{"_id":"5e1b7a178ebc3e87bf23a3f1","slug":"cultural-bareilly-news-bly391691990","type":"story","status":"publish","title_hn":"मकर संक्रांति: ग्रहों के दुर्लभ संयोग मिटाएंगे जातकों के कष्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मकर संक्रांति: ग्रहों के दुर्लभ संयोग मिटाएंगे जातकों के कष्ट
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक अबकी शोभन, बुधादित्य और समसप्तक योग का बन रहा खास संयोग
बरेली। सूर्य धनु राशि से निकलकर 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्यदेव के दक्षिणायन से उत्तरायण होने के साथ ही, खरमास खत्म होगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मकर संक्रांति से शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और वसंत का आगमन शुरू हो जाता है। दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक, मकर संक्रांति का आगमन अबकी बार शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। इस बार शोभन योग, चंद्र शुक्र का समसप्तक योग और बुधादित्य योग में सूर्य का राशि परिवर्तन हो रहा है। इससे जप-तप और श्राद्ध तर्पण का महापर्व काफी खास होगा। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और शोभन योग में मकर संक्रांति पड़ने से माहात्म्य और बढ़ गया है। माघ कृष्ण चतुर्थी पर पंचमी 14-15 जनवरी की मध्यरात्रि 2:07 बजे सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 15 जनवरी को विशेष पुण्यकाल सुबह 8:14 बजे से सूर्यास्त तक रहेगा। पुण्य काल के समय में तीर्थ स्नान, दान, जप, हवन, तुलादान, गोदान, स्वर्ण दान का विशेष महत्व है। गरीबों को कंबल, ब्राह्मणों को खिचड़ी और तिल गुड़ को पात्र में भरकर दान करने से कष्ट मिटते हैं। स्नान के पूर्व शरीर पर तिल का उबटन लगाकर स्नान करने से आरोग्य की वृद्धि होती है।
संक्रांति का जातकों पर प्रभाव
ज्योतिषाचार्य पं. राजेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, रात के तीसरे पहर में संक्रांति का प्रवेश कलाकार, गायन आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए शुभ नहीं रहेगा। भवन आदि निर्माण सामग्री के भावों में तेजी आएगी। चंद्र-शुक्र के समसप्तम योग होने से जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इस साल मकर संक्रांति पर बुध सूर्य का बुद्धादित्य योग भी बन रहा है। बृहस्पति और शनि देव की संयुक्त युक्ति निर्मित हो रही है। खाद्यान्न के भावों में तेजी के योग तो कहीं-कहीं अल्प वर्षा के योग भी बन रहे हैं।
विज्ञापन
इस दिन भीष्म को मिला था मोक्ष
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सनातन धर्म में मकर संक्रांति को मोक्ष की सीढ़ी बताया गया है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति से शुरू होता है। सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। भगवान सूर्य शनिदेव के पिता हैं। सूर्य और शनि दोनों ही ग्रह पराक्रमी हैं। ऐसे में जब सूर्य देव मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है। इस कारण मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं के दान से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।
सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय
भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए रात के समय कदंब और मुकुल के फूल अर्पित करना श्रेयस्कर माना जाता है। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए बेला ऐसा फूल है, जिसे दिन या रात किसी भी समय चढ़ा सकते हैं। सूर्य देव को गुंजा, धतूरा, अपराजिता और तगर के फूल कभी नहीं चढ़ाने चाहिए।
विज्ञापन
बरेली। सूर्य धनु राशि से निकलकर 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्यदेव के दक्षिणायन से उत्तरायण होने के साथ ही, खरमास खत्म होगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मकर संक्रांति से शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और वसंत का आगमन शुरू हो जाता है। दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक, मकर संक्रांति का आगमन अबकी बार शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। इस बार शोभन योग, चंद्र शुक्र का समसप्तक योग और बुधादित्य योग में सूर्य का राशि परिवर्तन हो रहा है। इससे जप-तप और श्राद्ध तर्पण का महापर्व काफी खास होगा। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और शोभन योग में मकर संक्रांति पड़ने से माहात्म्य और बढ़ गया है। माघ कृष्ण चतुर्थी पर पंचमी 14-15 जनवरी की मध्यरात्रि 2:07 बजे सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 15 जनवरी को विशेष पुण्यकाल सुबह 8:14 बजे से सूर्यास्त तक रहेगा। पुण्य काल के समय में तीर्थ स्नान, दान, जप, हवन, तुलादान, गोदान, स्वर्ण दान का विशेष महत्व है। गरीबों को कंबल, ब्राह्मणों को खिचड़ी और तिल गुड़ को पात्र में भरकर दान करने से कष्ट मिटते हैं। स्नान के पूर्व शरीर पर तिल का उबटन लगाकर स्नान करने से आरोग्य की वृद्धि होती है।
विज्ञापन
संक्रांति का जातकों पर प्रभाव
ज्योतिषाचार्य पं. राजेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, रात के तीसरे पहर में संक्रांति का प्रवेश कलाकार, गायन आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए शुभ नहीं रहेगा। भवन आदि निर्माण सामग्री के भावों में तेजी आएगी। चंद्र-शुक्र के समसप्तम योग होने से जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इस साल मकर संक्रांति पर बुध सूर्य का बुद्धादित्य योग भी बन रहा है। बृहस्पति और शनि देव की संयुक्त युक्ति निर्मित हो रही है। खाद्यान्न के भावों में तेजी के योग तो कहीं-कहीं अल्प वर्षा के योग भी बन रहे हैं।
विज्ञापन
इस दिन भीष्म को मिला था मोक्ष
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सनातन धर्म में मकर संक्रांति को मोक्ष की सीढ़ी बताया गया है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति से शुरू होता है। सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। भगवान सूर्य शनिदेव के पिता हैं। सूर्य और शनि दोनों ही ग्रह पराक्रमी हैं। ऐसे में जब सूर्य देव मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है। इस कारण मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं के दान से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।
सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय
भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए रात के समय कदंब और मुकुल के फूल अर्पित करना श्रेयस्कर माना जाता है। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए बेला ऐसा फूल है, जिसे दिन या रात किसी भी समय चढ़ा सकते हैं। सूर्य देव को गुंजा, धतूरा, अपराजिता और तगर के फूल कभी नहीं चढ़ाने चाहिए।