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सफाई कर्मी की विदाई पर महिला अस्पताल में तमंचे से हर्ष फायरिंग
बरेली
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:55 AM IST
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जिला महिला अस्पताल में एक सफाई कर्मी की सेवानिवृत्ति के बाद विदाई हुई तो उनके परिवार वाले इतने उत्साहित हो गए कि अस्पताल के नियम कायदे ही भूल गए। ढोल-नगाड़े बजाए गए और तमंचे से दो राउंड फायर किए। सर्जरी के लिए आपरेशन थियेटर जा रहीं डॉक्टरों ने फायरिंग की आवाज सुनी तो भागकर बाहर आईं। कर्मचारी व उसके परिवार को डांट लगाई और सभी को अस्पताल से बाहर कर दिया।
महिला अस्पताल की एक महिला कर्मचारी का कुछ दिन पहले निधन हो गया था। इसके चार दिन बाद सोमवार को सफाई कर्मी सुशीला देवी को सेवानिवृत्त किया गया। चूंकि एक कर्मी के निधन से लोग दुखी थे, इसलिए सुशीला देवी की सेवानिवृत्ति पर किसी प्रकार के समारोह की इजाजत नहीं दी गई। सादगी से उन्हें विदाई दी गई, लेकिन दोपहर दो बजे के बाद सुशीला देवी के परिवार के कुछ लोग और रिश्तेदार ढोल-नगाड़ों के साथ अस्पताल पहुंच गए और खूब नाच गाना किया। सर्जरी के लिए जा रहीं महिला डॉक्टराें ने ढोल की आवाज को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन जब गोली चलने की आवाज सुनी तो भागकर बाहर आईं। डॉक्टरों ने लोगाें को फायर करने से मना किया, लेकिन वे नहीं माने और दूसरी बार फिर फायर कर दिया। इस दौरान कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन घबराकर लोग इधर-उधर भागने लगे। अस्पताल में आई एंबुलेंस भी कुछ देर के लिए रुक गई और मरीज भी काफी परेशान हुए। इसके बाद डॉक्टरों ने डांटकर सभी को अस्पताल से बाहर कर दिया।
कोट
मैं आपरेशन थियेटर में सर्जरी करने जा रही थी। इसी दौरान अचानक पटाखे जैसी आवाज सुनी। बाहर आकर देखा तो फायरिंग हो रही थी। मैंने फायरिंग से मना करके सभी को अस्पताल से बाहर जाने के लिए कहा, इसके बाद सभी बाहर चले गए। -डॉ. शशि गुप्ता, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल
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महिला अस्पताल की एक महिला कर्मचारी का कुछ दिन पहले निधन हो गया था। इसके चार दिन बाद सोमवार को सफाई कर्मी सुशीला देवी को सेवानिवृत्त किया गया। चूंकि एक कर्मी के निधन से लोग दुखी थे, इसलिए सुशीला देवी की सेवानिवृत्ति पर किसी प्रकार के समारोह की इजाजत नहीं दी गई। सादगी से उन्हें विदाई दी गई, लेकिन दोपहर दो बजे के बाद सुशीला देवी के परिवार के कुछ लोग और रिश्तेदार ढोल-नगाड़ों के साथ अस्पताल पहुंच गए और खूब नाच गाना किया। सर्जरी के लिए जा रहीं महिला डॉक्टराें ने ढोल की आवाज को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन जब गोली चलने की आवाज सुनी तो भागकर बाहर आईं। डॉक्टरों ने लोगाें को फायर करने से मना किया, लेकिन वे नहीं माने और दूसरी बार फिर फायर कर दिया। इस दौरान कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन घबराकर लोग इधर-उधर भागने लगे। अस्पताल में आई एंबुलेंस भी कुछ देर के लिए रुक गई और मरीज भी काफी परेशान हुए। इसके बाद डॉक्टरों ने डांटकर सभी को अस्पताल से बाहर कर दिया।
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कोट
मैं आपरेशन थियेटर में सर्जरी करने जा रही थी। इसी दौरान अचानक पटाखे जैसी आवाज सुनी। बाहर आकर देखा तो फायरिंग हो रही थी। मैंने फायरिंग से मना करके सभी को अस्पताल से बाहर जाने के लिए कहा, इसके बाद सभी बाहर चले गए। -डॉ. शशि गुप्ता, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल
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