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दो साल बाद फिर खुली वैज्ञानिक हत्याकांड की फाइल
बरेली।
Updated Sat, 06 May 2017 01:25 AM IST
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Two years later, the file of open scientist massacre
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा हत्याकांड के खुलासे में अबतक असफल रही पुलिस ने नए एसपी सिटी के आने के बाद फिर नई कवायद शुरू कर दी है। पुलिस ने इस केस की फाइल अधिकारिक रूप से तो बंद नहीं की थी लेकिन जांच के नाम पर यह केस बंद ही था। एसपी सिटी ने क्राइम समीक्षा में शहर को हिला देने वाले हत्याकांड को प्राथमिकता पर रखा है। विवेचक गीतेश कपिल को हत्याकांड के खुलासे के लिए नए सिरे से रणनीति बनाकर वैज्ञानिक के कातिलों तक पहुंचने की चुनौती दी गई है।
आईवीआरआई के जेनेटिक एनीमल विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की 28 जुलाई 2015 की रात चार अज्ञात बदमाशों ने गले पर जानलेवा हमला करके हत्या की थी। मां और नौकरानी को बाथरूम में बंधक बनाकर हत्या को लूट का रूप देने की कोशिश हुई थी। वारदात के बाद शासन तक मची खलबली के चलते थाने की पुलिस के अतिरिक्त क्राइम ब्रांच और एसटीएफ को भी लगा दिया गया था। फोरेंसिक विभाग ने घर और विभाग से करीब सवा सौ फिंगर प्रिंट इकट्ठा किए थे। पहले इसकी रिपोर्ट छह महीने तक नहीं आई। करीब पांच रिमाइंडर देने के बाद रिपोर्ट इज्जतनगर थाने आई तो किसी फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं हो सका।
विवेचक बदले, कातिल तक कोई नहीं पहुंचा
दो सालों में पांच विवेचक बदल चुके हैं। तत्कालीन थाना प्रभारी कमल सिंह के बाद सत्येंद्र सिंह, राम गोपाल शर्मा, अशोक कुमार ने केस को अपने तरीके से खोलने की कोशिश की। अब इंस्पेक्टर गीतेश कपिल हत्याकांड की विवेचना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नए सिरे से रणनीति तैयार की जा रही है।
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70 से ज्यादा पर्चें कटे
-आठ पुलिस की टीम लगी थी।
-अब तक 70 से ज्यादा पर्चे पुलिस काट चुकी है।
-करीब 76 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
-सवा सौ फिंगर प्रिंट की जांच की गई।
-150 लोगों के नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे।
डीजीपी की प्राथमिकता में है हत्याकांड
डीजीपी जावीद अहमद ने पदभार संभालने के बाद बरेली के प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड को प्राथमिकता पर रखते हुए विवेचक को केस डायरी के साथ तलब किया था। तत्कालीन सीओ धर्म सिंह मार्छाल ने चार टीमों का गठन करके वारदात को खोलने के लिए नये सिरे से प्रयास किए, लेकिन नतीजा सिफर रहा था। अब डीजीपी सुलखान सिंह ने भी बरेली की अनसुलझी वारदातें में प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड को खोलने पर जोर दिया है।
क्राइम समीक्षा की गई है। प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश है कि जल्द कातिलों तक पहुंचा जाए।
-रोहित सिंह सचवान, एसपी सिटी
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आईवीआरआई के जेनेटिक एनीमल विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की 28 जुलाई 2015 की रात चार अज्ञात बदमाशों ने गले पर जानलेवा हमला करके हत्या की थी। मां और नौकरानी को बाथरूम में बंधक बनाकर हत्या को लूट का रूप देने की कोशिश हुई थी। वारदात के बाद शासन तक मची खलबली के चलते थाने की पुलिस के अतिरिक्त क्राइम ब्रांच और एसटीएफ को भी लगा दिया गया था। फोरेंसिक विभाग ने घर और विभाग से करीब सवा सौ फिंगर प्रिंट इकट्ठा किए थे। पहले इसकी रिपोर्ट छह महीने तक नहीं आई। करीब पांच रिमाइंडर देने के बाद रिपोर्ट इज्जतनगर थाने आई तो किसी फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं हो सका।
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विवेचक बदले, कातिल तक कोई नहीं पहुंचा
दो सालों में पांच विवेचक बदल चुके हैं। तत्कालीन थाना प्रभारी कमल सिंह के बाद सत्येंद्र सिंह, राम गोपाल शर्मा, अशोक कुमार ने केस को अपने तरीके से खोलने की कोशिश की। अब इंस्पेक्टर गीतेश कपिल हत्याकांड की विवेचना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नए सिरे से रणनीति तैयार की जा रही है।
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70 से ज्यादा पर्चें कटे
-आठ पुलिस की टीम लगी थी।
-अब तक 70 से ज्यादा पर्चे पुलिस काट चुकी है।
-करीब 76 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
-सवा सौ फिंगर प्रिंट की जांच की गई।
-150 लोगों के नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे।
डीजीपी की प्राथमिकता में है हत्याकांड
डीजीपी जावीद अहमद ने पदभार संभालने के बाद बरेली के प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड को प्राथमिकता पर रखते हुए विवेचक को केस डायरी के साथ तलब किया था। तत्कालीन सीओ धर्म सिंह मार्छाल ने चार टीमों का गठन करके वारदात को खोलने के लिए नये सिरे से प्रयास किए, लेकिन नतीजा सिफर रहा था। अब डीजीपी सुलखान सिंह ने भी बरेली की अनसुलझी वारदातें में प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड को खोलने पर जोर दिया है।
क्राइम समीक्षा की गई है। प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश है कि जल्द कातिलों तक पहुंचा जाए।
-रोहित सिंह सचवान, एसपी सिटी