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.. पहुंचे बरसाने चित्त छलन राधिका प्यारी का
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बरेली। कालीबाडी में सजे मंच से ललित और मनोहारी काव्य ख्यालगोई का लोगों ने भरपूर लुत्फ लिया और वाह वाह कह कर झूम उठे। गीत और शायरी में रस, छंद, अलंकार और मात्रा निहित होते हुए भी लय और सुर की प्रधानता गायकी को कर्णप्रिय बनाती रही। इसमें तुर्रा और कलगी पक्ष के सवाल जवाब ने तो समां बांध दिया। इस पर बीच बीच में लोगों की पंडाल में गूंजती तालियां गायक कलाकारों का उत्साह बढ़ाती रही।
कालीबाड़ी मंदिर पर लगे मेले के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय ख्याल सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें ख्लाय गायकों ने गजल, बारहमासी, होरी, कजरी आदि की धुनों पर गायकी पेश की। गायकी के दौरान कलाकारों ने देवी देवताओं का वर्णन, तो कभी राजाओं का इतिहास और सामाजिक घटनाओं आदि का दृष्टान्त संकेतों और इशारों में पेश किया। इसमें मुरादाबाद के सुखदेव शर्मा का गीत - यशोदानंदम वृंदावन रंग रंगीलो। हंस हंस खावत माखन छैल छबीलो।। लखनऊ के दिनेश शर्मा ने गाया- जीते जी किसी दिल को रोने नहीं देंगे। बीच नफरत का दिलों में बोने नहीं देंगे।। खूब सराहा गया।
इसके अलावा डा. जय शंकर दुबे ने गाया- क्या रूप मोहिनी धार लिया मनमोहन ने मनिहारी का। खुश होकर पहुंचे बरसाने चित छलन राधिका प्यारी का।। सुना कर भरपूर वाहवाही लूटी। इसी तरह बरेली के शंकर लाल कातिब, मथुरा के वीरेंद्र कश्यप व विजेंद्र गोला, फरुखाबाद के चुन्नू चमचम, हाथरस के गोकुल चंद शास्त्री आदि ख्लाल गायन पेश किया। पूर्व में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने अध्यक्षता करते हुए मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन करते हुए डा. जय शंकर दुबे ने ख्याल विद्या का वर्णन किया। संयोजक शंकर लाल कातिब ने आभार व्यक्त किया।
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कालीबाड़ी मंदिर पर लगे मेले के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय ख्याल सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें ख्लाय गायकों ने गजल, बारहमासी, होरी, कजरी आदि की धुनों पर गायकी पेश की। गायकी के दौरान कलाकारों ने देवी देवताओं का वर्णन, तो कभी राजाओं का इतिहास और सामाजिक घटनाओं आदि का दृष्टान्त संकेतों और इशारों में पेश किया। इसमें मुरादाबाद के सुखदेव शर्मा का गीत - यशोदानंदम वृंदावन रंग रंगीलो। हंस हंस खावत माखन छैल छबीलो।। लखनऊ के दिनेश शर्मा ने गाया- जीते जी किसी दिल को रोने नहीं देंगे। बीच नफरत का दिलों में बोने नहीं देंगे।। खूब सराहा गया।
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इसके अलावा डा. जय शंकर दुबे ने गाया- क्या रूप मोहिनी धार लिया मनमोहन ने मनिहारी का। खुश होकर पहुंचे बरसाने चित छलन राधिका प्यारी का।। सुना कर भरपूर वाहवाही लूटी। इसी तरह बरेली के शंकर लाल कातिब, मथुरा के वीरेंद्र कश्यप व विजेंद्र गोला, फरुखाबाद के चुन्नू चमचम, हाथरस के गोकुल चंद शास्त्री आदि ख्लाल गायन पेश किया। पूर्व में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने अध्यक्षता करते हुए मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन करते हुए डा. जय शंकर दुबे ने ख्याल विद्या का वर्णन किया। संयोजक शंकर लाल कातिब ने आभार व्यक्त किया।
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