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Bareilly News: आक्रामक व्यवहार को सामान्य न समझें...सिजोफ्रेनिया बीमारी का कराएं इलाज
Sat, 10 Aug 2024 05:16 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 10 Aug 2024 05:16 AM IST
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डॉ.रोहताश। स्रोत: स्वयं
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शाहजहांपुर। बच्चे या बड़े के व्यवहार में आक्रामकता बढ़े तो उसे सामान्य तौर पर न लें। व्यवहार में यह परिवर्तन सिजाेफ्रेनिया बीमारी के कारण हो सकता है। बीमारी से ग्रसित व्यक्ति इतना आक्रामक भी हो सकता है कि किसी की जान ले ले। मानसिक रोग विशेषज्ञ का मानना है कि आमतौर पर लोग इसे बीमारी नहीं मानते हैं। बाद में जब हिंसक घटना होती है तो पता चलता है कि बीमारी के कारण व्यक्ति ने ऐसा किया है।
रोजा के हथौड़ा बुजुर्ग में सत्यपाल की ईंट से कूंचकर वीभत्स हत्या को भी मनोरोग विशेषज्ञ मानसिक बीमारी से जोड़कर देख रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोविश्लेषक डॉ. रोहताश ईसा बताते हैं कि महिला सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित हो सकती है। बीमारी में रोगी भ्रम या वहम हो जाता है। उसकी सोचने-समझने या परिणाम के बारे में चिंता करने की ताकत खत्म हो जाती है। उत्पीड़न, ईर्ष्या के साथ चिंता, गुस्सा, अलगाव आदि इसके कारण हो सकते हैं।
भ्रम के शिकार व्यक्ति हिंसक या आत्मघाती हो सकते हैं। हालांकि, समय के साथ उनके स्थिर होने की संभावना रहती है। ऐसे मरीजों में नकारात्मक लक्षण हो सकते हैं। वह कम बोलने के साथ अजीब बातें करने लगता है। डॉ. रोहताश ने बताया कि सिजोफ्रेनिया रोग से ग्रसित मरीज का उपचार संभव है।
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मरीज को दवा देने के साथ काउंसलिंग कर स्वस्थ किया जा सकता है। उसका नियमित दवा खाना आवश्यक है। आसपास का माहौल प्रेमपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को मानसिक बीमारी को भी शारीरिक बीमारी की तरह गंभीरता से लेना चाहिए। वरना इसके बुरे परिणाम सामने आ सकते हैं।
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रोजा के हथौड़ा बुजुर्ग में सत्यपाल की ईंट से कूंचकर वीभत्स हत्या को भी मनोरोग विशेषज्ञ मानसिक बीमारी से जोड़कर देख रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोविश्लेषक डॉ. रोहताश ईसा बताते हैं कि महिला सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित हो सकती है। बीमारी में रोगी भ्रम या वहम हो जाता है। उसकी सोचने-समझने या परिणाम के बारे में चिंता करने की ताकत खत्म हो जाती है। उत्पीड़न, ईर्ष्या के साथ चिंता, गुस्सा, अलगाव आदि इसके कारण हो सकते हैं।
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भ्रम के शिकार व्यक्ति हिंसक या आत्मघाती हो सकते हैं। हालांकि, समय के साथ उनके स्थिर होने की संभावना रहती है। ऐसे मरीजों में नकारात्मक लक्षण हो सकते हैं। वह कम बोलने के साथ अजीब बातें करने लगता है। डॉ. रोहताश ने बताया कि सिजोफ्रेनिया रोग से ग्रसित मरीज का उपचार संभव है।
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मरीज को दवा देने के साथ काउंसलिंग कर स्वस्थ किया जा सकता है। उसका नियमित दवा खाना आवश्यक है। आसपास का माहौल प्रेमपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को मानसिक बीमारी को भी शारीरिक बीमारी की तरह गंभीरता से लेना चाहिए। वरना इसके बुरे परिणाम सामने आ सकते हैं।