Pitbull Attack: पालतू कुत्तों को मजाक में भी काटने के लिए न उकसाएं, हो सकते हैं हिंसक
आईवीआरआई पॉलीक्लिनिक के इंचार्ज डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक मौसम में परिवर्तन होने के साथ कई लोग पालतू कुत्तों के व्यवहार में बदलाव की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। उन्हें उचित रखरखाव और अन्य सावधानियां बरतने के प्रति जागरूक किया जाता है।
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लखनऊ में पिटबुल नस्ल के कुत्ते के मालकिन की जान ले लेने का मामला सामने आने के बाद बरेली के पशु प्रेमी भी सकते में हैं। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों और डॉग ब्रीडर से कुत्तों के व्यवहार परिवर्तन समेत कई बिंदुओं पर जानकारियां जुटाने लगे हैं। ताकि संभावित खतरे से बचा जा सके। विशेषज्ञ के मुताबिक काटने के लिए उकसाना, बांध कर रखना, पेट भर भोजन न मिलना ही कुत्तों को आक्रामक और हिंसक बनाता है।
आईवीआरआई पॉलीक्लिनिक के इंचार्ज डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक मौसम में परिवर्तन होने के साथ कई लोग पालतू कुत्तों के व्यवहार में बदलाव की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। उन्हें उचित रखरखाव और अन्य सावधानियां बरतने के प्रति जागरूक किया जाता है। हालांकि, अब तक लखनऊ जैसा मामला सामने नहीं आया है। कहा, हिंसक प्रवृत्ति वाले जानवरों को पालने और उनकी निगरानी की प्रक्रिया अलग होती है। ज्यादातर लोग इससे अनजान है। पिटबुल, रॉडविलर, डाबरमैन हिंसक नस्ल के कुत्ते होते हैं। लिहाजा, इन्हें ट्रेंड करना जरूरी है।
डॉग ब्रीडर विभु त्रिपाठी के मुताबिक ज्यादातर जिम या पहलवानी करने वाले लोग ही हिंसक नस्ल के कुत्तों को पालते हैं। वे इससे खुद को रौबदार दिखाने का प्रयास करते हैं। कुत्तों को आक्रामक बनाने के लिए खिलौना फाड़ने, नोचने के लिए देते हैं। राहगीरों या आवारा पशुओं पर हमला करना भी सिखाते हैं। धीरे-धीरे इससे कुत्तों में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है। आगे चलकर कुत्तों की यह प्रवृत्ति उनके मालिक के लिए भी खतरा या जानलेवा साबित होती है।
अगर बदले व्यवहार तो कराएं प्रशिक्षित
विभु के मुताबिक हिंसक या सामान्य नस्ल कोई भी प्रजाति हो, अगर कुत्ते के व्यवहार में परिवर्तन दिखे तो उसे नजरंदाज न करें। वह हमला करे, भौंके या घर के कपड़े, परदे या दरवाजे पर पंजा मारे तो उसको प्रशिक्षित कराएं। आमतौर पर चार माह की आयु में ही परिवर्तन दिखने लगता है। तभी अच्छे ट्रेनर से उसे ट्रेंड कराया जाए तो बेहतर रहता है। आठ माह की आयु पूरी होने के बाद व्यवहार और ज्यादा आक्रामक हो सकता है।
लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड की मांग सर्वाधिक
डॉग ब्रीडर के मुताबिक घरों में पालने के लिए लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बीगल, गोल्डन रिट्रीवर और पामेरियन ब्रीड की सबसे ज्यादा मांग रहती है। ये आक्रामक नहीं होते हैं। इनसे घर के बुजुर्गों और बच्चों को कोई खतरा नहीं होता है। लैब्राडोर सूंघने की अपनी विशिष्ट क्षमता की वजह से पुलिस और सेना के भी अंग बनते हैं। जर्मन शेफर्ड अपने सौम्य व्यवहार और पालने वालों के प्रति समर्पण की वजह से पसंद किए जाते हैं।
लक्षण से पहचानें और खुद को बचाएं
कुत्ते का शरीर और कान आगे आएं तो सतर्क हो जाएं। झपट्टा मारने के लिए कुत्ते आगे की ओर झुकते हैं। पट्टे से बंधा हो और किसी पर झपटने के लिए आगे बढ़े तो पट्टे को कसकर पकड़ें। अचानक ऊपर चढ़ने लगे तो भागे नहीं, पैर या कपड़े पकड़ने की कोशिश करे तब भी न भागें, बल्कि खुद को बचाने की कोशिश करें। अगर पास में पानी हो तो कुत्ते पर फेंकें। ज्यादा आक्रामक हो जाए तो उसके जबड़े पर वार करें।