{"_id":"5f344ff78ebc3e61e46e5562","slug":"due-to-caution-relief-can-be-provided-in-september-experts-expect-that-after-infection-cases-remain-stable-for-four-days-bareilly-news-bly415899766","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावधानी बरती तो सितंबर में मिल सकती है राहत, चार दिनों से संक्रमण के मामले स्थिर रहने के बाद विशेेषज्ञों ने जताई उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावधानी बरती तो सितंबर में मिल सकती है राहत, चार दिनों से संक्रमण के मामले स्थिर रहने के बाद विशेेषज्ञों ने जताई उम्मीद
विज्ञापन
demo photo
- फोटो : demo photo
हफ्ते भर यही स्थिति रही तो अगस्त के बाद थम सकती है कोरोना की रफ्तार
विज्ञापन
बरेेली। फिलहाल जिले में तेजी से फैल रहे कोरोना से सितंबर में राहत मिल सकती है बशर्ते इस बीच लोग सावधानी बरतें। पिछले चार दिनों से कोरोना संक्रमण के मामलों में स्थिरता आने के बाद विशेषज्ञों ने यह उम्मीद जताई है। कोरोना संक्रमण की शुरुआत से वायरस पर नजर रखने वाले शहर के प्रमुख चिकित्सकों के मुताबिक हफ्ते भर तक और यही स्थिति रही तो अगस्त के आखिर तक संक्रमण का फैलाव सिमटने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस का फैलाव होने पर वह तब तक काबू नहीं होता जब तक उसकी वैक्सीन या कोई दवा ईजाद न हो जाए। अगर वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है तो हर्ड इम्युनिटी बनने के बाद ही संक्रमण का फैलाव कम होने के आसार रहते हैं मगर यह स्थिति काफी भयावह हो सकती है। क्योंकि हर्ड इम्युनिटी तकरीबन 50 से 60 फीसदी लोगों के संक्रमित होने के बाद ही बनने की उम्मीद रहती है। यानी लाखों की तादाद में लोगों का संक्रमित होना तय होता है। हालांकि, हर्ड इम्युनिटी माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर कैटगरी में होती है। ऐसे में अगर कोई शुगर, ब्लडप्रेशर, हाइपर टेंशन या हार्ट समेत अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो संक्रमण सीवियर स्टेज में होने से जानलेवा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जिले में बीते चार दिनों से 175 से दो सौ के बीच में संक्रमित मिल रहे हैं। हफ्ते भर यही स्थिति अगर रही तो ये कोरोना का उच्चतम स्तर माना जाएगा और अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत में संक्रमित कम होने के आसार हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस का फैलाव होने पर वह तब तक काबू नहीं होता जब तक उसकी वैक्सीन या कोई दवा ईजाद न हो जाए। अगर वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है तो हर्ड इम्युनिटी बनने के बाद ही संक्रमण का फैलाव कम होने के आसार रहते हैं मगर यह स्थिति काफी भयावह हो सकती है। क्योंकि हर्ड इम्युनिटी तकरीबन 50 से 60 फीसदी लोगों के संक्रमित होने के बाद ही बनने की उम्मीद रहती है। यानी लाखों की तादाद में लोगों का संक्रमित होना तय होता है। हालांकि, हर्ड इम्युनिटी माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर कैटगरी में होती है। ऐसे में अगर कोई शुगर, ब्लडप्रेशर, हाइपर टेंशन या हार्ट समेत अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो संक्रमण सीवियर स्टेज में होने से जानलेवा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जिले में बीते चार दिनों से 175 से दो सौ के बीच में संक्रमित मिल रहे हैं। हफ्ते भर यही स्थिति अगर रही तो ये कोरोना का उच्चतम स्तर माना जाएगा और अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत में संक्रमित कम होने के आसार हैं।
विज्ञापन
कोरोना के चरम स्तर का निर्धारण करना आसान नहीं
माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल कुमार गोयल के मुताबिक, वायरस के फैलाव के दौरान यह तय करना बेहद मुश्किल होता है कि आखिर कब संक्रमण का फैलाव अपनी चरम स्थित यानी पीक पर है। अनुमान के तौर पर माना जाता है कि एक निर्धारित सैंपलिंग में करीब दस दिन या दो हफ्ते तक एक निर्धारित क्रम में संक्रमित मिलने लगें तो इसे चरम कहा जाता है। उन्होंने बताया कि बरेली में बीते चार दिन से पौने दो सौ से दो सौ के बीच में ही संक्रमित मिल रहे हैं। कम से कम अगर अगले सात दिन और अधिकतम दस दिन तक भी यही स्थिति रहती है तो इसे चरम स्थिति माना जा सकता है।
विज्ञापन