यूपी: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से बढ़ी डिजिटल गोल्ड की चमक, निवेशक मुनाफे का सौदा समझ कर रहे निवेश
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से डिजिटल सोने की मांग बढ़ी। निवेशक डिजिटल गोल्ड को मुनाफे का सौदा मान रहे हैं। हालांकि वित्त विशेषज्ञ अखिल कुमार ने इसमें सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह सेबी के दायरे में नहीं आता और इसमें जीएसटी जैसे शुल्क लगते हैं।
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सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से डिजिटल सोने की चमक बढ़ गई है। बरेली में लोग सोने-चांदी के आभूषणों की भी एडवांस बुकिंग कराने में जुट गए हैं। त्योहारों और सहालग के सीजन के दौरान आई गिरावट से निवेशक और सराफा कारोबारी इस साल चांदी होने की उम्मीद कर रहे हैं।
पिछले पांच दिनों में ही चांदी के भाव में 16 हजार रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे त्योहारी माहौल और शादी के सीजन में पारंपरिक आभूषणों और अन्य सामानों की मांग और बढ़ गई है। वहीं, निवेशक डिजिटल गोल्ड (सोने) को मुनाफे का सौदा समझकर निवेश कर रहे हैं।
डिजिटल गोल्ड में निवेश बेहद आसान
ऑनलाइन सोना खरीदने वाले राजेंद्र नगर निवासी मयंक अग्रवाल ने बताया कि डिजिटल गोल्ड में निवेश करना बेहद आसान और सुविधाजनक है। इसको खरीदने पर सेवा प्रदाता आपके हिस्से का भौतिक सोना पूरी तरह सुरक्षित और बीमाकृत तिजोरी में आपके नाम पर जमा कर देता है।
इसको कोई भी व्यक्ति कम रुपयों में प्रति ग्राम के छोटे से हिस्से को खरीदकर निवेश यात्रा शुरू कर सकता है। यह 24 कैरेट में उपलब्ध होता है और तरलता अधिक है। निवेशक स्मार्टफोन से कभी भी डिजिटल सोने को खरीद-बेच सकता है। मौजूदा बाजार दर पर बेचकर नकदी प्राप्त की जा सकती है।
वित्त विशेषज्ञ अखिल कुमार ने बताया कि पारंपरिक आभूषण आदि खरीदने पर ग्राहकों को मेकिंग चार्ज समेत अन्य अतिरिक्त शुल्क चुकाने पड़ते हैं, जिससे निवेश की लागत बढ़ जाती है। वहीं, डिजिटल गोल्ड में इससे सहूलियत मिलती है लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है। दामों में आई गिरावट के कारण सोने-चांदी में निवेश बढ़ गया है।
सावधानी से करें डिजिटल सोने में निवेश
- यह सेबी जैसी सरकारी संस्थाओं के दायरे में सीधे नहीं आता, जिससे कानूनी सुरक्षा कम मिलती है।
- इसमें तीन फीसदी जीएसटी और खरीदने-बेचने के दाम में अंतर की वजह से शुरुआत में नुकसान हो सकता है।
- डिजिटल सोने को घर मंगाने पर मेकिंग चार्ज और शिपिंग फीस बहुत ज्यादा चुकानी पड़ती है।
- कई प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल गोल्ड को पांच साल से ज्यादा रखने की अनुमति नहीं होती है।
- यदि आपका ऐप या प्लेटफॉर्म बंद हो जाए तो सोने को निकालने में परेशानी आ सकती है।