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घुटने के साथ कंधे में भी होता है गठिया
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:33 AM IST
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- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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लोग इस भूल में हैं कि गठिया सिर्फ घुटने में होता है, जबकि ऐसा नहीं है। कंधे का गठिया भी खतरनाक है। आपके हाथ बिल्कुल बेकार हो जाएंगे और आप उनसे कोई काम भी नहीं कर पाएंगे। इसको सर्जरी करके खासकर कंधा प्रत्यारोपण करके कैसे दूर किया जाए, इसे समझाने के लिए बरेली में आर्थो विशेषज्ञाें का जमावड़ा लगा। कैडेवर यानी मृत शरीर पर कंधे के प्रत्यारोपण की सर्जरी की गई। 75 डॉक्टरों को आपरेशन की तकनीक बताने के लिए दिल्ली एम्स के पूर्व कंधा सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. जे माहेश्वरी और मुंबई से डॉ. दीपित साहू शामिल हुए।
आईएमए बरेली और आर्थोपेडिक एसोसिएशन की ओर से रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. जे माहेश्वरी ने बताया कि कंधे का प्रत्यारोपण अब आम हो गया है। इसके दो कारण हैं। पहला, लोग क्वालिटी जीवन जीना चाहते हैं। हाथ की दिक्कत ऐसी है कि अगर इसमें खराबी आ जाए तो लोग पूरी तरह लाचार हो जाते हैं, इसलिए सर्जरी कराते हैं। दूसरा कारण अत्यधिक चोटों का लगना है। अगर कंधे पर लगातार चोट लग रही हैं तो इससे कप और बॉल दोनों ही खराब होने की आशंका रहती है। डॉ. जे माहेश्वरी बताते हैं कि कंधे में दिक्कत का सबसे बड़ा कारण बढ़ती उम्र है। जैसे घुटने खराब होते हैं वैसे ही कंधे में भी गठिया होकर यह खराब हो जाते हैं। आप हाथ नहीं घुमा सक ते, इससे कुछ काम नहीं कर सकते। अगर पांच से छह माह तक दर्द होता है तो एक्सरे और एमआरआई कराकर इसका पता लगाया जा सकता है।
डॉ. दीपित ने बताया कि एक माह में 2 से 3 कंधा प्रत्यारोपण तो हो ही जाता है। इसका खर्च प्राइवेट अस्पताल में 2 से 3 लाख के करीब है। इस दौरान मेयर डॉ. आईएस तोमर, यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. हरीश मक्कड़, सचिव डॉ. आशीष श्रीवास्तव, मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. केशव अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. काश्मीर सिंह, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. सत्येंद्र सिंह, डॉ. आरजी शर्मा, डॉ. आदित्य माहेश्वरी, डॉ. वरुण अग्रवाल, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, डॉ. विनोद पागरानी व अन्य शामिल रहे।
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प्लास्टर का बहुत ज्यादा नहीं दिख रहा है इफेक्ट
कोई भी हड्डी टूटने पर प्लास्टर लगा देना आने वाले समय में चलन से बाहर हो जाएगा। सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होगा। इसके रिजल्ट सौ फीसदी होंगे। आर्थो विशेषज्ञाें की कार्यशाला में आए विशेषज्ञ डॉ. जे माहेश्वरी और मुंबई हरिसन दास रिलायंस अस्पताल के डॉ. दिपित ने बताया कि प्लास्टर से अभी भी शिकायत मिल रही हैं कि हड्डी टेढ़ी हो रही है या फिर प्लास्टर के बाद लोग सामान्य काम नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए आज जोड़ों में चोट व अन्य इलाज दूरबीन से करके या फिर सर्जरी से ठीक कर रहे हैं। डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि प्लास्टर का इफेक्ट कम है, इससे रिकवरी नहीं हो पाती है।
कैडेवर में सीखते समय याद आए पुराने दिन
रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनॉटमी विभाग में 75 डॉक्टर ऐप्रन पहनकर पांच अलग-अलग कैडेवर पर विशेष सर्जरी सीख रहे थे। डॉ. जे माहेश्वरी ने कंधे के जोड़ को बदलकर दिखाया। डॉ. दीपित ने चोट से कई बार टूट चुके कंधे को लेटेस्ट लॉकिंग प्लेट टेकिभनक से जोड़कर दिखाया। डॉ. विनोद पागरानी ने आपरेशन से पहले डायग्नोज को जरूरी बताया। डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी ने कंधे के फ्रैक्चर के बारे में बताया।
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आईएमए बरेली और आर्थोपेडिक एसोसिएशन की ओर से रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. जे माहेश्वरी ने बताया कि कंधे का प्रत्यारोपण अब आम हो गया है। इसके दो कारण हैं। पहला, लोग क्वालिटी जीवन जीना चाहते हैं। हाथ की दिक्कत ऐसी है कि अगर इसमें खराबी आ जाए तो लोग पूरी तरह लाचार हो जाते हैं, इसलिए सर्जरी कराते हैं। दूसरा कारण अत्यधिक चोटों का लगना है। अगर कंधे पर लगातार चोट लग रही हैं तो इससे कप और बॉल दोनों ही खराब होने की आशंका रहती है। डॉ. जे माहेश्वरी बताते हैं कि कंधे में दिक्कत का सबसे बड़ा कारण बढ़ती उम्र है। जैसे घुटने खराब होते हैं वैसे ही कंधे में भी गठिया होकर यह खराब हो जाते हैं। आप हाथ नहीं घुमा सक ते, इससे कुछ काम नहीं कर सकते। अगर पांच से छह माह तक दर्द होता है तो एक्सरे और एमआरआई कराकर इसका पता लगाया जा सकता है।
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डॉ. दीपित ने बताया कि एक माह में 2 से 3 कंधा प्रत्यारोपण तो हो ही जाता है। इसका खर्च प्राइवेट अस्पताल में 2 से 3 लाख के करीब है। इस दौरान मेयर डॉ. आईएस तोमर, यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. हरीश मक्कड़, सचिव डॉ. आशीष श्रीवास्तव, मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. केशव अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. काश्मीर सिंह, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. सत्येंद्र सिंह, डॉ. आरजी शर्मा, डॉ. आदित्य माहेश्वरी, डॉ. वरुण अग्रवाल, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, डॉ. विनोद पागरानी व अन्य शामिल रहे।
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प्लास्टर का बहुत ज्यादा नहीं दिख रहा है इफेक्ट
कोई भी हड्डी टूटने पर प्लास्टर लगा देना आने वाले समय में चलन से बाहर हो जाएगा। सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होगा। इसके रिजल्ट सौ फीसदी होंगे। आर्थो विशेषज्ञाें की कार्यशाला में आए विशेषज्ञ डॉ. जे माहेश्वरी और मुंबई हरिसन दास रिलायंस अस्पताल के डॉ. दिपित ने बताया कि प्लास्टर से अभी भी शिकायत मिल रही हैं कि हड्डी टेढ़ी हो रही है या फिर प्लास्टर के बाद लोग सामान्य काम नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए आज जोड़ों में चोट व अन्य इलाज दूरबीन से करके या फिर सर्जरी से ठीक कर रहे हैं। डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि प्लास्टर का इफेक्ट कम है, इससे रिकवरी नहीं हो पाती है।
कैडेवर में सीखते समय याद आए पुराने दिन
रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनॉटमी विभाग में 75 डॉक्टर ऐप्रन पहनकर पांच अलग-अलग कैडेवर पर विशेष सर्जरी सीख रहे थे। डॉ. जे माहेश्वरी ने कंधे के जोड़ को बदलकर दिखाया। डॉ. दीपित ने चोट से कई बार टूट चुके कंधे को लेटेस्ट लॉकिंग प्लेट टेकिभनक से जोड़कर दिखाया। डॉ. विनोद पागरानी ने आपरेशन से पहले डायग्नोज को जरूरी बताया। डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी ने कंधे के फ्रैक्चर के बारे में बताया।