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ये तो पाटने में लगे हैं नकटिया नदी को
बरेली।
Updated Sun, 09 Apr 2017 12:59 AM IST
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They are trying to bridge the Nakatia river
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह भले ही नदी और नहरों की जमीन को कब्जामुक्त कराने के दावे कर रहे हैं लेकिन भूमाफियाओं और बिल्डरों पर इसका कोई असर नहीं है। रिठौरा से लेकर शहरी सीमा और ठिरिया निजावत खां तक नकटिया नदी के किनारे की जमीन पर कब्जा कर अनाधिकृत प्लाटिंग कराकर बाउंड्रीवाल कराई जा रही है। नदी की जमीन पर कब्जे से न तो बाढ़ खंड को मतलब है, न ही बीडीए के एई और जेई को।
नकटिया नदी में बारिश को छोड़कर बाकी दिनों में पानी बहुत कम रहता है। कभी-कभी तो ये नदी पूरी तरह सूख जाती है। ऐसे में प्रापर्टी डालर, बिल्डर और माफिया नदी के किनारे वाली जमीन पर अनाधिकृत प्लाटिंग कराकर उसे बेचने में लग जाते है। ये धंधा बरसों से चल रहा है। पीलीभीत बाईपास रोड पर आशीष रॉयल पार्क के निकट, महानगर कालोनी, ग्रीन पार्क, गोल्डन ग्रीन पार्क, हरूनगला, बीसलपुर रोड, डोहरा रोड पर नदी के किनारे अधिकांश जमीन पर नियम विरुद्ध प्लाटिंग कराकर ब्राउंउीवाल खड़ी हो चुकी है। उमरिया में गांव वालों ने भी छोटे-छोटे कब्जे कर रखे हैं। शहर के नामी बिल्डर अपनी दो कालोनियों के सीवर का गंदा पानी नदी में निकाल रहे हैं। उनकी कालोनी का कूड़ा भी धार के किनारे जमा होने से नदी आधी पट चुकी है। पचास मीटर अंदर तक कब्जे हो चुके हैं। हरूनगला में ही बीडीए कालोनी के पीछे एक व्यक्ति ने पांच बीघा जमीन कब्जा ली है क्योंकि नदी के किनारे उनकी डेढ़ बीघा जमीन पहले से थी। बाढ़ खंड और राजस्व विभाग की ओर से नदी की जमीन पर अवैध कब्जा रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। बीडीए भी प्लाटिंग के बाद बाउंड्रीवाल और अनाधिकृत निर्माण पर खामोश है।
नदी के किनारे अनाधिकृत निर्माण की जानकारी मिली है। मैं सचिव के नेतृत्व में टीम भेजकर जांच कराऊंगा। जो भी दोषी मिला, उस पर नियम संगत धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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सरकारी जमीनों पर अनाधिकृत कब्जा हटाने के निर्देश संबंधित उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को दिए गए हैं। जल्द ही कब्जा हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा। सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
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नकटिया नदी में बारिश को छोड़कर बाकी दिनों में पानी बहुत कम रहता है। कभी-कभी तो ये नदी पूरी तरह सूख जाती है। ऐसे में प्रापर्टी डालर, बिल्डर और माफिया नदी के किनारे वाली जमीन पर अनाधिकृत प्लाटिंग कराकर उसे बेचने में लग जाते है। ये धंधा बरसों से चल रहा है। पीलीभीत बाईपास रोड पर आशीष रॉयल पार्क के निकट, महानगर कालोनी, ग्रीन पार्क, गोल्डन ग्रीन पार्क, हरूनगला, बीसलपुर रोड, डोहरा रोड पर नदी के किनारे अधिकांश जमीन पर नियम विरुद्ध प्लाटिंग कराकर ब्राउंउीवाल खड़ी हो चुकी है। उमरिया में गांव वालों ने भी छोटे-छोटे कब्जे कर रखे हैं। शहर के नामी बिल्डर अपनी दो कालोनियों के सीवर का गंदा पानी नदी में निकाल रहे हैं। उनकी कालोनी का कूड़ा भी धार के किनारे जमा होने से नदी आधी पट चुकी है। पचास मीटर अंदर तक कब्जे हो चुके हैं। हरूनगला में ही बीडीए कालोनी के पीछे एक व्यक्ति ने पांच बीघा जमीन कब्जा ली है क्योंकि नदी के किनारे उनकी डेढ़ बीघा जमीन पहले से थी। बाढ़ खंड और राजस्व विभाग की ओर से नदी की जमीन पर अवैध कब्जा रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। बीडीए भी प्लाटिंग के बाद बाउंड्रीवाल और अनाधिकृत निर्माण पर खामोश है।
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नदी के किनारे अनाधिकृत निर्माण की जानकारी मिली है। मैं सचिव के नेतृत्व में टीम भेजकर जांच कराऊंगा। जो भी दोषी मिला, उस पर नियम संगत धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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सरकारी जमीनों पर अनाधिकृत कब्जा हटाने के निर्देश संबंधित उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को दिए गए हैं। जल्द ही कब्जा हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा। सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी