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नेताओं के चेले अपराधी कर रहे हैं खनन

Tue, 19 Sep 2017 01:44 AM IST
बरेली
बरेली Updated Tue, 19 Sep 2017 01:44 AM IST
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नेताओं की मेहरबानी और पुलिस की साठगांठ से जिले में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग खनन के अवैध कारोबार में घुस गए हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओें के चेले हैं। चौबारी और बभिया के कई हिस्ट्रीशीटर इस अवैध कारोबार से जुड़े हैं। खनन पर सरकार की सख्ती का फायदा उठाकर मिट्टी और बालू ब्लैक में बेची जा रही है और हर महीने लाखों का मुनाफा कमाया जा रहा है। इस कमाई का हिस्सा पुलिस और नेताओं की जेब में भी जा रहा है। अंधेरा होते ही रामगंगा नदी का किनारा रोशन होने लगता है। इस दौरान थानों की पुलिस रेत और मिट्टी से भरी ट्रालियों को सुरक्षित निकलवाने में लगी रहती है। यही एक बड़ी वजह है कि इस दौरान सड़क पर कोई वारदात होने की सूचना मिले तब भी पुलिस वक्त से नहीं पहुंच पाती। रेत-मिट्टी की ट्रालियों से पैसा वसूली का खेल इस कदर पुलिस पर हावी हो गया है कि बालू और मिट्टी की ट्राली देखते ही पुलिस की मोबाइल गाड़ियां और 100 डायल पर तैनात पुलिस वाले उन पर लपक पड़ते हैं।  
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योगी सरकार बनने से पहले मिट्टी काफी सस्ती मिल जाती थी। इन दिनों घर बनाने के लिए मजबूरी में लोगों को 1500 सौ रुपये तक में एक ट्राली मिट्टी लेनी पड़ रही है। खनन पर सरकार से सख्त नियमों का खनन माफिया पूरा फायदा उठा रहे हैं। यहां तक कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पास तक बरेली में बड़े पैमाने पर अवैध खनन होने की शिकायतें पहुंची हैं। रविवार को वह स्वच्छता सेवा कार्यक्रम में बरेली आए तो उन्होंने सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक में भोजीपुरा और बहेड़ी में अवैध खनन होने का जिक्र भी किया। हालांकि अवैध खनन भोजीपुरा के इज्जतनगर इलाके में ही नहीं हो रहा, इससे भी बड़े पैमाने पर रामगंगा नदी किनारे चौबारी और बभिया गांव में खनन किया जा रहा है। हालत यह है कि अंधेरा होते ही रामगंगा नदी का किनारा ट्रैक्टर ट्रालियों की हेडलाइटों से जगमगाने लगता है। पुलिस को खनन माफिया से रोज एक ट्राली मिट्टी निकलवाने के लिए हर महीने 5 से 7 हजार रुपये तक मिलते हैं।
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इस तरह मिलता है पट्टा
खनन अधिकारी से पट्टा लेने के लिए लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। पट्टे के लिए माइनिंग प्लान खनन निदेशालय से जारी होता है। रुहेलखंड नहर विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश चौधरी के नेतृत्व में खनन के आवेदनों पर विचार करने के लिए कमेटी बनी है। कमेटी की संस्तुुति के बाद पर्यावरण प्रमाण पत्र मिलता है। इसके बाद पट्टे की फाइल पर डीएम की अध्यक्षता में बना प्राधिकरण फाइनल रिपोर्ट लगाता है। प्रति घन मीटर के हिसाब पट्टा धारक को रायल्टी भी जमा करानी होती है।
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अब पट्टा धारक के कंप्यूटर से निकलेगा रवन्ना
सरकार का नया फरमान आते ही काम बंद कराया
बरेली।
सरकार ने नई खनन नीति के तहत अब खनन विभाग किसी पट्टा धारक को रवन्ना बुक जारी नहीं करेगा। पट्टा लेने वालों को एक कंप्यूटर सिस्टम खरीदना होगा। खनन निदेशालय से सीधे पट्टा धारक के ईमेल एड्रेस पर कोड मिलेगा। इसके जरिए वह खुद ही रवन्ना निकाल पाएगा। जिले में जिन छह लोगों को खनन के पट्टे जारी किए गए थे, इस नई व्यवस्था को लागू कराने के  लिए सबका खनन का काम रुकवा दिया है। 
बदायूं रोड पर आशुतोष चौहान ने अंगूरी गांव से मिट्टी का खनन करने के लिए पट्टा ले रखा है। सोमवार को उन्होंने खनन अधिकारी से मुलाकात करके प्रार्थना पत्र दिया कि उन्हें एक महीना खनन करने का और मौका दिया जाए। पुलिस ने कांवड़ यात्रा के दौरान एक महीने तक उन्हें किसी ने खनन नहीं करने दिया। बिथरी चैनपुर इलाके में कैश्योरी कंपीटेंट, बीडीए और सेतु निगम को मिलाकर खनन के सात पट्टे प्रशासन ने जारी किए थे। पट्टा धारकों का काम रुकवा दिया गया है। इससे शहर में मिट्टी और बालू की और ज्यादा दिक्कत हो रही है।
उधर शहर में बालू और मिट्टी की किल्लत की वजह से कई विकास कार्य तक ठप पड़े हैं। नई कालोनियों में कोई मकान नहीं बना पा रहा है।

डीएम से की शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई
चौबारी गांव के पूर्व प्रधान जयवीर सिंह ने अपने गांव के ही सतीश सिंह, पूर्व बीडीसी मेंबर, श्यामवीर सिंह, हीरालाल, शंकर सिंह, सरवन सिंह, रामपाल सिंह, वीरेंद सिंह के साथ डीएम से मिलकर अवैध खनन की शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व प्रधान का कहना है कि रात में पुलिस की मौजूूदगी में भारी मात्रा में खनन होता है। शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक ट्रैक्टर-ट्रालियां रेत-मिट्टी ढोती रहती हैं। इनके शोर से रात को गांव में सोना तक मुश्किल हो गया है।

333 ट्राली मिट्टी होती है एक हजार घन मीटर में
खनन अधिकारी के मुताबिक एक हजार घन मीटर में करीब 333 ट्राली मिट्टी निकलती है। एक ट्राली में तीन घन मीटर मिट्टी आती है। अब तक जो रवन्ना मिलता था, उस पर 24 घंटे लिखा होता था। पट्टा धारक एक ही रवन्ने से दिन भर ट्राली चलाते थे। मिट्टी कम होना दर्शाते ही नहीं थे। कंप्यूटर से निकलने वाला रवन्ने में कंप्यूटर उनके पट्टे से मिट्टी कम करता रहेगा। एक ही रवन्ने से कई बार ट्राली कोई नहीं ले जा पाएगा।
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हम अवैध खनन रोकने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। रात में भी कई स्थानों पर छापामारी की है, लेकिन पुलिस का सहयोग नहीं मिल पाता है। फरीदपुर में छापामारी के दौरान मेरी पुलिस कर्मियों से बात हुई तो कहने लगे हमारे बड़े अधिकारियों ने खनन की ट्रैक्टर-ट्रालियां बंद करने या रोकने को मना किया हुआ है। - वाईएन राम, खनन अधिकारी


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अवैध खनन किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा। तहसीलोें में अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी एसडीएम की होगी। अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस की भी जिम्मेदारी तय करेंगे। किसी भी स्तर से खनन रोकने में लापरवाही नहीं होनी चाहिए, जिसने ढिलाई बरती उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - राघवेंद्र विक्रम सिंह, डीएम 
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