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Bareilly News: बजट के अभाव में आठ वर्ष से अधूरे आईटीआई भवनों का निर्माण पूरा होने की जगी आस

Mon, 20 Nov 2023 01:56 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Mon, 20 Nov 2023 01:56 AM IST
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Due to lack of budget, there is hope of completing the construction of ITI buildings which was incomplete for eight years.
बरेली। आठ वर्ष से अधूरे बहेड़ी, मीरगंज और रिछा के आईटीआई भवनों का निर्माण कार्य पूरा होने की आस अब जगी है। केंद्रीय योजना के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से अपेक्षित वित्तीय मदद न मिलने से इनका काम रुका था। अब मुख्य सचिव के हस्तक्षेप के बाद प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय इसके लिए बजट देने को तैयार हो गया है। जल निगम की निर्माण शाखा सोमवार को पुनरीक्षित एस्टीमेट लखनऊ स्थित निदेशालय को भेजेगी।
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सत्र 2011-12 में इन तीनों आईटीआई का निर्माण जल निगम की निर्माण शाखा ने शुरू किया था। प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पूर्व में - मल्टीसेक्टोरल डिस्ट्रिक्ट डेवलेपमेंट प्लान) के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से इनका निर्माण कराया जा रहा था। दो वर्ष में कार्य पूरा होना था, लेकिन बजट में कटौती से वर्ष 2015 में काम ठप हो गया। जल निगम के अभियंता बजट के लिए पत्र लिखते रहे और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी वित्तीय मदद देने से इनकार करते रहे। अब शासन स्तर पर मुख्य सचिव ने समीक्षा के बाद आईटीआई संचालित करने के लिए प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय को बजट देने के निर्देश दिए हैं।
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राजकीय आईटीआई सीबीगंज के प्रधानाचार्य रामप्रकाश ने बताया कि जल निगम से एस्टीमेट मांगे गए हैं। जल निगम की निर्माण शाखा के अभियंता हिमांशु सक्सेना का कहना है कि सोमवार को वह एस्टीमेट भेजेंगे। बहेड़ी के लिए 3.5 करोड़, रिछा के लिए तीन करोड़ व मीरगंज के लिए दो करोड़ की जरूरत है। कुल 8.5 रुपये मिलने पर छह महीने के भीतर भवनों का निर्माण पूरा होगा। कार्यशाला बनेगी। बाउंड्री बनेगी और आईटीआई तक आने-जाने के लिए मार्ग का निर्माण कराया जाएगा।
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यह है हाल
1-मीरगंज: वर्ष 2011-12 में दो करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से राजकीय आईटीआई बनाने की मंजूरी दी गई थी। केंद्र सरकार से बजट दिया गया लेकिन प्रशिक्षण के उपकरण खरीदने के लिए 60 लाख रुपये की कटौती प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय से होने के कारण काम रुक गया था।
2- बहेड़ी: 3.65 करोड़ की लागत से 2011-12 में राजकीय आईटीआई प्रस्तावित किया गया। एक करोड़ रुपये की कटौती से काम अधूरा है। पुनरीक्षित एस्टीमेट छह करोड़ 11 लाख 32 हजार रुपये का भेजा गया। जिलाधिकारी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पत्र लिखे व शासन को अवगत कराया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

3- रिछा: राजकीय आईटीआई के लिए 2.29 करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन कार्यशाला नहीं बनाई गई। मुख्य भवन का प्रथम तल बन गया। अगर प्रशिक्षक तैनात कर दिए जाते तो पढ़ाई शुरू हो सकती थी लेकिन अफसरों ने न तो संचालन कराया और न कार्यशाला का निर्माण। नतीजा एक दिन भी पढ़ाई नहीं हो सकी।
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