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Bareilly News: स्मार्ट सिटी में अंधेर का अंधेरा, शोपीस बनीं साढ़े चार करोड़ की फैंसी लाइटें
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बरेली। साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से दो हजार फैंसी लाइटें लगाए जाने के बावजूद स्मार्ट सिटी का अंधेरा दूर नहीं हुआ। कहीं इनके बल्ब फ्यूज हैं तो कहीं लैंप में मिट्टी भर गई है। कई लाइटों के तो लैंप ही गायब हो गए हैं। इनको लगाने में भी ठेकेदार ने मनमानी की। कहीं इनका खंभा टेढ़ा है तो कहीं पेड़ों के झुरमुट में लाइटें लगा दी गई हैं। रखरखाव ठीक से नहीं होने की वजह से ये अब कबाड़ में तब्दील हो रही हैं।
अब तो पार्षद इसमें भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाने लगे हैं। वहीं, इस मामले में अधिकारियों की मंशा भी स्पष्ट नहीं दिखती। वह शुरू से ही इसकी लागत को छिपा रहे हैं। बताया जाता है कि सड़क और फुटपाथ निर्माण के साथ ही इन फैंसी लाइटों की रकम भी शामिल है। पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि इन लाइटों का कोई औचित्य ही नहीं है। इनको लगाने में भ्रष्टाचार हुआ है। संवाद
जांच हो तो नपेंगे जिम्मेदार
इन लाइटों को लगाने में घोटाला किया गया है। इसकी जांच कराई जाए तो कई जिम्मेदार नप जाएंगे। इनका तो कोई औचित्य ही नहीं था। लाइटों ने सड़कों की जगह और घेर ली है। - लईक, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड सात
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दाल में कुछ नहीं, बहुत कुछ काला है। अगर लाइटें जलती तो ठीक रहता, लेकिन लगने के बाद से ही ये बुझी पड़ी हैं। निश्चित तौर पर इसकी जांच कराई जानी चाहिए। - गौरव सक्सेना, पार्षद, वार्ड 29
तार खुले हैं, लाइटों में मिट्टी भरी है और बल्ब फ्यूज हैं। फैंसी लाइटें लगने के बाद से आज तक उनको जलते हुए नहीं देखा गया। इसकी जांच कराई जाए तो घोटाला खुलेगा। - राजेश अग्रवाल, पार्षद, वार्ड 35
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खराब फैंसी लाइटों को ठीक कराया जाएगा। अधिकारियों और संबंधित फर्म से भी जवाब तलब होगा। अगर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो निश्चित तौर पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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अब तो पार्षद इसमें भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाने लगे हैं। वहीं, इस मामले में अधिकारियों की मंशा भी स्पष्ट नहीं दिखती। वह शुरू से ही इसकी लागत को छिपा रहे हैं। बताया जाता है कि सड़क और फुटपाथ निर्माण के साथ ही इन फैंसी लाइटों की रकम भी शामिल है। पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि इन लाइटों का कोई औचित्य ही नहीं है। इनको लगाने में भ्रष्टाचार हुआ है। संवाद
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जांच हो तो नपेंगे जिम्मेदार
इन लाइटों को लगाने में घोटाला किया गया है। इसकी जांच कराई जाए तो कई जिम्मेदार नप जाएंगे। इनका तो कोई औचित्य ही नहीं था। लाइटों ने सड़कों की जगह और घेर ली है। - लईक, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड सात
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दाल में कुछ नहीं, बहुत कुछ काला है। अगर लाइटें जलती तो ठीक रहता, लेकिन लगने के बाद से ही ये बुझी पड़ी हैं। निश्चित तौर पर इसकी जांच कराई जानी चाहिए। - गौरव सक्सेना, पार्षद, वार्ड 29
तार खुले हैं, लाइटों में मिट्टी भरी है और बल्ब फ्यूज हैं। फैंसी लाइटें लगने के बाद से आज तक उनको जलते हुए नहीं देखा गया। इसकी जांच कराई जाए तो घोटाला खुलेगा। - राजेश अग्रवाल, पार्षद, वार्ड 35
खराब फैंसी लाइटों को ठीक कराया जाएगा। अधिकारियों और संबंधित फर्म से भी जवाब तलब होगा। अगर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो निश्चित तौर पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त