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अमावस्या पर करें भूले-बिसरों का श्राद्ध और विसर्जन
बरेली
Updated Tue, 19 Sep 2017 01:49 AM IST
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पितृ पक्ष समाप्ति की ओर है। 19 सितंबर को अमावस्या है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध भी किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु की तिथि पता न हो। जिनकी मृत्यु अल्पायु में या फिर शास्त्राघात से हुई हो, उनका श्राद्ध भी किया जा सकता है। अमावस्या 19 सितंबर को दोपहर 11:52 बजे से लग रही है। श्राद्ध कार्य इस समय के बाद ही किया जा सकता है। वहीं, स्नान-दान-पितृ विसर्जन का महत्व बुधवार को होगा। इस बार पूरी अमावस्या तिथि पर मुख्य शुभ योग भी रहेगा। इस योग में पितरों से लिया गया आशीर्वाद शुभदायक और उन्नतिकारक होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि बुधवार को सूर्य और चंद्रमा बुध ग्रह की राशि मिथुन में एक साथ रहेंगे, इसलिए इस दिन किया गया दान अक्षय होगा। पितरों के साथ देवता, ऋषिगण और परमात्मा भी प्रसन्न होकर वरदान देते हैं।
पितरों के निमित्त करें दीपदान
बुधवार को स्नान-दान से निवृत्त होकर 11 या 21 दीपों से दीपदान करें। मान्यता है कि दीपदान करने से पितरों का देवलोक में जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। दीपदान नदी, गंगा, मंदिर या पीपल वृक्ष के पास करना बेहतर होता है। इसके अलावा दान में अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा देने का विशेष महत्व है।
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पितरों के निमित्त करें दीपदान
बुधवार को स्नान-दान से निवृत्त होकर 11 या 21 दीपों से दीपदान करें। मान्यता है कि दीपदान करने से पितरों का देवलोक में जाने का मार्ग प्रशस्त होता है। दीपदान नदी, गंगा, मंदिर या पीपल वृक्ष के पास करना बेहतर होता है। इसके अलावा दान में अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा देने का विशेष महत्व है।
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