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‘पर्यावरण का संरक्षण करना राष्ट्रधर्म’
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बरेली। त्रिवटीनाथ मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को वृंदावन से आए कथाव्यास डॉ. पं. सुरेश शास्त्री ने राष्ट्रधर्म से श्रद्धालुओं को परिचित कराया। बताया, दुश्मन देश से भूमि की रक्षा करना ही नहीं बल्कि जल, वायु सुरक्षित करने के लिए किया योगदान भी राष्ट्रधर्म है।
राजा परीक्षित के बारे में बताते हुए कहा, राजा परीक्षित ने राज्य में जलाशय बनवाए। पौधरोपण कराया ताकि स्वच्छ वातावरण विकसित हो। हिरण्यकश्यप ने राष्ट्र के सार तत्व यानी जल, वायु छिपा लिए थे। जिससे पृथ्वी का भविष्य संकट में पड़ गया। तब वराह अवतार धारण कर भगवान ने हिरण्यकश्यप का संहार किया और सारे तत्व वापस ले आए। बताया राजा परीक्षित के बाद राजा मनु ने सृष्टि के कार्य को आगे बढ़ाया। मनु का अर्थ मन यानी जिसके पास भी मन है वह मनु है। सभी को राष्ट्रधर्म का संकल्प दिलाने के बाद आरती कर कथा का विश्राम हुआ। इस दौरान प्रताप चंद्र सेठ, संजीव औतार अग्रवाल व अन्य का सहयोग रहा। ब्यूरो
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राजा परीक्षित के बारे में बताते हुए कहा, राजा परीक्षित ने राज्य में जलाशय बनवाए। पौधरोपण कराया ताकि स्वच्छ वातावरण विकसित हो। हिरण्यकश्यप ने राष्ट्र के सार तत्व यानी जल, वायु छिपा लिए थे। जिससे पृथ्वी का भविष्य संकट में पड़ गया। तब वराह अवतार धारण कर भगवान ने हिरण्यकश्यप का संहार किया और सारे तत्व वापस ले आए। बताया राजा परीक्षित के बाद राजा मनु ने सृष्टि के कार्य को आगे बढ़ाया। मनु का अर्थ मन यानी जिसके पास भी मन है वह मनु है। सभी को राष्ट्रधर्म का संकल्प दिलाने के बाद आरती कर कथा का विश्राम हुआ। इस दौरान प्रताप चंद्र सेठ, संजीव औतार अग्रवाल व अन्य का सहयोग रहा। ब्यूरो
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