{"_id":"5a3acbf74f1c1bc9678c3121","slug":"do-not-be-able-to-see-the-visual-cutters-in-shahmatganj-flyover","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यू कटर बाधक न बन जाएं शहामतगंज फ्लाई ओवर के फर्राटे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यू कटर बाधक न बन जाएं शहामतगंज फ्लाई ओवर के फर्राटे में
बरेली
Updated Thu, 21 Dec 2017 02:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहामतगंज फ्लाईओवर का काम दिसंबर में ही पूरा होना तय है, लेकिन दोनों ओर आबादी और खुली छतें होने से कोई शरारत कर सकता है, लिहाजा दोनों किनारों पर व्यूकटर लगने हैं, लेकिन इसके लिए बजट नहीं मिला है। ऐसे में व्यूकटर फ्लाईओवर पर यातायात शुरू होने में अड़ंगा लगा सकते हैं। डीएम ने अपने निरीक्षण में कहा कि काटे गए छज्जों की बाहर निकलीं सरिया कटवाकर वहां प्लास्टर करवा दिया जाए। फ्लाईओवर पर अभी दो ज्वाइंट भरना बाकी हैं जो सप्ताह भर में दुरुस्त हो जाएंगे। सेतु निगम अफसरों ने बताया कि काम दिसंबर में पूरा हो जाएगा। आधे पुल पर सड़क डाली जा चुकी है।
एक तकनीकी पेच अभी यह भी फंस रहा है कि पुल के नीचे शटरिंग अभी तक पूरी तरह नहीं खुली है। सूत्रों के मुताबिक स्लैब पड़ने के कम से कम 28 दिन शटरिंग खोली जाती है। इस दौरान स्लैब पर पानी डाला जाता है। शटरिंग खुलने के बाद तकनीकी रूप से दस दिन बाद ही पुल पर यातायात की इजाजत दी जाती है। इस लिहाज से ओवरब्रिज का 10 जनवरी से पहले पुल का शुरू होना मुश्किल है।
चीफ इंजीनियर ने फंसाया प्रोजेक्ट
लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर वीके सिंह पिछली सरकार से ही अपने पद पर बने हुए हैं। उनका बरेली से भी नाता है। वह कई बार शहामतगंज ब्रिज के बजट आदि में भी पेच फंसा चुके हैं। इस बार उन्होंने व्यू कटर लगाने का प्रस्ताव ही लंबित करा दिया है। बजट सेतु निगम चीफ इंजीनियर वाईके गुप्ता को स्वीकृत करना है, लेकिन गुप्ता लोक निर्माण विभाग के इशारे के बगैर इधर-उधर नहीं होते हैं। उधर, स्थानीय प्रशासन दिसंबर में प्रोजेक्ट पूरा कराने के साथ ही व्यूकटर लगवाना चाहते हैं।
विज्ञापन
नगर आयुक्त पैरवी करेंगे
डीएम आर. विक्रम सिंह ने कहा है कि व्यूकटर आदि का बजट जल्द दिलाने की जिम्मेदारी नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को सौंपी है। डीएम ने कहा कि लखनऊ जाकर नगर आयुक्त संबंधित चीफ इंजीनियर और अफसरों से मिलकर प्रस्तावित 80 लाख रुपये जारी कराएं।
300 बेड का अस्पताल अभी नहीं
डीएम बुधवार सुबह निर्माणाधीन 300 बेड के अस्पताल का निरीक्षण करने भी पहुंचे। प्रोजेक्ट मैनेजर राजकीय निर्माण निगम आशीष कुमार ने बताया कि 15 करोड़ रुपये की किस्त मिलना बाकी है। इसके मिलते ही काम तेज हो जाएगा। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने बताया कि ओपीडी ब्लॉक, इंडोर ब्लॉक, प्रशासनिक भवन, मातृ और शिशु अस्पताल, रेडियोलॉजी कक्ष में फिनिशिंग, बिजली कनेक्शन, मॉड्यूलर ओटी, इंटरनेट सुविधा, फायर सिस्टम, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, परिसर सुंदरीकरण, पार्किंग, आवास, गैस पाइपलाइन, परिसर गेट आदि कार्य बकाया हैं, इसलिए अभी ओपीडी भी शुरू करना संभव नहीं है।
शेल्टर होम को बजट नहीं
डीएम हरूनगला स्थित निर्माणाधीन शेल्टर होम देखने पहुंचे। कार्यदायी संस्था जल निगम प्रोजेक्ट मैनेजर ओपी सिंह ने बताया कि सौ लोगों की क्षमता वाले भवन का स्वीकृत धनराशि नहीं मिल पा रही है। इसलिए निर्माण कार्य प्रभावित है। डीएम ने नगर आयुक्त से कहा कि वे पैरवी कर बजट किस्तें जारी कराएं। प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 तक कार्य पूरा होना था।
विज्ञापन
एक तकनीकी पेच अभी यह भी फंस रहा है कि पुल के नीचे शटरिंग अभी तक पूरी तरह नहीं खुली है। सूत्रों के मुताबिक स्लैब पड़ने के कम से कम 28 दिन शटरिंग खोली जाती है। इस दौरान स्लैब पर पानी डाला जाता है। शटरिंग खुलने के बाद तकनीकी रूप से दस दिन बाद ही पुल पर यातायात की इजाजत दी जाती है। इस लिहाज से ओवरब्रिज का 10 जनवरी से पहले पुल का शुरू होना मुश्किल है।
विज्ञापन
चीफ इंजीनियर ने फंसाया प्रोजेक्ट
लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर वीके सिंह पिछली सरकार से ही अपने पद पर बने हुए हैं। उनका बरेली से भी नाता है। वह कई बार शहामतगंज ब्रिज के बजट आदि में भी पेच फंसा चुके हैं। इस बार उन्होंने व्यू कटर लगाने का प्रस्ताव ही लंबित करा दिया है। बजट सेतु निगम चीफ इंजीनियर वाईके गुप्ता को स्वीकृत करना है, लेकिन गुप्ता लोक निर्माण विभाग के इशारे के बगैर इधर-उधर नहीं होते हैं। उधर, स्थानीय प्रशासन दिसंबर में प्रोजेक्ट पूरा कराने के साथ ही व्यूकटर लगवाना चाहते हैं।
विज्ञापन
नगर आयुक्त पैरवी करेंगे
डीएम आर. विक्रम सिंह ने कहा है कि व्यूकटर आदि का बजट जल्द दिलाने की जिम्मेदारी नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को सौंपी है। डीएम ने कहा कि लखनऊ जाकर नगर आयुक्त संबंधित चीफ इंजीनियर और अफसरों से मिलकर प्रस्तावित 80 लाख रुपये जारी कराएं।
300 बेड का अस्पताल अभी नहीं
डीएम बुधवार सुबह निर्माणाधीन 300 बेड के अस्पताल का निरीक्षण करने भी पहुंचे। प्रोजेक्ट मैनेजर राजकीय निर्माण निगम आशीष कुमार ने बताया कि 15 करोड़ रुपये की किस्त मिलना बाकी है। इसके मिलते ही काम तेज हो जाएगा। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने बताया कि ओपीडी ब्लॉक, इंडोर ब्लॉक, प्रशासनिक भवन, मातृ और शिशु अस्पताल, रेडियोलॉजी कक्ष में फिनिशिंग, बिजली कनेक्शन, मॉड्यूलर ओटी, इंटरनेट सुविधा, फायर सिस्टम, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, परिसर सुंदरीकरण, पार्किंग, आवास, गैस पाइपलाइन, परिसर गेट आदि कार्य बकाया हैं, इसलिए अभी ओपीडी भी शुरू करना संभव नहीं है।
शेल्टर होम को बजट नहीं
डीएम हरूनगला स्थित निर्माणाधीन शेल्टर होम देखने पहुंचे। कार्यदायी संस्था जल निगम प्रोजेक्ट मैनेजर ओपी सिंह ने बताया कि सौ लोगों की क्षमता वाले भवन का स्वीकृत धनराशि नहीं मिल पा रही है। इसलिए निर्माण कार्य प्रभावित है। डीएम ने नगर आयुक्त से कहा कि वे पैरवी कर बजट किस्तें जारी कराएं। प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 तक कार्य पूरा होना था।