संवाद: डमी शिक्षा से चौपट हो रहा विद्यार्थियों का भविष्य, दबाव में उठा रहे गलत कदम
अमर उजाला कार्यालय परिसर में शुक्रवार को संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में चुनौतियां, मनमानी फीस वृद्धि, हर साल किताबों और यूनिफॉर्म में बदलाव से अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ जैसे मुद्दों पर स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों ने खुलकर विचार रखे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
डमी शिक्षा से विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो रहा है। दबाव में आकर वे गलत कदम उठा रहे हैं। यदि आपका बच्चा भी आईआईटी, नीट या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्कूल नहीं जा रहा है तो सावधान हो जाएं। डमी शिक्षा आपके बच्चे के भविष्य को खतरे में डाल सकती है। सीबीएसई ने ऐसे स्कूलों और विद्याथियों पर सख्ती शुरू कर दी है। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि ऐसे बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया जाएगा। बरेली में अमर उजाला कार्यालय परिसर में शुक्रवार को आयोजित संवाद में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी।
शिक्षा के क्षेत्र में चुनौतियां, मनमानी फीस वृद्धि, हर साल किताबों और यूनिफॉर्म में बदलाव से अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ जैसे मुद्दों पर स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों ने खुलकर विचार रखे। स्कूल संचालकों ने चेताया कि कोटा जैसे शहरों में जाकर गलत कदम उठाने वाले बच्चों में अधिकतर डमी शिक्षा हासिल करने वाले शामिल होते हैं। पहले सीबीएसई की ओर से स्कूल की परख की जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सीबीएसई के नए नियम के तहत अब स्कूलों के साथ ही विद्यार्थियों को भी इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा।
सीबीएसई के सिटी समन्वयक वीके मिश्रा ने बताया कि डमी शिक्षा की पुष्टि होने पर स्कूलों का पंजीकरण और विद्यार्थियों का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी।
फीस से हो परेशानी तो करें शिकायत
इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के सचिव अंकित बग्गा का कहना है कि स्कूल प्रबंधन शासन की शुल्क नियमावली के अनुसार ही फीस वृद्धि करते हैं। अगर किसी स्कूल की फीस नियमों से ज्यादा हो तो अभिभावक सबसे पहले स्कूल के प्रधानाचार्य से इसकी शिकायत करें। निस्तारण नहीं होने पर वह डीएम की अध्यक्षता में बनाई गई जिला शुल्क निर्धारण समिति से इसकी शिकायत कर सकते हैं।
अभिभावकों को समझना होगा स्कूल की पढ़ाई का महत्व
विद्या वर्ल्ड स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. यूहान कोन्वर ने कहा कि अभिभावकों को स्कूल की पढ़ाई का महत्व समझना होगा। डमी शिक्षा का विकल्प सही नहीं। जरूरी नहीं है कि बच्चा कोटा या दिल्ली में जाकर तैयारी करे, तभी सफल होगा। कोचिंग सेंटर संचालक बच्चों को कक्षा आठ से ही अपने यहां प्रवेश दिलाना चाहते हैं। अच्छे-बुरे का फैसला अभिभावकों को करना होगा।
सोबतीस पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य गुरदीप सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से कोटा जाने वाले बच्चों की संख्या कम हो गई है। छोटे शहरों के बच्चे भी स्कूल टाइम के बाद ऑनलाइन वीडियो के सहारे तैयारी कर सकते हैं। इसके लिए गलत तरीका अपनाना सही नहीं।
पद्मावती स्कूल के प्रबंधक पारुष अरोड़ा ने बताया कि अभिभावकों को बच्चों के भविष्य के लिए शॉर्टकट लेना बंद करना होगा। डमी शिक्षा से बच्चे का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है। अगर स्कूलिंग के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी है तो छात्र एनआईओएस बोर्ड का सहारा ले सकते हैं।
जिंगल बेल्स स्कूल के प्रबंधक अंकित बग्गा ने कहा कि कोई भी स्कूल ऐसा नहीं चाहता कि उसका शिक्षक कोचिंग पढ़ाए। अभिभावकों को समझाना चाहिए कि सभी चीजें बच्चे के हिसाब से नहीं हो सकतीं। अभिभावकों को डमी शिक्षा के नुकसान समझने होंगे। इसके बाद ऐसा कराने वाले स्कूल खुद ही बंद हो जाएंगे।
बीएल इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक राजेश गुप्ता ने बताया कि कोई भी स्कूल यह नहीं चाहता कि बच्चा उनके यहां डमी शिक्षा के लिए आए। स्कूल भी जानते हैं कि अगर गलत तरह से प्रवेश दिया तो आगे चलकर दिक्कत होगी। अभिभावक 10वीं के बाद ही यह सोचने लगते हैं कि बच्चे का प्रवेश डमी शिक्षा के लिए कहां कराना है?
अभिभावक संघ के अपुल श्रीवास्तव ने कहा कि स्कूलों को देखना चाहिए कि पढ़ाई को और बेहतर कैसे किया जा सकता है। इस बात को भी देखना चाहिए कि स्कूल की ओर से दी जा रही शिक्षा इतनी अच्छी हो कि बच्चे को बाहर कोचिंग करने की जरूरत ही न पड़े।
अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर किशोर सक्सेना ने बताया कि पहले निजी स्कूल के शिक्षक ही कोचिंग पढ़ाते थे। नहीं पढ़ने पर दबाव बनाने थे। क्या इसकी जानकारी स्कूलों को नहीं होती थी। डमी शिक्षा को बंद करने के साथ ही स्कूलों को यह भी देखना चाहिए कि जिस तरह उनके शिक्षक कोचिंग में पढ़ा रहे हैं, उसी तरह कक्षा में भी पढ़ाएं।
बेहतर पाठ्यक्रमों के लिए बदली जाती हैं किताबें
इंडिपेंडंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्भय बेनीवाल ने बताया कि नई शिक्षा नीति आने के बाद पाठ्यक्रमों में लगातार बदलाव हो रहे हैं। कई बार शिक्षकों को लगता है कि पूर्व में चल रही दूसरे प्रकाशन की किताब से नई बेहतर है, इसलिए किताबों में बदलाव किया जाता है। इसमें प्रबंधन की कोई भूमिका नहीं होती।