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दोषियों को बचाने के लिए रच रहे हैं कहानी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sat, 30 Apr 2016 01:31 AM IST
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ऑनर किलिंग के मामले में बेअंदाज लापरवाही सामने आने के बाद भी अफसर डॉक्टर और पुलिसवालों को बचाने में जुट गए हैं। दामन साफ बताने के लिए कहानी भी गढ़ी जाने लगी है। इलाज को घायलावस्था में पहुंची कैकेई और उसकी मां को भगा देने वाले डाक्टर का अब यह कहना है कि उसने तो रोका था लेकिन लड़की ही चली गई। उनके पास इस बात का जवाब नहीं कि घायल मरणासन्न थी तो फिर उसको एडमिट कर तुरंत इलाज क्यों नहीं किया?
लड़की को मरने के लिए छोड़ कर मौके से गायब हुए पुलिस वालों के बचाव में एसपी देहात जमुना प्रसाद कह रहे हैं कि पुलिस वाले कहीं नहीं गए थे वो तो वहीं थे। बहरहाल डाक्टर की लापरवाही की जांच सीएमओ और पुलिस वालों की भूमिका की जांच डीआईजी ने मातहतों को सौंप दी है।
जो कहानी डाक्टर ने बनाई
अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि लड़की उसकी मां को लेकर जब पुलिस 1.35 बजे सीएचसी पहुंची तो इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. वीरेश कुमार, फार्मेसिस्ट आईडी भट्ट और सफाई कर्मचारी जगदीश तैनात थे। उस वक्त विवाद की वजह रहे गोकिल और उसके पिता नन्हे का मेडिकल हो रहा था। डॉ. वीरेश के मुताबिक वह नन्हे का मेडिकल कर रहे थे। फार्मेसिस्ट आईडी भट्ट गोकिल के हाथ में टांके लगा रहे थे। सिपाहियों ने मां बेटी को इमरजेंसी रूम के अंदर किया। मामला झगडे़ का होने के कारण पुलिस से चिट्ठी मजरूबी मांगी तो सिपाही ने मना कर दिया। इस पर पांच मिनट बाद मेडिकल करने की बात कही। डॉक्टर वीरेश कुमार के अनुसार करीब दो मिनट बाद पीछे मुड़कर देखा तो दोनों सिपाही अस्पताल से गायब थे। मां बेटी ने घायल नन्हे और गोकिल को देखा तो चौंक गई। इसके बाद वे दोनों वहां से चली गईं। डॉक्टर ने यह कहा कि सफाई कर्मचारी जगदीश ने आवाज देकर उन्हें रोका तो युवती की मां ने धीरे से कहा पहले इनका इलाज कर लो । इसके बाद वह वहां से चली गई। डॉ. वीरेश के अनुसार सिपाही गांव से लेकर आए तो कुछ देर यहां रुक सकते थे। युवती को इलाज के लिए बरेली रिफर करना था। फिर सिपाहियों को वापस चौकी जाने की इतनी जल्दी क्यों थी?
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पुलिस की नयी कहानी जानिए
मां बेटी को अस्पताल लाने वाले सिपाही रतनेश और अरुण डॉक्टर की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों के अनुसार वे दरोगा जी के साथ रात को गांव गए और मां बेटी को अस्पताल लाए। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने चिट्ठी मजरूबी मांगी। फिर बोले कि इसकी मां साथ में हैं इसलिए भर्ती कर लेते हैं। सिपाहियों के अनुसार, डॉक्टर ने खुद कहा कि दीवान जी आप चले जाओ हम अभी इलाज शुरू करते हैं। उसके बाद हम चले गए। गांव में कोई विवाद न बढ़े इसलिए गश्त करते रहे। थाने की जीडी में दरोगा सूरज पाल ने लिखा है कि गांव में गोकिल और रमेश के बीच झगडे़ की सूचना पर पहुुंचे तो वहां कोई नहीं था। नन्हे उसका बेटा गोकिल और लड़की की मां अस्पताल आ चुके थे। अस्पताल आकर देखा तो नन्हे और गोकिल जा चुके थे। अस्पताल के बाहर महिला अपनी बेटी के साथ थी। युवती मृत अवस्था में पड़ी थी। इसके बाद पुलिस गांव में शांति व्यवस्था में लगी रही।
एसपी देहात और सिपाहियों की बात में अंतर
एसपी देहात जमुना प्रसाद का कहना है कि सिपाही गाड़ी करके सीएचसी मां बेटी को ले गए थे तो वहां से आते क्यों? डाक्टर से उन्होंने बार-बार कहा लेकिन वे माने ही नहीं और दूसरे मरीज का मेडिकल करते रहे। इसके लिए सीएमओ को चिट्ठी लिखूंगा कि सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है कि पहले घायल का इलाज हो फिर क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि सिपाही वहीं थे।
हत्यारोपियों को तो पुलिस ने भगाया
अमर उजाला ब्यूरो
बहेड़ी। हत्या बुधवार को हुई पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार को लड़की का शव रात करीब नौ बजे गांव पहुंचा। लड़की के बडे़ भाई ने ही मुखाग्नि दी। इस दौरान चार सगे भाई और दो तहेरे भाई भी मौजूद रहे।यानी सभी नामजद आरोपी वहीं थे। फरीदपुर चौकी के इंचार्ज दरोगा सूरज सिंह ने हत्यारोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। आरोपियों को अभयदान देने के सवाल पर दरोगा सूरज पाल ने कहा कि अगर हम मृतका के भाइयों को गिरफ्तार कर लेते तो शव का अंतिम संस्कार कौन करता। सुबह उनकी अरेस्टिंग के लिए गांव पहुंचे तब तक वे जा चुके थे। जाहिर है कि मुल्जिमों की गिरफ्तारी जानबूझकर नहीं की गई और उन्हें भागने का मौका दिया गया।
ये था मामला
लड़की को उसके दोस्त गोकिल के साथ भाइयों ने बृहस्पतिवार रात देख लिया था। इसके बाद गोकिल और लड़की पीटने लगे। बचाने आए गोकिल के पिता नन्हें को भी पीटा। जान बचाकर भागे पिता-पुत्र ने थाने पहुंचकर रमेश, भगवान दास, रामौतार, राम सिंह के खिलाफ एनसीआर दर्ज कराई। इंस्पेक्टर ने फरीदपुर चौकी प्रभारी दरोगा सूरज सिंह को गांव जाने को कहा तो वह सिपाही रतनेश यादव और अरुण कुमार यादव को लेकर वहां पहुंचे। ग्रामीणों ने भाइयों की ओर से पिटाई की बात बताई तो पुलिस मां बेटी को सीएचसी ले आई। दरोगा सूरज सिंह वहां से चौकी लौट गये। दोनों सिपाही उसे लेकर सीएचसी पहुंचे। वे वहां दोनों को छोड़ आए। किसी ने इस घटना की जानकारी न तो इंस्पेक्टर को दी और न ही सीओ को दी। यहां फरीदपुर चौकी के स्टाफ ने पूरा मामला मैनेज करने की नीयत से अफसरों को गुमराह किया।
एसपी देहात भी पहुंचे
एसपी देहात यमुना प्रसाद शुक्रवार दोपहर गांव पहुंचे और लड़की के घर वालों से पूछताछ की। ग्रामीणों से शांतिपूर्ण माहौल कायम करने की अपील की। उन्होंने फरीदपुर चौकी के दरोगा सूरज सिंह, सिपाही रतनेश यादव, अरुण कुमार यादव से भी पूछताछ की। सीओ प्रमोद यादव को आदेश दिए कि मामले की गहनता से जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई हो।
नन्हे और गोकिल प्राइवेट अस्पताल में
सुबह लड़की की मौत की खबर मिली तो गोकिल और उसके पिता ने पहले सीएचसी से बरेली के लिए रेफर करा लिया। अब प्राइवेट अस्पताल में हैं।
अभी इस मामले की जांच चल रही है। पुलिस दोषी है या डॉक्टर अभी कुछ नहीं कह सकते। जांच के बाद ही असली बात सामने आएगी।
- प्रमोद यादव, सीओ बहेड़ी
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लड़की को मरने के लिए छोड़ कर मौके से गायब हुए पुलिस वालों के बचाव में एसपी देहात जमुना प्रसाद कह रहे हैं कि पुलिस वाले कहीं नहीं गए थे वो तो वहीं थे। बहरहाल डाक्टर की लापरवाही की जांच सीएमओ और पुलिस वालों की भूमिका की जांच डीआईजी ने मातहतों को सौंप दी है।
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जो कहानी डाक्टर ने बनाई
अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि लड़की उसकी मां को लेकर जब पुलिस 1.35 बजे सीएचसी पहुंची तो इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. वीरेश कुमार, फार्मेसिस्ट आईडी भट्ट और सफाई कर्मचारी जगदीश तैनात थे। उस वक्त विवाद की वजह रहे गोकिल और उसके पिता नन्हे का मेडिकल हो रहा था। डॉ. वीरेश के मुताबिक वह नन्हे का मेडिकल कर रहे थे। फार्मेसिस्ट आईडी भट्ट गोकिल के हाथ में टांके लगा रहे थे। सिपाहियों ने मां बेटी को इमरजेंसी रूम के अंदर किया। मामला झगडे़ का होने के कारण पुलिस से चिट्ठी मजरूबी मांगी तो सिपाही ने मना कर दिया। इस पर पांच मिनट बाद मेडिकल करने की बात कही। डॉक्टर वीरेश कुमार के अनुसार करीब दो मिनट बाद पीछे मुड़कर देखा तो दोनों सिपाही अस्पताल से गायब थे। मां बेटी ने घायल नन्हे और गोकिल को देखा तो चौंक गई। इसके बाद वे दोनों वहां से चली गईं। डॉक्टर ने यह कहा कि सफाई कर्मचारी जगदीश ने आवाज देकर उन्हें रोका तो युवती की मां ने धीरे से कहा पहले इनका इलाज कर लो । इसके बाद वह वहां से चली गई। डॉ. वीरेश के अनुसार सिपाही गांव से लेकर आए तो कुछ देर यहां रुक सकते थे। युवती को इलाज के लिए बरेली रिफर करना था। फिर सिपाहियों को वापस चौकी जाने की इतनी जल्दी क्यों थी?
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पुलिस की नयी कहानी जानिए
मां बेटी को अस्पताल लाने वाले सिपाही रतनेश और अरुण डॉक्टर की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों के अनुसार वे दरोगा जी के साथ रात को गांव गए और मां बेटी को अस्पताल लाए। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने चिट्ठी मजरूबी मांगी। फिर बोले कि इसकी मां साथ में हैं इसलिए भर्ती कर लेते हैं। सिपाहियों के अनुसार, डॉक्टर ने खुद कहा कि दीवान जी आप चले जाओ हम अभी इलाज शुरू करते हैं। उसके बाद हम चले गए। गांव में कोई विवाद न बढ़े इसलिए गश्त करते रहे। थाने की जीडी में दरोगा सूरज पाल ने लिखा है कि गांव में गोकिल और रमेश के बीच झगडे़ की सूचना पर पहुुंचे तो वहां कोई नहीं था। नन्हे उसका बेटा गोकिल और लड़की की मां अस्पताल आ चुके थे। अस्पताल आकर देखा तो नन्हे और गोकिल जा चुके थे। अस्पताल के बाहर महिला अपनी बेटी के साथ थी। युवती मृत अवस्था में पड़ी थी। इसके बाद पुलिस गांव में शांति व्यवस्था में लगी रही।
एसपी देहात और सिपाहियों की बात में अंतर
एसपी देहात जमुना प्रसाद का कहना है कि सिपाही गाड़ी करके सीएचसी मां बेटी को ले गए थे तो वहां से आते क्यों? डाक्टर से उन्होंने बार-बार कहा लेकिन वे माने ही नहीं और दूसरे मरीज का मेडिकल करते रहे। इसके लिए सीएमओ को चिट्ठी लिखूंगा कि सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है कि पहले घायल का इलाज हो फिर क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि सिपाही वहीं थे।
हत्यारोपियों को तो पुलिस ने भगाया
अमर उजाला ब्यूरो
बहेड़ी। हत्या बुधवार को हुई पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार को लड़की का शव रात करीब नौ बजे गांव पहुंचा। लड़की के बडे़ भाई ने ही मुखाग्नि दी। इस दौरान चार सगे भाई और दो तहेरे भाई भी मौजूद रहे।यानी सभी नामजद आरोपी वहीं थे। फरीदपुर चौकी के इंचार्ज दरोगा सूरज सिंह ने हत्यारोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। आरोपियों को अभयदान देने के सवाल पर दरोगा सूरज पाल ने कहा कि अगर हम मृतका के भाइयों को गिरफ्तार कर लेते तो शव का अंतिम संस्कार कौन करता। सुबह उनकी अरेस्टिंग के लिए गांव पहुंचे तब तक वे जा चुके थे। जाहिर है कि मुल्जिमों की गिरफ्तारी जानबूझकर नहीं की गई और उन्हें भागने का मौका दिया गया।
ये था मामला
लड़की को उसके दोस्त गोकिल के साथ भाइयों ने बृहस्पतिवार रात देख लिया था। इसके बाद गोकिल और लड़की पीटने लगे। बचाने आए गोकिल के पिता नन्हें को भी पीटा। जान बचाकर भागे पिता-पुत्र ने थाने पहुंचकर रमेश, भगवान दास, रामौतार, राम सिंह के खिलाफ एनसीआर दर्ज कराई। इंस्पेक्टर ने फरीदपुर चौकी प्रभारी दरोगा सूरज सिंह को गांव जाने को कहा तो वह सिपाही रतनेश यादव और अरुण कुमार यादव को लेकर वहां पहुंचे। ग्रामीणों ने भाइयों की ओर से पिटाई की बात बताई तो पुलिस मां बेटी को सीएचसी ले आई। दरोगा सूरज सिंह वहां से चौकी लौट गये। दोनों सिपाही उसे लेकर सीएचसी पहुंचे। वे वहां दोनों को छोड़ आए। किसी ने इस घटना की जानकारी न तो इंस्पेक्टर को दी और न ही सीओ को दी। यहां फरीदपुर चौकी के स्टाफ ने पूरा मामला मैनेज करने की नीयत से अफसरों को गुमराह किया।
एसपी देहात भी पहुंचे
एसपी देहात यमुना प्रसाद शुक्रवार दोपहर गांव पहुंचे और लड़की के घर वालों से पूछताछ की। ग्रामीणों से शांतिपूर्ण माहौल कायम करने की अपील की। उन्होंने फरीदपुर चौकी के दरोगा सूरज सिंह, सिपाही रतनेश यादव, अरुण कुमार यादव से भी पूछताछ की। सीओ प्रमोद यादव को आदेश दिए कि मामले की गहनता से जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई हो।
नन्हे और गोकिल प्राइवेट अस्पताल में
सुबह लड़की की मौत की खबर मिली तो गोकिल और उसके पिता ने पहले सीएचसी से बरेली के लिए रेफर करा लिया। अब प्राइवेट अस्पताल में हैं।
अभी इस मामले की जांच चल रही है। पुलिस दोषी है या डॉक्टर अभी कुछ नहीं कह सकते। जांच के बाद ही असली बात सामने आएगी।
- प्रमोद यादव, सीओ बहेड़ी