{"_id":"6ae26a4d5a854b90090bbc76","slug":"degrees-from-rohilkhand-university-will-now-feature-bharat-instead-of-india-bareilly-news-c-4-bly1015-997382-2026-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: रुहेलखंड विश्वविद्यालय की डिग्रियों पर अब इंडिया की जगह होगा भारत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: रुहेलखंड विश्वविद्यालय की डिग्रियों पर अब इंडिया की जगह होगा भारत
विज्ञापन
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की उपाधियों पर अब इंडिया की जगह भारत अंकित होगा। कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय की अध्यक्षता में बुधवार को हुई विद्या परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। दावा है कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय ऐसी पहल करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है।
कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने बताया कि बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष के लिए ऑनर्स एवं ऑनर्स विद रिसर्च पाठ्यक्रमों को मंजूरी मिली। संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी सहित कई प्रमुख विषयों के संशोधित पाठ्यक्रमों को भी हरी झंडी दी गई।
बीएड कार्यक्रम की मूल्यांकन प्रणाली में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब इसे 70 फीसदी बाह्य और 30 फीसदी आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर तय किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों का अधिक निष्पक्ष मूल्यांकन हो सकेगा। छात्रों के भविष्य को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। एमएससी पादप विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और एनिमल साइंस पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल किया गया है। बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और बीएससी माइक्रोबायोलॉजी के संशोधित पाठ्यक्रमों का भी अनुमोदन हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने बताया कि बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष के लिए ऑनर्स एवं ऑनर्स विद रिसर्च पाठ्यक्रमों को मंजूरी मिली। संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी सहित कई प्रमुख विषयों के संशोधित पाठ्यक्रमों को भी हरी झंडी दी गई।
विज्ञापन
बीएड कार्यक्रम की मूल्यांकन प्रणाली में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब इसे 70 फीसदी बाह्य और 30 फीसदी आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर तय किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों का अधिक निष्पक्ष मूल्यांकन हो सकेगा। छात्रों के भविष्य को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। एमएससी पादप विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और एनिमल साइंस पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल किया गया है। बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और बीएससी माइक्रोबायोलॉजी के संशोधित पाठ्यक्रमों का भी अनुमोदन हुआ।
विज्ञापन