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परीक्षा पास कराने का ठेका एक लाख में
बीरेली
Updated Sun, 14 Dec 2014 11:17 PM IST
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धोखे से सरकारी नौकरी पाने के चक्कर में करियर बर्बाद होने का जोखिम फिर भी कोई परवाह नहीं। बरेली में पकड़े गए तीन सॉल्वरों के मुताबिक परीक्षार्थियों से उनका लिखित परीक्षा पास कराने का सौदा एक से सवा लाख रुपये तक में हुआ था। जालौर (राजस्थान) के गैंग लीडर अशोक विश्नोई ने सूबे के कई परीक्षा केंद्रों पर अपने सॉल्वर बैठाए थे जिसकी भनक राजस्थान की एटीएस को थी। बरेली के अलावा नोएडा में भी उसका एक सॉल्वर विक्रम विश्नोई पकड़ा गया। झांसी में एटीएस ने खुद अशोक विश्नोई को भी दबोच लिया।
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बरेली में छापा मारने आई राजस्थान एटीएस की टीम के प्रभारी चंद्रपाल ने बताया कि अशोक विश्नोई परीक्षाओं में नकल कराने, पेपर आउट कराने और साल्वर बैठाने का गिरोह चलाता है। इलाके के कोचिंग सेंटरों से युवकों को हायर करता है। एटीएस राजस्थान को सूचना मिली थी कि उसने यूपी पुलिस की परीक्षा में भी जयपुर और जोधपुर, जालौर से काफी संख्या में युवक भेजे हैं। राजस्थान एटीएस ने यूपी एसटीएफ के आईजी से संपर्क किया और फिर सॉल्वरों की धरपकड़ के लिए योजना बनाई गई।
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बरेली में पकड़े गए अशोक विश्नोई गैंग के सॉल्वर दिनेश ने पूछताछ में बताया कि जालौर (राजस्थान) के थाना क्षेत्र सहचौर के गांव अकौली निवासी अशोक विश्नोई ने उसे 1.20 लाख रुपये देकर नीरज की जगह परीक्षा देने के लिए बैठाया था। बीस हजार रुपये एडवांस दे दिए थे। बाकी रकम परीक्षा परिणाम आने के बाद मिलनी थी। पुलिस ने दिनेश से एसबीआई का एक एटीएम और 5570 रुपये भी बरामद किए। दिल्ली के ललित और मोहम्मद हुसैन के मुताबिक परीक्षार्थी आलोक और कुलदीप के पिता से उनका दो लाख रुपये में सौदा हुआ था। उन्हें भी बीस-बीस हजार रुपये एडवांस मिले थे।
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अब घर वालों को क्या मुंह दिखाऊंगा
अशोक विश्नोई के 1.20 लाख रुपये का सौदा कर यहां नोएडा के नीरज की जगह सिपाही भर्ती परीक्षा देने आया जालौर का दिनेश पकड़े जाने के बाद काफी देर माथा पकड़कर रोता रहा। उसने बताया कि वह जालौर में ही बीए थर्ड ईयर का छात्र है। रोते-रोते बोला हे भगवान ये मैंने क्या किया। अब कैसे घर पर मुंह दिखाऊंगा।
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ऐसे की गई प्रवेश पत्रों की चेकिंग
द्रोपदी इंटर कॉलेज में परीक्षार्थियों की जांच में किस कदर लापरवाही की गई, इसका अंदाजा दिल्ली के साल्वर ललित और मोहम्मद हुसैन के पकड़े जाने से लगा। इंटेलीजेंस विंग के प्रभारी विकास सक्सेना ने बताया कि ललित के पास जो प्रवेश पत्र और पहचान पत्र था उस पर परीक्षार्थी आलोक का ही फोटो लगा था। इसी तरह दूसरे साल्वर मोहम्मद हुसैन के पास मिले प्रवेश पत्र पर भी कुलदीप का फोटो लगा था। किसी ने प्रवेश पत्र चेक किए होते तो उन्हें पहले ही पकड़ लिया गया होता।
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12वीं पास बन बैठे साल्वर
साल्वर ललित और मुहम्मद हुसैन कुल 12वीं पास हैं। ललित एक कोचिंग सेंटर चलाता है। हुसैन घर-घर जाकर पहली से पांच तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता है। ललित ने बताया कि उसकी मुलाकत आलोक के पिता राकेश से उसके कोचिंग सेंटर पर हुई। दो लाख रुपये में उसने उनके दोनों बेटों की जगह परीक्षा देने की बात तय की। ललित ही हुसैन को लेकर बरेली आया था।
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309 परीक्षार्थी गैरहाजिर
परीक्षा में 309 परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे। परीक्षा में 18521 परीक्षार्थियों को शामिल होना था जिनमें से 18209 परीक्षार्थी ही पहुंचे।
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240 प्रश्न, तीन घंटे, सोचने-समझने का भी मौका नहीं मिला
बरेली। यहां परीक्षा केंद्रों पर मेरठ, बागपत जैसे जाट बहुल इलाके के परीक्षार्थियों के सेंटर बनाए गए थे। परीक्षा के बाद ज्यादातर अभ्यर्थियों का कहना था कि पेपर तो इजी था लेकिन 240 प्रश्नों के लिए तीन घंटे कम पड़ गए। टाइम कम था, निगेटिव मार्किंग होनी नहीं थी लिहाजा कई प्रश्नों के आगे आंख मूंदकर गोले बना आए।
परीक्षा के 240 बहुविकल्पीय प्रश्नों में 80 सामान्य जानकारी, 60 मानसिक क्षमता, 60 तर्कशक्ति और 40 बोधगम्यता आधारित थे। हर प्रश्न सवा अंक था। बागपत के विशाल यादव ने बताया वह 200 प्रश्न ही सोच समझकर कर सके। बाकी को भगवान भरोसे टिक कर दिया। गाजियाबाद के अनुज धामा ने कहा कि निगेटिव मार्किंग थी नहीं। इसलिए सवाल छोड़ने का सवाल ही नहीं था। बड़ौत के सुमित दांगी ने कहा कि पेपर काफी ईजी था। लेकिन रीजनिंग ने जरूर दिमाग हिला दिया।
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परीक्षा से पूरे शहर में उथल-पुथल
रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर रेलपेल, सड़कों पर भी भीड़भाड़
फोटो-
बरेली। परीक्षा से निपटने के बाद परीक्षार्थियों ने घर जाने की जल्दी में खतरा उठाने से भी गुरेज नहीं किया। जिसे जो साधन मिला उसी पर चढ़ लिया। बसों की छत और ट्रेनों की खिड़कियों पर लटके परीक्षार्थियों को कई बार सख्ती से नीचे उतारा गया। परीक्षा खत्म होने के बाद जंक्शन और रोडवेज को दोनों अड्डों पर देर शाम तक बेतहाशा भीड़भाड़ रही। मिली।
परीक्षा छूटने से पहले ही पूरे शहर की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया था। करीब ढाई बजे कालेजों से छूटे परीक्षार्थी आटो और रिक्शा आदि से लदकर पहुंचे तो जंक्शन, रोडवेज बस स्टैंड और सेटेलाइट स्टैंड भीड़भाड़ से भर गए। जंक्शन पर सर्वाधिक भीड़ थी। यहां कई बार हंगामे के हालात भी बने। सबसे ज्यादा परीक्षार्थी मेरठ दिशा के थे लेकिन वहां जाने के लिए कोई सीधी ट्रेन न होने से परेशान दिखे। इन्क्वायरी काउंटर पर ज्यादा गहमागहमी होने के कारण वहां जीआरपी और आरपीएफ तैनात कर दी गई थी। करीब छह घंटे लेट चल रही सहारनपुर पैसेंजर जंक्शन पर पहुंची तो उसमें क्षमता से दोगुने मुसाफिर सवार हो लिए। मुरादाबाद दिशा में निकली सियालदाह एक्सप्रेस में भी परीक्षार्थियों की भरमार रही। शाम साढ़े छह बजे मेरठ जाने वाली राज्यरानी एक्सप्रेस आई लेकिन जंक्शन पर फिर भी भीड़ ज्यादा कम नहीं हुई।
प्रभारी स्टेशन मास्टर चेतन शर्मा ने बताया कि अब नौचंदी एक्सप्रेस सुबह मेरठ जाएगी। इससे पहले दिल्ली जाने वाली ट्रेनों से परीक्षार्थियों को निकाला जाएगा। स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ ने अतिरिक्त स्टाफ बुला रखा था। सीओ फर्स्ट, कोतवाल सदर, सुभाषनगर थाना प्रभारी के साथ सिविल पुलिस फोर्स और एक प्लाटून पीएसी भी यहां तैनात रही।
सेटेलाइट बस स्टेशन पर कई बार बसों की छत पर चढ़े परीक्षार्थियों को चौकी पुलिस स्टाफ ने चेतावनी देकर नीचे उतारा। पुराने रोडवेज अड्डे पर चाय वालों से लेकर मूंगफली वाले तक लड़कों के गुस्से का शिकार हुए। आटो वालों से भी परीक्षार्थियों की नोकजोंक हुई। रोडवेज अड्डे पर ऑटो वालों और लड़कों के बीच झगड़ा हुआ तो कुतुबखाना चौकी पुलिस ने निपटाया।