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थर्मल स्क्रीनिंग पर न जाइए... कोरोना संक्रमित की पहचान के लिए सैंपल की जांच कराइए

Mon, 08 Jun 2020 03:27 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Mon, 08 Jun 2020 03:27 AM IST
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Do not go to thermal screening. Test samples to identify corona infection
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 कोरोना संक्रमितों की पहचान करने के लिए इन्फ्रारेड थर्मामीटर के जरिये देश भर में लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। लेकिन आप इस बात पर हैरत कर सकते हैं कि बरेली में अब तक करीब 60 संक्रमित पाए जा चुके हैं लेकिन इनमें से एक भी थर्मल स्कैनर के जरिये पकड़ में नहीं आया। थर्मल स्क्रीनिंग पर अब डॉक्टरों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिस तरह स्कैनिंग की जा रही है, उसका तरीका ही गलत है लिहाजा उसका सही नतीजा नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों ने कहा है कि अगर स्कैनिंग के तरीके में जरूरी बदलाव कर लिया जाए तो काफी हद तक यह तरीका कारगर साबित हो सकता है।

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थर्मल स्कैनर फोकस होना चाहिए कनपटी पर, किया जा रहा है माथे और नाक पर

संक्रामक रोग चैप्टर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक पिछले करीब चार महीनों से कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल और एयरपोर्ट समेत तमाम जगहों पर इन्फ्रारेड थर्मामीटर के जरिये थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है लेकिन इसका कहीं कोई सटीक परिणाम मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। जाहिर है कि ऐसे में संक्रमितों को भी स्वस्थ माने जाने की गंभीर चूक हो रही है। स्क्रीनिंग में पकड़ में न आने वाले लोग सैंपल की जांच में संक्रमित पाए जा रहे हैं। डॉ. अतुल का कहना है कि थर्मल स्क्रीनिंग के सही परिणाम न मिलने की सबसे बड़ी वजह यह है कि स्कैनिंग करने का तरीका ही ठीक नहीं है। थर्मल स्कैनर को माथे पर सीधे लगाने के बजाय आंख और कान के बीच हल्की सी गहराई वाले चेहरे के हिस्से जिसे टेंपल यानी कनपटी भी कहते हैं, वहां स्कैनर को फोकस कर शरीर का टेंप्रेचर लिया जाए तो 90 फीसद सही नतीजा मिलने की उम्मीद रहती है। उन्होंने बताया कि स्कैनर नसों में प्रवाहित रक्त की गर्माहट से शरीर के तापमान का आंकलन करता है। माथे पर रक्त की नसों पर फोकस न होने से तापमान में विभिन्नता मिलती है।
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कनपटी पर स्कैनिंग ज्यादा सुरक्षित भी

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक कनपटी पर थर्मल स्क्रीनिंग करने का तरीका ज्यादा सुरक्षित भी है क्योंकि इससे दोनों के चेहरे आमने-सामने नहीं रहेंगे। उन्होंने आशंका जताई कि चेहरा सामने होने की वजह से स्क्रीनिंग करने वाले कर्मी ज्यादा दूरी से टेंप्रेचर लेते हैं जबकि स्कैनिंग छह से 12 सेंटीमीटर की ही दूरी से होनी चाहिए।
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थर्मल स्क्रीनिंग में निगेटिव सैंपल जांच में पॉजिटिव

जिले में अब तक 65 व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इसमें से 27 एक्टिव केस हैं, दो की मौत हो चुकी है और 36 स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यही है कि घर पहुंचे प्रवासियों को सरकारी अस्पतालों में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद संक्रमित नहीं माना गया था। संवेदनशील इलाके का प्रवासी होने की वजह से एहतियातन जब उनके सैंपल की जांच कराई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। इसी वजह से थर्मल स्क्रीनिंग पर सवाल उठ रहे हैं। डॉक्टर यह आशंका भी जता रहे हैं कि तमाम संक्रमित ऐसे भी हो सकते हैं तो जो थर्मल स्क्रीनिंग में स्वस्थ मिलने के बाद घर पहुंच चुके होंगे।
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