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हाथ बांधकर क्रूरता से मारी गईं तीनों बहनें
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 29 Aug 2016 01:29 AM IST
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीनों बहनों की मौत डूबने से बताई जा रही है लेकिन साथ ही विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लाश खराब हो जाने से यह नहीं बताया जा पा रहा कि उनके साथ मारपीट या गला दबाने जैसी बात हुई या नहीं लेकिन प्रीति की मां सोमवती ने बताया कि मेरी बेटी का हाथ और मुंह बंधा हुआ था। हत्यारों ने उसे बेरहमी से मारकर नदी में बहाया है। सोमवती की बात पंचनामा भी सच साबित कर रही है। पुलिस ने तो लाश मिलने के बाद इसका जिक्र नहीं किया था लेकिन पंचनामा भरते समय हाथ पर दुपट्टा बंधे होने का जिक्र किया गया है। जिससे जाहिर है कि उनकी हत्या हाथ बांधकर ही की गई होंगी। सोमवती ने बताया की बेटी के कमर से नीचे के हिस्से में भी चोट के निशान थे। पिंकी की शारदा के माता-पिता भी अपनी बेटियों की हत्या बेरहमी से करने की बात कर रहे हैं। पुलिस को सबसे पहले शारदा का शव भाखड़ा नदी में पहाड़पुर गांव के पास झाड़ियों में फंसा मिला था। शारदा के पिता ओंमकार कश्यप और उनकी पत्नी सोमादेवी का कहना है कि उनकी बेटी की गला दबाकर हत्या हुई है। नाक, कान और मुंह से खून निकल रहा था। उसका शव घास में लिपटा हुआ था। शव मिलने के बाद पहुंचे ग्रामीणों ने मौके पर जाकर देखा तो शारदा के नीचे के कपड़े कमर से नीचे थे। पुलिस ने आनन-फानन में कपड़े सही करा दिए। सबसे अहम बात यह है कि पंचनामा भरने वाले दरोगा जेपी रावत ने रेप की आशंका का पंचनामा में जिक्र ही नहीं किया। भला हो चिकित्सकों का उन्होंने इसके बाद भी स्लाइड बना ली। इतना ही नहीं चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के बाद शारदा का विसरा भी सुरक्षित कर लिया है। ताकि जरूरत पड़ने पर उसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जा सके। 15 वर्षीया पिंकी के शव का पंचनामा मीरगंज के उप निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने भरा था। पंचनामे में जीभ निकली होने की जिक्र ही नहीं है। जबकि पिंकी की मां जगदेई पत्नी बेनीराम का कहना है कि उनकी बेटी डूबकर नहीं मरी है। डूबने वाले की जीभ बाहर नहीं निकलती है। उसका गला सूजा हुआ था। उसके सिर के आगे के बाल गायब हो गए। पंचनामा में गला सूजने का भी जिक्र नहीं किया गया। प्रीति की मां सोमवती पत्नी महेंद्रपाल ने बताया कि उसकी बेटी की लाश धनेटा फाटक के पास हाईवे के भाखड़ा पुल के नीचे मिली है। उसके दोनों दोनों हाथ दुपट्टे से बंधे थे। आंखों पर पट्टी बंधी थी। एक आंख निकली हुई थी। कमर के नीचे चोट के निशान थे। दोनों हाथ, चेहरा तेजाब से जला हुआ था। प्रीति के शव का पंचनामा भरने वाले मीरगंज के उप निरीक्षक सुदीश कुमार ने हाथ में दुपट्टा होने का जिक्र तो किया है, लेकिन कमरे से नीचे चोट आंखों पर पट्टी बंधी होने और एक आंख निकली होने की बात उन्होंने पंचनामा में नहीं लिखी है।
एक साथ जलीं तीन बहनों की चिताएं
इतवार की सुबह सैंजना गांव के बाशिंदों के लिए बेहद मनहूस रही। सैंजना गांव के ही श्मशान में तीनों बहनों की चिताएं एक साथ जलीं तो पूरा गांव सिसक उठा। आंखें भी तीन नाबालिग बहनों की चिताएं एक साथ जलते देख बरस पड़ीं।
शनिवार आधी रात को तीनों बहनों का पोस्टमार्टम कराकर प्रशासन ने लाशें परिजनों को सौंप दी थीं। परिवार वाले लाशें लेकर गांव पहुंचे। मातमी माहौल के बीच रविवार की सुबह लगभग आठ बजे तीनों का गांव की श्मशान भूमि में परंपरागत ढंग से अंत्येष्टि कर दी गई। तीनों घरों से एक साथ तीन लाशें उठीं तो पूरे गांव में कोहराम मच गया।
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दोस्त बोली, हंसमुख स्वभाव की थीं तीनों बहनें
प्रीति की जिगरी दोस्त ममता ने बताया कि प्रीति के अलावा शारदा, पिंकी से भी उसकी खूब पटती थी। अक्सर तीनों बैठकर हंसती-हंसाती रहती थीं। जरा सी बात पर खिल खिलाकर हंस देना प्रीति का स्वभाव था। शारदा, पिंकी भी मिलनसार-हंसमुख स्वभाव की थीं। तीनों सहेलियों की अचानक हुई मौत से गांव की हर बिरादरी की बेटियां सदमे में हैं। ममता की मानें तो प्रीति समेत तीनों बहनों के बारे में कभी भी कोई बुरी बात सुनने में नहीं आई थी। ममता का कहना है कि घटना की सच्चाई का पता लगना चाहिए।
यह कहती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट
सैजना गांव में तीन लड़कियों की हत्या का राज पोस्टमार्टम से सुलझने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों के पैनल ने जो रिपोर्ट बनाई है उसमें मौत का कारण नदी में डूबना बताया जा रहा है। तीन दिन तक पानी में रहने के चलते शव इतना गल गया कि शरीर में चोट के निशान तक नहीं दिख रहे हैं। फिलहाल डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रख लिया है।
शनिवार आधी रात को तीनाें लड़कियों प्रीति, पिंकी और शारदा का पोस्टमार्टम करने के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों का पैनल बनाया गया। इसमें संयुक्त अस्पताल से डॉ. शिवदत्ता, डॉ. संजय कुमार और महिला अस्पताल से डॉ. अनीता धस्माना शामिल रहीं। डॉक्टरों को पोस्टमार्टम के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। लड़कियों का शव पानी के चलते बुरी तरह गल चुका था। इनकी बाहरी त्वचा भी उधड़ रही थी। चोट और रस्सी से बंधे होने की बात कही जा रही थी लेकिन पोस्टमार्टम में ऐसा कुछ पता नहीं चल सका। यौन उत्पीड़न के बारे में चिकित्सकों ने कुछ नहीं बताया। पैनल ने रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रखी है। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आगे जांच संबंधी मामलों के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस के विशेषज्ञों की बात
1-तीन अलग-अलग लड़कियां एक साथ आत्महत्याएं नहीं कर सकती हैं। इसके पीछे वजह यह है कि तीनों अलग-अलग उम्र की हैं। उनकी सोच अलग-अलग थी। एक परिवार की जरूर हैं, लेकिन घर अलग हैं। सुसाइड करने के ऐसे मामले पिछले दस सालों में कोई प्रकाश में नहीं आया है।
2-तीन लड़कियों की एक साथ डूबने से भी मौत संभव नहीं है। जिन स्थानों पर लड़कियों की लाशें मिली हैं। वहां कोई नहाने का स्थान भी नहीं है। नदी में नहाने जातीं तो यह हो सकता है। उसमें भी एक पहले डूबती तो दूसरी से शरीर पर बचाने के लक्षण मिल सकते थे। यह भी है कि खेतों से नदी के पानी का लेवल दस-बारह फिट नीचे है। इसलिए वहां प्लानिंग के तहत ही डूबोकर मारा जा सकता है।
3-एक साथ तीन लड़कियों की हत्या हो सकती है। नशीली पदार्थ खिलाकर तीनों को नदी में डाला जाए तो उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से ही मौत की बात सामने आएगी। यह भी हो सकता है कि नशीला पदार्थ खिलाकर उन्हें नदी में डाल दिया हो। लाशों की हालत भी हत्या की पुष्टि कर रही है। पिंकी और प्रीति की जीभ बाहर निकली हुई थी। आंखें बाहर निकल आई थीं।
4- मरने के बाद पानी में शरीर गलता है। शारदा की लाश की हालत भी अच्छी नहीं थी। पिंकी और प्रीति की लाश का एंगिल बिल्कुल एक जैसा था। उनके शरीर में फफोले पड़ गए थे। जबकि लाश में यह प्रक्रिया 36 से 48 घंटे के बीच शुरू होनी चाहिए। प्रीति के हाथ में एक दुपट्टा बंधा था। प्रीति की मां की बात में दम है कि उसकी बेटी के हाथ बंधे थे, क्योंकि पानी में लाश बहने के बाद हाथ खुल भी सकते हैं।
सियासी लोग भी गांव पहुंचे
मीरगंज। सैंजना गांव में तीन बहनों की लाशें मिलने के बाद सियासी लोग भी गांव पहुंचे। रविवार की सुबह 11 बजे केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार सैंजना पहुंचकर मृतक बच्चियों के परिजनों से मिले और मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण-दुखद बताया और पुलिस से संयम से काम लेकर बेगुनाहों को फांसने के बजाय गहन तफ्तीश कर असल गुनाहगारों के नाम उजागर कर उन्हें जेल भेजने को कहा। पूर्व कांग्रेस सांसद प्रवीण सिंह ऐरन भी इतवार दोपहर लगभग 12 बजे सैंजना पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर इंसाफ दिलवाने का भरोसा भी दिलाया। कहा-एसएसपी से मिलकर तीन बहनों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत की सनसनीखेज वारदात का जल्द से जल्द खुलासा करने को कहेंगे। बाद में सपा नेता सुरेश गंगवार और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा, तरुण गंगवार, कुंवर महीपाल सिंह, भगवान सिंह गंगवार आदि भाजपाई भी पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर सांत्वना दी।
राजू की गिरफ्तारी खोलेगी हत्या का राज
सैंजना गांव की तीनों बहनों ही हत्या का राज राजू के पकड़े जाने के बाद ही खुल पाएगा। पुलिस उसके कथित पिता महेश कश्यप को लेकर दिल्ली पहुंच गई है। राजू की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी गई है, लेकिन अभी तक राजू पुलिस के हाथ नहीं लगा है।
तिहरे हत्याकांड की अभी तक की विवेचना राजू शर्मा के ईदगिर्द ही घूम रही है। राजू का घर शारदा के घर के पास है। वह उस पर बुरी नजर रखता था। दो बार शारदा के घर राजू पकड़ा भी गया था। चार दिन पहले ही शारदा के भाई ने राजू को अपने घर पकड़ लिया था। इससे पहले शारदा की चाची ने राजू को उनके घर से भागते हुए देखा था। शारदा और उसके साथ की सभी लड़कियों की गतिविधियों के बारे में राजू जानकारी रखता था। शारदा के पिता ओंमकार को शक है कि राजू और उसके साथी सोनू आदि ने मिलकर उनकी बेटी शारदा, भतीजी पिंकी और प्रीति की हत्या की है। राजू ने प्लानिंग के तहत हत्या की है। इसीलिए वह घटना के एक दिन पहले ही घर से गायब हो गया था। पुलिस की एक टीम राजू की तलाश करने के लिए उसके कथित पिता महेश शर्मा को लेकर दिल्ली चली गई है। राजू की बहनों के घर का पता कराकर उसकी तलाश की जा रही है। राजू के हाथ आने के बाद ही पुलिस को तीनों बहनों की हत्या की गुत्थी सुलझने की उम्मीद है।
चश्मदीद की जुबानी
26 अगस्त को दोपहर बारह बजे सैंजना के पूर्वी छोर पर रहने वाले हेतराम की 15 वर्षीय किशोरी हेमा ने शारदा, पिंकी और प्रीति को भूपेंद्र सिंह के गन्ने के खेत में घुसते देखा था। हेमा उस समय धान के खेत में काम कर रही थी। उसने बताया कि करीब 12 बजे होंगे जब तीनों एक साथ गन्ने के खेत में घुसी थीं। एक साथ खेत में जाना कोई नई बात नहीं है इसलिए उसे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। फिर उसने उन्हें निकलते नहीं देखा और ध्यान नहीं दिया। शाम को जब तीनों की तलाश शुरू हुई तो हेमा ने यह जानकारी अपने घरवालों को दी थी। हेमा की बात से यह बात तो साबित हो गई कि तीनों दोपहर तक एक साथ थीं।
गन्ने का खेत शारदा के घर से करीब आधा किलोमीटर दूर है और गन्ने के खेत से भाखड़ा नदी करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। हैरत यह है कि खेत से फिर नदी तक उन्हें जाते किसी ने नहीं देखा है। पुलिस भी तीनों बहनों को आखिरी बार देखने वाली हेमा को साथ लेकर गन्ने के खेत तक गई थी। माना जा रहा है कि इसी गन्ने के खेत से लड़कियां अगवा हुई हैं।
सहमा सैंजना-आंखों में सवाल पर गांव खामोश
सैंजना वही गांव है जहां तीन चचेरी-तहेरी बहनों की एक साथ हत्या कर लाश नदी में फेंक दी गई है। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में हत्याकांड की दहशत आंखों में हैं...सवाल भी है कि आखिर यह कैसे हुआ होगा लेकिन हर जुबां खामोश है। मीडिया और पुलिस की गाड़ियों के हार्न गांव के सन्नाटे को कुछ कम कर रही है। झुंड में कई जगह गांव वाले कानाफूसी कर रहे हैं जिसके केंद्र में तीनों बहनें, उनका परिवार और अखबारों में छपी खबरों की चर्चा है लेकिन कुछ पूछने पर सभी का करीब -करीब एक ही जवाब..हम क्या बताएं, क्या कहा जा सकता है। इस खामोशी की वजह से पुलिस को भी तफ्तीश में कुछ हासिल नहीं हो सका है।
बरेली से करीब 50 किलोमीटर दूर इस गांव का रास्ता मीरगंज तहसील से होकर जाता है। करीब दस किलोमीटर खड़ंजे पर चलने के बाद गांव का चौराहा आया जहां बैठा हुजूम इसी कांड पर चर्चा कर रहा था। शुरुआत तो मीरगंज से ही हो गई थी लेकिन वहां सवाल यह तैर रहा था कि दरिंदों ने वारदात को अंजाम दिया होगा। यहां के अर्जुन और अभिषेक का कहना था कि संभव हो पहचान छुपाने के लिए डुबो दिया हो। हमारी टीम जब गांव पहुंची तो शारदा के घरवालों ने वह चबूतरा दिखाया जहां राजू और उसके दोस्त अक्सर बैठे रहते थे। राजू के बारे में पीड़ित परिवार तो बोल रहा है लेकिन सारा गांव चुप है। कैसा है राजू? इस सवाल पर किसी ने कुछ खास नहीं कहा। ठंडा जवाब मिला...वह तो ठीक है। राजू को गांव में 25 की शाम से किसी ने नहीं देखा। शारदा का घर मुख्य सड़क पर है जबकि प्रीति और पिंकी के घर पीछे गली में हैं। प्रीति और पिंकी के मकान पक्के भले ही हों लेकिन गरीबी साफ दिखती है। शारदा के घर तो दीवार भी नहीं है जिसका परदा रह सके। जब भी किसी काम से कमरे से कोई बाहर आता है तो नजर पड़ती ही है। शारदा के पिता ओमकार कहते हैं: झुंड में राजू के साथी बैठे रहते थे। कई बार मना किया तो लड़ने को तैयार हो जाते थे। राजू का घर तो खुला है लेकिन कोई है नहीं। उसकी मां भी कांड के बाद से गांव में नहीं है। चेहरों से तो यही लगता है कि कुछ कहानी पड़ोसी जानते तो हैं लेकिन मुंह पर नहीं लाना चाहते।
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एक साथ जलीं तीन बहनों की चिताएं
इतवार की सुबह सैंजना गांव के बाशिंदों के लिए बेहद मनहूस रही। सैंजना गांव के ही श्मशान में तीनों बहनों की चिताएं एक साथ जलीं तो पूरा गांव सिसक उठा। आंखें भी तीन नाबालिग बहनों की चिताएं एक साथ जलते देख बरस पड़ीं।
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शनिवार आधी रात को तीनों बहनों का पोस्टमार्टम कराकर प्रशासन ने लाशें परिजनों को सौंप दी थीं। परिवार वाले लाशें लेकर गांव पहुंचे। मातमी माहौल के बीच रविवार की सुबह लगभग आठ बजे तीनों का गांव की श्मशान भूमि में परंपरागत ढंग से अंत्येष्टि कर दी गई। तीनों घरों से एक साथ तीन लाशें उठीं तो पूरे गांव में कोहराम मच गया।
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दोस्त बोली, हंसमुख स्वभाव की थीं तीनों बहनें
प्रीति की जिगरी दोस्त ममता ने बताया कि प्रीति के अलावा शारदा, पिंकी से भी उसकी खूब पटती थी। अक्सर तीनों बैठकर हंसती-हंसाती रहती थीं। जरा सी बात पर खिल खिलाकर हंस देना प्रीति का स्वभाव था। शारदा, पिंकी भी मिलनसार-हंसमुख स्वभाव की थीं। तीनों सहेलियों की अचानक हुई मौत से गांव की हर बिरादरी की बेटियां सदमे में हैं। ममता की मानें तो प्रीति समेत तीनों बहनों के बारे में कभी भी कोई बुरी बात सुनने में नहीं आई थी। ममता का कहना है कि घटना की सच्चाई का पता लगना चाहिए।
यह कहती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट
सैजना गांव में तीन लड़कियों की हत्या का राज पोस्टमार्टम से सुलझने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों के पैनल ने जो रिपोर्ट बनाई है उसमें मौत का कारण नदी में डूबना बताया जा रहा है। तीन दिन तक पानी में रहने के चलते शव इतना गल गया कि शरीर में चोट के निशान तक नहीं दिख रहे हैं। फिलहाल डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रख लिया है।
शनिवार आधी रात को तीनाें लड़कियों प्रीति, पिंकी और शारदा का पोस्टमार्टम करने के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों का पैनल बनाया गया। इसमें संयुक्त अस्पताल से डॉ. शिवदत्ता, डॉ. संजय कुमार और महिला अस्पताल से डॉ. अनीता धस्माना शामिल रहीं। डॉक्टरों को पोस्टमार्टम के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। लड़कियों का शव पानी के चलते बुरी तरह गल चुका था। इनकी बाहरी त्वचा भी उधड़ रही थी। चोट और रस्सी से बंधे होने की बात कही जा रही थी लेकिन पोस्टमार्टम में ऐसा कुछ पता नहीं चल सका। यौन उत्पीड़न के बारे में चिकित्सकों ने कुछ नहीं बताया। पैनल ने रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रखी है। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आगे जांच संबंधी मामलों के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस के विशेषज्ञों की बात
1-तीन अलग-अलग लड़कियां एक साथ आत्महत्याएं नहीं कर सकती हैं। इसके पीछे वजह यह है कि तीनों अलग-अलग उम्र की हैं। उनकी सोच अलग-अलग थी। एक परिवार की जरूर हैं, लेकिन घर अलग हैं। सुसाइड करने के ऐसे मामले पिछले दस सालों में कोई प्रकाश में नहीं आया है।
2-तीन लड़कियों की एक साथ डूबने से भी मौत संभव नहीं है। जिन स्थानों पर लड़कियों की लाशें मिली हैं। वहां कोई नहाने का स्थान भी नहीं है। नदी में नहाने जातीं तो यह हो सकता है। उसमें भी एक पहले डूबती तो दूसरी से शरीर पर बचाने के लक्षण मिल सकते थे। यह भी है कि खेतों से नदी के पानी का लेवल दस-बारह फिट नीचे है। इसलिए वहां प्लानिंग के तहत ही डूबोकर मारा जा सकता है।
3-एक साथ तीन लड़कियों की हत्या हो सकती है। नशीली पदार्थ खिलाकर तीनों को नदी में डाला जाए तो उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से ही मौत की बात सामने आएगी। यह भी हो सकता है कि नशीला पदार्थ खिलाकर उन्हें नदी में डाल दिया हो। लाशों की हालत भी हत्या की पुष्टि कर रही है। पिंकी और प्रीति की जीभ बाहर निकली हुई थी। आंखें बाहर निकल आई थीं।
4- मरने के बाद पानी में शरीर गलता है। शारदा की लाश की हालत भी अच्छी नहीं थी। पिंकी और प्रीति की लाश का एंगिल बिल्कुल एक जैसा था। उनके शरीर में फफोले पड़ गए थे। जबकि लाश में यह प्रक्रिया 36 से 48 घंटे के बीच शुरू होनी चाहिए। प्रीति के हाथ में एक दुपट्टा बंधा था। प्रीति की मां की बात में दम है कि उसकी बेटी के हाथ बंधे थे, क्योंकि पानी में लाश बहने के बाद हाथ खुल भी सकते हैं।
सियासी लोग भी गांव पहुंचे
मीरगंज। सैंजना गांव में तीन बहनों की लाशें मिलने के बाद सियासी लोग भी गांव पहुंचे। रविवार की सुबह 11 बजे केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार सैंजना पहुंचकर मृतक बच्चियों के परिजनों से मिले और मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण-दुखद बताया और पुलिस से संयम से काम लेकर बेगुनाहों को फांसने के बजाय गहन तफ्तीश कर असल गुनाहगारों के नाम उजागर कर उन्हें जेल भेजने को कहा। पूर्व कांग्रेस सांसद प्रवीण सिंह ऐरन भी इतवार दोपहर लगभग 12 बजे सैंजना पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर इंसाफ दिलवाने का भरोसा भी दिलाया। कहा-एसएसपी से मिलकर तीन बहनों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत की सनसनीखेज वारदात का जल्द से जल्द खुलासा करने को कहेंगे। बाद में सपा नेता सुरेश गंगवार और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा, तरुण गंगवार, कुंवर महीपाल सिंह, भगवान सिंह गंगवार आदि भाजपाई भी पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर सांत्वना दी।
राजू की गिरफ्तारी खोलेगी हत्या का राज
सैंजना गांव की तीनों बहनों ही हत्या का राज राजू के पकड़े जाने के बाद ही खुल पाएगा। पुलिस उसके कथित पिता महेश कश्यप को लेकर दिल्ली पहुंच गई है। राजू की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी गई है, लेकिन अभी तक राजू पुलिस के हाथ नहीं लगा है।
तिहरे हत्याकांड की अभी तक की विवेचना राजू शर्मा के ईदगिर्द ही घूम रही है। राजू का घर शारदा के घर के पास है। वह उस पर बुरी नजर रखता था। दो बार शारदा के घर राजू पकड़ा भी गया था। चार दिन पहले ही शारदा के भाई ने राजू को अपने घर पकड़ लिया था। इससे पहले शारदा की चाची ने राजू को उनके घर से भागते हुए देखा था। शारदा और उसके साथ की सभी लड़कियों की गतिविधियों के बारे में राजू जानकारी रखता था। शारदा के पिता ओंमकार को शक है कि राजू और उसके साथी सोनू आदि ने मिलकर उनकी बेटी शारदा, भतीजी पिंकी और प्रीति की हत्या की है। राजू ने प्लानिंग के तहत हत्या की है। इसीलिए वह घटना के एक दिन पहले ही घर से गायब हो गया था। पुलिस की एक टीम राजू की तलाश करने के लिए उसके कथित पिता महेश शर्मा को लेकर दिल्ली चली गई है। राजू की बहनों के घर का पता कराकर उसकी तलाश की जा रही है। राजू के हाथ आने के बाद ही पुलिस को तीनों बहनों की हत्या की गुत्थी सुलझने की उम्मीद है।
चश्मदीद की जुबानी
26 अगस्त को दोपहर बारह बजे सैंजना के पूर्वी छोर पर रहने वाले हेतराम की 15 वर्षीय किशोरी हेमा ने शारदा, पिंकी और प्रीति को भूपेंद्र सिंह के गन्ने के खेत में घुसते देखा था। हेमा उस समय धान के खेत में काम कर रही थी। उसने बताया कि करीब 12 बजे होंगे जब तीनों एक साथ गन्ने के खेत में घुसी थीं। एक साथ खेत में जाना कोई नई बात नहीं है इसलिए उसे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। फिर उसने उन्हें निकलते नहीं देखा और ध्यान नहीं दिया। शाम को जब तीनों की तलाश शुरू हुई तो हेमा ने यह जानकारी अपने घरवालों को दी थी। हेमा की बात से यह बात तो साबित हो गई कि तीनों दोपहर तक एक साथ थीं।
गन्ने का खेत शारदा के घर से करीब आधा किलोमीटर दूर है और गन्ने के खेत से भाखड़ा नदी करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। हैरत यह है कि खेत से फिर नदी तक उन्हें जाते किसी ने नहीं देखा है। पुलिस भी तीनों बहनों को आखिरी बार देखने वाली हेमा को साथ लेकर गन्ने के खेत तक गई थी। माना जा रहा है कि इसी गन्ने के खेत से लड़कियां अगवा हुई हैं।
सहमा सैंजना-आंखों में सवाल पर गांव खामोश
सैंजना वही गांव है जहां तीन चचेरी-तहेरी बहनों की एक साथ हत्या कर लाश नदी में फेंक दी गई है। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में हत्याकांड की दहशत आंखों में हैं...सवाल भी है कि आखिर यह कैसे हुआ होगा लेकिन हर जुबां खामोश है। मीडिया और पुलिस की गाड़ियों के हार्न गांव के सन्नाटे को कुछ कम कर रही है। झुंड में कई जगह गांव वाले कानाफूसी कर रहे हैं जिसके केंद्र में तीनों बहनें, उनका परिवार और अखबारों में छपी खबरों की चर्चा है लेकिन कुछ पूछने पर सभी का करीब -करीब एक ही जवाब..हम क्या बताएं, क्या कहा जा सकता है। इस खामोशी की वजह से पुलिस को भी तफ्तीश में कुछ हासिल नहीं हो सका है।
बरेली से करीब 50 किलोमीटर दूर इस गांव का रास्ता मीरगंज तहसील से होकर जाता है। करीब दस किलोमीटर खड़ंजे पर चलने के बाद गांव का चौराहा आया जहां बैठा हुजूम इसी कांड पर चर्चा कर रहा था। शुरुआत तो मीरगंज से ही हो गई थी लेकिन वहां सवाल यह तैर रहा था कि दरिंदों ने वारदात को अंजाम दिया होगा। यहां के अर्जुन और अभिषेक का कहना था कि संभव हो पहचान छुपाने के लिए डुबो दिया हो। हमारी टीम जब गांव पहुंची तो शारदा के घरवालों ने वह चबूतरा दिखाया जहां राजू और उसके दोस्त अक्सर बैठे रहते थे। राजू के बारे में पीड़ित परिवार तो बोल रहा है लेकिन सारा गांव चुप है। कैसा है राजू? इस सवाल पर किसी ने कुछ खास नहीं कहा। ठंडा जवाब मिला...वह तो ठीक है। राजू को गांव में 25 की शाम से किसी ने नहीं देखा। शारदा का घर मुख्य सड़क पर है जबकि प्रीति और पिंकी के घर पीछे गली में हैं। प्रीति और पिंकी के मकान पक्के भले ही हों लेकिन गरीबी साफ दिखती है। शारदा के घर तो दीवार भी नहीं है जिसका परदा रह सके। जब भी किसी काम से कमरे से कोई बाहर आता है तो नजर पड़ती ही है। शारदा के पिता ओमकार कहते हैं: झुंड में राजू के साथी बैठे रहते थे। कई बार मना किया तो लड़ने को तैयार हो जाते थे। राजू का घर तो खुला है लेकिन कोई है नहीं। उसकी मां भी कांड के बाद से गांव में नहीं है। चेहरों से तो यही लगता है कि कुछ कहानी पड़ोसी जानते तो हैं लेकिन मुंह पर नहीं लाना चाहते।