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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The youth felt the taste of fake IDs on social media

सोशल मीडिया पर युवाओं को लगा फर्जी आईडी का चस्का

Thu, 15 Sep 2016 02:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Thu, 15 Sep 2016 02:03 AM IST
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सोशल मीडिया का चस्का आज हर किसी को है, युवाओं पर इसका जादू सिर चढ़कर बोलता है। पर यह चस्का युवाओं खासतौर से इंटर कॉलेज के छात्रों को फर्जीवाड़े के चस्के की ओर लेता जा रहा है तो काफी घातक साबित हो रहा है। वे केवल अपने मजे के लिए दूसरे छात्रों को फेक आईडी से निशाना बनाते हैं। इसका सबूत है कि ताजा आंकड़े जिसमें 80 फीसद मामले दूसरे छात्रों को केवल परेशान करने के आए। पूरे भारत के साथ बरेली के छात्र भी इसमें पीछे नहीं है। इंडियन साइबर आर्मी द्वारा दर्ज किए गए पिछले एक साल के आंकड़ों को देखें तो यूपी में ही पंद्रह सौ मामले सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी दर्ज किए गए। इसमें बरेली से करीब ढ़ाई सौ मामले दर्ज हुए। दिलचस्प बात है कि स्नातक की तुलना में इंटर कॉलेज के छात्रों की संख्या इसमें ज्यादा है। यह छात्र केवल अपने मजे के लिए अपने ही कॉलेज के छात्रों को निशाना बनाते हैं। इसमें लड़कियों से जुड़े 90 फीसद मामले हैं। 
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कैसे करते हैं परेशान
इंडियन साइबर आर्मी के सीइओ किसले चौधरी ने बताया कि इंटर कॉलेज के छात्र नासमझ होते हैं इसलिए उनका चस्का कभी-कभी काफी खतरनाक मोड़ तक पहुंच जाता है। उनको पता ही नहीं होता कि वह क्या कर रहे हैं। बरेली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज के मामले का जिक्र करते हुए बताया कि दसवीं की छात्रा के फोटो निकालकर उसी कॉलेज के छात्र ने फर्जी आईडी बनाई और दूसरे छात्रों को अश्लील मैसेज भेजे। मामला सामने आया तो छात्रा कई दिन कॉलेज नहीं गई। इंडियन साइबर आर्मी की बरेली यूनिट ने मामले में पड़ताल की तो सारी हकीकत सामने आ गई। छात्र ने केवल मजे लेने के लिए छात्रा की फर्जी आइडी बनाई और दूसरों को अश्लील मैसेज भेजे। आजकल छात्रों को इसका चस्का लगता जा रहा है। लड़के ही नहीं बल्कि लड़कियां द्वारा अपने साथियों की फर्जी आईडी बनाने की मामले भी सामने आए हैं। 
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हमारे पास पिछले एक साल से फर्जी आइडी के यूपी से पंद्रह सौ मामले दर्ज हुए। करीब ढ़ाई सौ मामले बरेली से जुड़े हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें तमाम छात्र ऐसे मिले जिन्होंने केवल मजे करने के लिए  एक दूसरे को निशाना बनाया। 90 फीसद मामले छात्राओं से जुड़े हैं। -किसले चौधरी, सीइओ इंडियन साइबर आर्मी 
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