{"_id":"5d4486da8ebc3e6cb66e8e5d","slug":"cultural-bareilly-news-bly3708953171","type":"story","status":"publish","title_hn":"आजादी के बाद भी वैचारिक तौर पर हम दास है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आजादी के बाद भी वैचारिक तौर पर हम दास है
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित नाटको के पहले दिन लांछन के मंचन ने बरेली के दर्शकों को इस कदर आकर्षित किया कि दूसरे दिन भारी संख्या में लोग पहुंचे। जिला प्रशासन के सहयोग से संजय कम्युनिटी हाल में चल रहे नाट्य समारोह के दूसरे रोज जलूस नाटक का मंचन किया गया। उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह दीप प्रज्वलन एवं प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया इसमें वरिष्ठ सहित्यकार एवं समाजसेवियों की भी सहभागिता रही।
मयंक नाट्य संस्था की ओर से मंचित किया गया मुंशी प्रेमचंद का लिखा नाटक जलूस देश प्रेम पर आधारित है। इसमें कहा गया संदेश दिया गया है कि देश स्वाधीन है परंतु वैचारिक और मानसिक दृष्टि से हम आज भी दास हैं। इसी कारण हिंदी को कूड़े करकट का ढेर और अंग्रेजी को अमृतसागर समझने की हमारी मान्यता आज भी नहीं बदली। जब देश पराधीन हुआ तो अंग्रेजों ने भारतीय नागरिकों को ही प्रलोभन देकर अपनी सेना में शामिल किया। फिर उन्हीं के जरिए देश वासियों पर कोड़े बरसाए गए, अत्याचार किया गया। इसी विषय को लेकर पूरे नाटक का ताना बनाया गया। जो दर्शकों के मानस पटल पटल अमित छाप छोड़ता है। नाटक के दौरान कई बार दर्शकों के बीच से भारत माता की जय के नारे भी गूंज उठे।
अंत में संयोजक कुलभूषण शर्मा ने आभार व्यक्त किया। सह संयोजक समयुन खान ने अतिथियों का स्वागत किया। कविता अरोड़ा संचालन किया। इस मौके पर जिलाधिकारी की पत्नी नीता सिंह, हरीश लाखा, रणजीत पंचाले, आशीष गुप्ता, क्रेडाई के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र गुप्ता, एडीएम (ई) आरएस द्विवेदी, वरिष्ठ रंगकर्मी जेसी पालीवाल आदि मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी गोरव वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को नमक का दारोगा नाटक का मंचन होगा। इधर बुक स्टॉल पर युवाओं ने मुंशी प्रेमचंद की लिखित रचनाओं को देखा और खरीदारी भी किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मयंक नाट्य संस्था की ओर से मंचित किया गया मुंशी प्रेमचंद का लिखा नाटक जलूस देश प्रेम पर आधारित है। इसमें कहा गया संदेश दिया गया है कि देश स्वाधीन है परंतु वैचारिक और मानसिक दृष्टि से हम आज भी दास हैं। इसी कारण हिंदी को कूड़े करकट का ढेर और अंग्रेजी को अमृतसागर समझने की हमारी मान्यता आज भी नहीं बदली। जब देश पराधीन हुआ तो अंग्रेजों ने भारतीय नागरिकों को ही प्रलोभन देकर अपनी सेना में शामिल किया। फिर उन्हीं के जरिए देश वासियों पर कोड़े बरसाए गए, अत्याचार किया गया। इसी विषय को लेकर पूरे नाटक का ताना बनाया गया। जो दर्शकों के मानस पटल पटल अमित छाप छोड़ता है। नाटक के दौरान कई बार दर्शकों के बीच से भारत माता की जय के नारे भी गूंज उठे।
विज्ञापन
अंत में संयोजक कुलभूषण शर्मा ने आभार व्यक्त किया। सह संयोजक समयुन खान ने अतिथियों का स्वागत किया। कविता अरोड़ा संचालन किया। इस मौके पर जिलाधिकारी की पत्नी नीता सिंह, हरीश लाखा, रणजीत पंचाले, आशीष गुप्ता, क्रेडाई के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र गुप्ता, एडीएम (ई) आरएस द्विवेदी, वरिष्ठ रंगकर्मी जेसी पालीवाल आदि मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी गोरव वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को नमक का दारोगा नाटक का मंचन होगा। इधर बुक स्टॉल पर युवाओं ने मुंशी प्रेमचंद की लिखित रचनाओं को देखा और खरीदारी भी किया।
विज्ञापन