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गुजरात मॉडल से होगा कायाकल्प

बरेली Updated Wed, 08 Apr 2015 01:53 AM IST
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उत्तर प्रदेश के किसान पशुपालन के गुजरात मॉडल पर ध्यान दें तो यूपी में श्वेत क्रांति से बड़ी क्रांति हो सकती है। यहां सरकार की भागीदारी न होने से कृ षि और पशुपालन पिछड़ रहा है। गुजरात में चल रही पशुधन संवर्धन योजना किसानाें के लिए बहुत ही मददगार साबित हो रही है। यह बातें आईवीआरआई द्वारा आयोजित महिला पशुपालक कार्यशाला में गुजरात से आए किसान रमेशभाई वी रूपारेलीया और उनकी पत्नी मनीसा ने लोगाें से कहीं।
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रमेशभाई ने बताया कि गुजरात में गिर प्रजाति की गाय और यूपी की साहीवाल गाय में थोड़ा अंतर है। गिर प्रजाति यूपी में सफल नहीं हो सकती। यह गरम जलवायु में रहने की आदी है जो गुजरात में है। उन्होंने बताया कि साहीवाल एक दिन में 40 लीटर तक दूध देती है। यूपी किसानाें को साहीवाल गाय की तरफ ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम में आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. रनवीर सिंह भी मौजूद थे।

गोक शी रोकने को गुजरात सरकार का फार्मूला
रमेशभाई ने बताया कि गुजरात सरकार हर गाय पालक को दस साल के बाद प्रतिवर्ष दस लाख रुपये देती है। इसके लिए सरकार से एग्रीमेंट किया जाता है। जो किसान दस साल तक दस गायाें को पालेगा उसे दस साल बाद प्रति वर्ष दस लाख रुपये मिलते हैं। इससे गुजरात में गिर प्रजाति का संवर्धन हो रहा है।
समय की खेती करें, परंपरा से न बंधे
रमेश बताते हैं कि गुजरात में किसान समय की खेती करते हैं, इसलिए सफल हैं। यूपी में परंपरा की खेती हो रही है। गुजरात में हल्दी, प्याज और गेहूं लगाते हैं। पिछले साल 12 एकड़ में प्याज बोया तो 40 लाख का बेचा गया। गाय के गोबर, मूत्र, दूध से भी खूब कमाई होती है। अपने खेताें के किनारे चंदन के पेड़ लगाएं। आज चंदन की मांग 300 फीसदी है, जबकि उपज केवल 30 फीसदी है। सिर्फ एक पौधा 25 साल के बाद 25 लाख का हो जाएगा।

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