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बरेली कॉलेज- कमेटी और प्राचार्य अवैध तो शिक्षकों का अनुमोदन कैसे वैध
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बरेली। बरेली कॉलेज में जिस मैनेजमेंट कमेटी और उसके निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं, उसकी मौजूदगी में विश्वविद्यालय में हुई बैठक में शिक्षकों का अनुमोदन कर दिया गया। विश्वविद्यालय के इस निर्णय पर अब सवाल उठ रहे हैं। वहीं, प्राचार्य विवाद में चार्ज छोड़ने से पहले ही डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह अपनी रिपोर्ट कमिश्नर रणवीर प्रसाद को सौंप गए। अब इस रिपोर्ट पर कमिश्नर निर्णय लेंगे।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय में हुई बैठक में बरेली कॉलेज के बीबीए और भूगोल विभाग में दो शिक्षकों का अनुमोदन हुआ। इस अनुमोदन समिति में बरेली कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के सचिव देवमूर्ति और प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन भी थे। सवाल उठ रहा है कि जब जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जैतली बरेली कॉलेज के मैनेजमेंट को अवैध करार दे चुके हैं तो विश्वविद्यालय में उनकी मौजूदगी में निर्णय कैसे हुआ। मगर कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल इसे छात्रहित से जुड़ा मामला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
इधर, डॉ. पूर्णिमा अनिल की शिकायत के बाद हुई जांच की रिपोर्ट भी डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को चार्ज छोड़ने से पहले कमिश्नर को सौंप दी है। बोर्ड ऑफ कंट्रोल का अध्यक्ष होने के नाते अब कमिश्नर इस पर निर्णय लेंगे। बताया जाता है कि डीएम ने पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन पर कार्रवाई की बात कही है। उनकी पेंशन रोकी जा सकती है।
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कॉलेज मैनेजमेंट पर निर्णय बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष होने के नाते कमिश्नर को लेना है। उनके अनुसार ही आगे कार्य होगा। छात्र हित को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों का अनुमोदन किया गया है। - प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
मेरी रिपोर्ट के मुताबिक बरेली कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी भंग है और उस पर कोई स्टे भी नहीं है। ऐसे में भंग की गई कमेटी और उसके द्वारा नियुक्त प्राचार्य की मौजूदगी में कोई निर्णय मान्य नहीं हो सकता। - प्रोफेसर एके जैतली, डीएसडब्ल्यू, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
नए प्राचार्य की नियुक्ति अवैध, चार्ज देने वाले प्राचार्य का रोका जाए वेतन-पेंशन
निवर्तमान डीएम ने बरेली कॉलेज प्रकरण में कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की भूमिका को सर्वाधिक संदिग्ध बताया है और उनका वेतन एवं पेंशन रोकने की कमिश्नर से सिफारिश की है। साथ ही डॉ. अनुराग मोहन की प्राचार्य पद पर तैनाती को भी अवैध करार दिया है।
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शुक्रवार को विश्वविद्यालय में हुई बैठक में बरेली कॉलेज के बीबीए और भूगोल विभाग में दो शिक्षकों का अनुमोदन हुआ। इस अनुमोदन समिति में बरेली कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के सचिव देवमूर्ति और प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन भी थे। सवाल उठ रहा है कि जब जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जैतली बरेली कॉलेज के मैनेजमेंट को अवैध करार दे चुके हैं तो विश्वविद्यालय में उनकी मौजूदगी में निर्णय कैसे हुआ। मगर कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल इसे छात्रहित से जुड़ा मामला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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इधर, डॉ. पूर्णिमा अनिल की शिकायत के बाद हुई जांच की रिपोर्ट भी डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को चार्ज छोड़ने से पहले कमिश्नर को सौंप दी है। बोर्ड ऑफ कंट्रोल का अध्यक्ष होने के नाते अब कमिश्नर इस पर निर्णय लेंगे। बताया जाता है कि डीएम ने पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन पर कार्रवाई की बात कही है। उनकी पेंशन रोकी जा सकती है।
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कॉलेज मैनेजमेंट पर निर्णय बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष होने के नाते कमिश्नर को लेना है। उनके अनुसार ही आगे कार्य होगा। छात्र हित को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों का अनुमोदन किया गया है। - प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
मेरी रिपोर्ट के मुताबिक बरेली कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी भंग है और उस पर कोई स्टे भी नहीं है। ऐसे में भंग की गई कमेटी और उसके द्वारा नियुक्त प्राचार्य की मौजूदगी में कोई निर्णय मान्य नहीं हो सकता। - प्रोफेसर एके जैतली, डीएसडब्ल्यू, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
नए प्राचार्य की नियुक्ति अवैध, चार्ज देने वाले प्राचार्य का रोका जाए वेतन-पेंशन
निवर्तमान डीएम ने बरेली कॉलेज प्रकरण में कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की भूमिका को सर्वाधिक संदिग्ध बताया है और उनका वेतन एवं पेंशन रोकने की कमिश्नर से सिफारिश की है। साथ ही डॉ. अनुराग मोहन की प्राचार्य पद पर तैनाती को भी अवैध करार दिया है।