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वीरेन डंगवाल को पढ़ते हुए मिलती है सांस्कृतिक समझ : शिविर मौर्य
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बरेली। विंडरमेयर थिएटर में चल रहे राजकमल प्रकाशन के किताब उत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत सिविल लाइंस स्थित कवि वीरेन डंगवाल स्मारक पर ‘सबदफेरी’ और कविता पाठ के साथ हुई। इस दौरान कवियों, लेखकों और साहित्यप्रेमियों ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए वीरेन डंगवाल का स्मरण किया और उनकी कविताओं का पाठ किया।
कवि-कथाकार उदयन वाजपेयी के निर्देशन में ‘अभिनय’ पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर विंडरमेयर में विभिन्न विषयों के साथ साथ ‘वीरेन की कविता, वीरेन का शहर’ विषय पर बातचीत हुई। इसमें शिरीष कुमार मौर्य ने बताया कि वीरेन डंगवाल का संबंध कई शहरों से रहा, जिनमें इलाहाबाद और बरेली के साथ उनका विशेष लगाव रहा। कहा जा सकता है कि वीरेन डंगवाल को पढ़ते हुए एक सांस्कृतिक समझ मिलती है।
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कथाकार योगेन्द्र आहूजा ने वीरेन डंगवाल पर लिखे गए संस्मरण के अंश का पाठ किया। वहीं प्रो. पूर्णिमा अनिल ने डंगवाल के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। इस सत्र के पूर्व में शिरीष कुमार मौर्य की किताब ‘हिंदी कविता के समकाल का सम’ का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का विमोचन पत्रकार लेखक प्रभात सिंह, कथाकार योगेन्द्र आहूजा, शिरीष कुमार मौर्य और प्रोफेसर पूर्णिमा अनिल ने किया।
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आलोचक वीरेंद्र यादव ने शिवमूर्ति के चर्चित उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ पर वक्तव्य देते हुए कहा कि यह उपन्यास हाशिए के लोगों की निगाह से लिखा गया है। अगले सत्र में ‘कुछ लखनऊ कुछ बरेली, कुछ किस्से कुछ शायरी’ विषय पर मशहूर किस्सागो हिमांशु बाजपेयी से आशु मिश्रा ने बातचीत की। इसी तरह अरुण देव की ‘मृत्यु’ विषय पर लिखी गई सौ कविताओं के संग्रह ‘मृत्यु कविताएं’ के संदर्भ में चर्चा करते हुए प्रत्यक्षा ने बातचीत की।
सत्र के अंत में अरुण देव ने अपनी कुछ कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में रंगकर्मी हृदयेश प्रताप सिंह ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ से दिलचस्प अंदाज में पाठ-प्रस्तुति दी। दया दृष्टि चैरेटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. बृजेश्वर सिंह की मेजबानी रही। संवाद
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किताब उत्सव में आज के कार्यक्रम
बरेली। किताब उत्सव में शुक्रवार को कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 3:30 बजे सुहेल वहीद की नई किताब ‘बॉन यादों में बसा शहर’ के लोकार्पण से होगी। अगले सत्र में बलवंत कौर की किताब ‘स्मृति और दंश: विभाजन, निरंतरता और तीसरी पीढ़ी’ का लोकार्पण होगा और अमितेश कुमार की लेखक के साथ बातचीत होगी। तीसरा सत्र हृषीकेश सुलभ के चर्चित उपन्यास ‘दातापीर’ के पाठ-संवाद का होगा। अगले सत्र में फैसल अलकाजी की किताब ‘मंच-प्रवेश’ का लोकार्पण होगा। इस दौरान किताब के लेखक फैसल अलकाजी और अनुवादक अमितेश कुमार से पत्रकार-लेखक प्रभात सिंह बातचीत करेंगे। वहीं रित्विक मोहन भगत व कैसर जमाल अंशपाठ करेंगे। अगले सत्र में ‘इस्मत का शहर: बरेली’ विषय पर डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, प्रभात सिंह, सम्यून खान चर्चा करेंगे। दिन के अंतिम सत्र में सुकेश साहनी की कहानी ‘पुल’ का रंगकर्मी पप्पू वर्मा द्वारा पाठ किया जाएगा। यह उत्सव नौ नवंबर तक चलेगा। संवाद
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कवि-कथाकार उदयन वाजपेयी के निर्देशन में ‘अभिनय’ पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर विंडरमेयर में विभिन्न विषयों के साथ साथ ‘वीरेन की कविता, वीरेन का शहर’ विषय पर बातचीत हुई। इसमें शिरीष कुमार मौर्य ने बताया कि वीरेन डंगवाल का संबंध कई शहरों से रहा, जिनमें इलाहाबाद और बरेली के साथ उनका विशेष लगाव रहा। कहा जा सकता है कि वीरेन डंगवाल को पढ़ते हुए एक सांस्कृतिक समझ मिलती है।
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बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कथाकार योगेन्द्र आहूजा ने वीरेन डंगवाल पर लिखे गए संस्मरण के अंश का पाठ किया। वहीं प्रो. पूर्णिमा अनिल ने डंगवाल के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। इस सत्र के पूर्व में शिरीष कुमार मौर्य की किताब ‘हिंदी कविता के समकाल का सम’ का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का विमोचन पत्रकार लेखक प्रभात सिंह, कथाकार योगेन्द्र आहूजा, शिरीष कुमार मौर्य और प्रोफेसर पूर्णिमा अनिल ने किया।
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आलोचक वीरेंद्र यादव ने शिवमूर्ति के चर्चित उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ पर वक्तव्य देते हुए कहा कि यह उपन्यास हाशिए के लोगों की निगाह से लिखा गया है। अगले सत्र में ‘कुछ लखनऊ कुछ बरेली, कुछ किस्से कुछ शायरी’ विषय पर मशहूर किस्सागो हिमांशु बाजपेयी से आशु मिश्रा ने बातचीत की। इसी तरह अरुण देव की ‘मृत्यु’ विषय पर लिखी गई सौ कविताओं के संग्रह ‘मृत्यु कविताएं’ के संदर्भ में चर्चा करते हुए प्रत्यक्षा ने बातचीत की।
सत्र के अंत में अरुण देव ने अपनी कुछ कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में रंगकर्मी हृदयेश प्रताप सिंह ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ से दिलचस्प अंदाज में पाठ-प्रस्तुति दी। दया दृष्टि चैरेटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. बृजेश्वर सिंह की मेजबानी रही। संवाद
किताब उत्सव में आज के कार्यक्रम
बरेली। किताब उत्सव में शुक्रवार को कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 3:30 बजे सुहेल वहीद की नई किताब ‘बॉन यादों में बसा शहर’ के लोकार्पण से होगी। अगले सत्र में बलवंत कौर की किताब ‘स्मृति और दंश: विभाजन, निरंतरता और तीसरी पीढ़ी’ का लोकार्पण होगा और अमितेश कुमार की लेखक के साथ बातचीत होगी। तीसरा सत्र हृषीकेश सुलभ के चर्चित उपन्यास ‘दातापीर’ के पाठ-संवाद का होगा। अगले सत्र में फैसल अलकाजी की किताब ‘मंच-प्रवेश’ का लोकार्पण होगा। इस दौरान किताब के लेखक फैसल अलकाजी और अनुवादक अमितेश कुमार से पत्रकार-लेखक प्रभात सिंह बातचीत करेंगे। वहीं रित्विक मोहन भगत व कैसर जमाल अंशपाठ करेंगे। अगले सत्र में ‘इस्मत का शहर: बरेली’ विषय पर डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, प्रभात सिंह, सम्यून खान चर्चा करेंगे। दिन के अंतिम सत्र में सुकेश साहनी की कहानी ‘पुल’ का रंगकर्मी पप्पू वर्मा द्वारा पाठ किया जाएगा। यह उत्सव नौ नवंबर तक चलेगा। संवाद