमीटर के दायरे में ही बनने हैं, लिहाजा आसपास के कॉलजों के कोड भी मांगे गए। कॉलेजों ने इसमें खेल कर दिया। जानबूझकर गलत कोड भरे ताकि उनकी सेटिंग वाले कॉलेजों में ही सेंटर बन सकें। जियो लोकेशन से मामला ट्रैस हुआ तो शासन ने डीआईओएस को पत्र जारी कर डाटा सही कराने को कहा। इसके अलावा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, राउटर की भी जानकारी गलत दी गई। टास्क फोर्स गठित करके आधारभूत सुविधाओं का सत्यापन कराया गया। कई कॉलेजों की छतों से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन उसकी भी जानकारी नहीं दी गई। अब 400 कॉलेजों की सूची शासन को फारवर्ड की गई है। इसी में से केंद्र निर्धारित किए जाएंगे। डीआईओएस मन भरन राम राजभर ने बताया कि सभी कॉलेजों का डाटा अपलोड हो गया है। अगर किसी कॉलेज ने गलत जानकारी दी है तो प्रस्तावित सूची जारी होने के बाद सत्यापन में पकड़ में आ जाएंगे। मानक पूरे होने पर ही केंद्र बनाए जाएंगे।
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