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Bareilly News: एसएनसीयू में नवजातों की मौत के मामले में पांचवें पायदान पर जिला
Sun, 25 Feb 2024 02:27 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 25 Feb 2024 02:27 AM IST
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बरेली। गर्भावस्था में सही खानपान और नियमित जांच के अभाव में नवजात की जान बचाना मुश्किल हो रहा है। बीते माह महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 25 नवजातों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर दर्ज मैटरनल हेल्थ के आंकड़ों के मुताबिक एसएनसीयू में बीते साल भर्ती 1,648 नवजात में से 17.17 फीसदी की मौत के साथ बरेली प्रदेश में पांचवें पायदान पर रहा। एसएनसीयू में 27.32 फीसदी नवजातों मौतों के साथ लखनऊ पहले, 23.97 फीसदी मौतों के साथ सीतापुर दूसरे, 23.47 फीसदी मौतों के साथ मेरठ तीसरे, 17.36 फीसदी मौतों के साथ बदायूं चौथे स्थान पर रहा।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक बरेली के फर्स्ट रेफरल यूनिट, डिलीवरी प्वाइंट समेत मंडल के अन्य जिलों बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत से भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के केस रेफर होकर यहां पहुंचते हैं। रोज 8-10 प्रसव हो रहे हैं। हाई रिस्क की स्थिति में नवजात को बचाने की चुनौती होती है। गर्भवतियों के सीवियर एनिमिक, हाई बीपी, हेपेटाइटिस सी की चपेट में होने का असर गर्भस्थ शिशु पर होता है। इससे बच्चे कमजोर होते हैं। अल्प वजन और अन्य विकारों की चपेट में रहते हैं। ऐसे बच्चों को एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती किया जाता है। ज्यादा गंभीर बच्चे रेडिएंट वार्मर में रखे जाते हैं। कम से कम सप्ताह भर या बेहद नाजुक स्थित में अधिकतम पांच सप्ताह तक रखना पड़ता है। मंडल भर से गर्भवती रेफर होने से अक्सर रेडिएंट वार्मर कम पड़ रहे हैं। सीएमओ को पत्र भेजकर रेडिएंट वार्मर की मांग की जा रही है।
एक वार्मर में रखते हैं दो-दो बच्चे
सीएमएस के अनुसार संसाधनों की कमी की जानकारी देकर अभिभावकों की सहमति पर एक रेडिएंट वॉर्मर में दो-दो बच्चे रखे जा रहे हैं, ताकि बाद में किसी तरह के विवाद की स्थिति न बने। अस्पताल में ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग पहुंचते हैं। उनके पास अन्य किसी अस्पताल में जाने के लिए बजट नहीं होता। ऐसे लोगों की मदद सीमित संसाधनों में की जा रही है।
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ऑक्सीजन प्लांट भी खराब, हाई डिपेंडेंसी यूनिट का इंतजार
महिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट बीते 15 दिनों से खराब है। सीएमएस के मुताबिक कार्यदायी फर्म को रिमाइंडर भेजने के बावजूद टीम आई और निरीक्षण कर चली गई। कम्प्रेसर में फाॅल्ट मिला पर अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया। वहीं, हाई डिपेंडेंसी यूनिट का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके निर्माण से बच्चों को और बेहतर इलाज मिलेगा। बेड अधिक होने से रेफर के मामले भी कम होंगे।
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जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक बरेली के फर्स्ट रेफरल यूनिट, डिलीवरी प्वाइंट समेत मंडल के अन्य जिलों बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत से भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के केस रेफर होकर यहां पहुंचते हैं। रोज 8-10 प्रसव हो रहे हैं। हाई रिस्क की स्थिति में नवजात को बचाने की चुनौती होती है। गर्भवतियों के सीवियर एनिमिक, हाई बीपी, हेपेटाइटिस सी की चपेट में होने का असर गर्भस्थ शिशु पर होता है। इससे बच्चे कमजोर होते हैं। अल्प वजन और अन्य विकारों की चपेट में रहते हैं। ऐसे बच्चों को एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती किया जाता है। ज्यादा गंभीर बच्चे रेडिएंट वार्मर में रखे जाते हैं। कम से कम सप्ताह भर या बेहद नाजुक स्थित में अधिकतम पांच सप्ताह तक रखना पड़ता है। मंडल भर से गर्भवती रेफर होने से अक्सर रेडिएंट वार्मर कम पड़ रहे हैं। सीएमओ को पत्र भेजकर रेडिएंट वार्मर की मांग की जा रही है।
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एक वार्मर में रखते हैं दो-दो बच्चे
सीएमएस के अनुसार संसाधनों की कमी की जानकारी देकर अभिभावकों की सहमति पर एक रेडिएंट वॉर्मर में दो-दो बच्चे रखे जा रहे हैं, ताकि बाद में किसी तरह के विवाद की स्थिति न बने। अस्पताल में ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग पहुंचते हैं। उनके पास अन्य किसी अस्पताल में जाने के लिए बजट नहीं होता। ऐसे लोगों की मदद सीमित संसाधनों में की जा रही है।
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ऑक्सीजन प्लांट भी खराब, हाई डिपेंडेंसी यूनिट का इंतजार
महिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट बीते 15 दिनों से खराब है। सीएमएस के मुताबिक कार्यदायी फर्म को रिमाइंडर भेजने के बावजूद टीम आई और निरीक्षण कर चली गई। कम्प्रेसर में फाॅल्ट मिला पर अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया। वहीं, हाई डिपेंडेंसी यूनिट का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके निर्माण से बच्चों को और बेहतर इलाज मिलेगा। बेड अधिक होने से रेफर के मामले भी कम होंगे।