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बच्ची को नाले में ढूंढते रहे वह मंदिर में मिली

Fri, 15 Apr 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Fri, 15 Apr 2016 01:44 AM IST
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The child was in the temple in the valley and are looking
मां की गोद में मासूम
सुभाषनगर नाले में जिस बच्ची के डूबने का शोर मचा था, वह तीन किलोमीटर दूर एक मंदिर में मिली। सिमरन को रात 2.30 बजे तक पुलिस और नगर निगम की टीम मुहल्ले के लोगों के साथ नाले में तलाशती रही। सुबह पांच बजे पता चला कि बदायूं रोड पर बालाजी मंदिर में बच्ची है। पापा बिरजू जब पुलिस टीम के साथ बालाजी मंदिर पहुंचे तो बच्ची अपने पापा से चिपककर रोने लगी। पुलिस और नगर निगम की टीम ने भी बच्ची के जिंदा मिलने से राहत की सांस ली। 
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सुभाषनगर पुलिया से पुरानी रेलवे क्रासिंग स्थित श्याम कालोनी निवासी बिरजू और नीलम की तीन साल की बेटी सिमरन बुधवार शाम पांच बजे दुकान पर टॉफी लेने गई थी। वहां से अचानक लापता हो गई थी। मोहल्ले के बच्चों ने मां बाप को बताया कि सिमरन नाले के किनारे चल रही थी। पिता बिरजू समेत मोहल्ले वालों ने भी बच्ची को नाले में गिरा मान लिया था। सबने रात 2.30 बजे तक नाले में सिमरन की तलाश की। मेयर डा. आईएस तोमर के हस्तक्षेप पर देर रात अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने भी जेसीबी से नाला खंगाला। लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। सुबह पांच बजे महिपाल नाम के एक व्यक्ति ने करगैना पुलिस चौकी को बालाजी मंदिर में एक बच्ची के पहुंचने की सूचना दी। करगैना चौकी से सुभाषनगर पुलिस को बताया गया। चीता मोबाइल ने सुबह करीब 6.30 बजे बच्ची के पिता बिरजू को बालाजी मंदिर में तीन साल की बच्ची का मिलना बताकर कहा कि वह चलकर देख लें कि कहीं वह उनकी बच्ची सिमरन तो नहीं है। जब बिरजू पुलिस टीम के साथ बालाजी मंदिर पहुंच तो सिमरन पापा को देखते ही उनसे चिपककर रोने लगी। नाले में समाई बच्ची को अचानक सामने पाकर पापा बिरजू भी भावुक हो गए।
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डरी सहमी बच्ची बोली- प्रसाद खाने गए थे
बालाजी मंदिर से घर पहुंची डरी सहमी सिमरन बदायूं रोड बालाजी मंदिर पहुंचने के बारे में कुछ नहीं बता पाई। मां-बाप के अलावा मोहल्ले की महिलाओं ने भी उससे काफी देर तक पूछा कि मंदिर कौन ले गया। ज्यादा पूछने पर उसने यही कहा कि वह मंदिर प्रसाद खाने गई थी। जब मंदिर से सिमरन घर आई तो उसके हाथ में बेसन के लड्डू और बताशे थे। ज्यादा पूछने पर रात भर मां बाप से दूर मंदिर में रही डरी सहमी सिमरन रोने लगती।  
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मइया की बड़ी बड़ी बाहें...  
नवरात्र की सप्तमी को मां नीलम की तीन साल की बच्ची सिमरन अचानक लापता हो गई। सब उसको नाले में ही गिरा मानकर जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ चुके थे। नवरात्र में नौ दिन तक लौंग चबाकर निर्जला व्रत रखने वाली नीलम को रात 11 बजे अहसास हो गया था कि सिमरन जिंदा है और वह सुबह घर पहुंच जाएगी। मोहल्ले की सरला, कमला, अनीता आदि का कहना था कि नीलम रात 11 बजे ही रौ में आकर बोलने लगीं कि सिमरन सुबह तक घर आ जाएगी। सुबह आते-आते नीलम की बात सच हो गई। सिमरन के घर पहुंचते ही घर पर जमा महिलाएं कहने लगीं- मइया की बड़ी-बड़ी बाहें हैं। नहीं तो किसे उम्मीद थी कि सिमरन सही सलामत वापस आएगी। दादी मीना बोलीं- पतो नाय लल्ला। बिटिया कइसे इत्ती दूरि पहुंच गई। देवी मइया की किरपा रही। हमने सबने तौ उम्मीदि छोड़ि दई थी। 


‘पुलिस ने रात भर बच्ची की तलाश की। चीता मोबाइल टीम भी लगी रही। सुबह करगैना पुलिस चौकी पर महिपाल सिंह नाम के एक व्यक्ति ने तीन साल की बच्ची के बालाजी मंदिर पर पहुंचने की सूचना दी थी। परिवार वालों को बच्ची मिल गई। उसे घर पहुंचा दिया गया।’ सतीश यादव, एसओ सुभाषनगर 
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