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मनोकामना पूरी.. मां ने कुर्सी बचाई और सम्मान भी

Sun, 10 Sep 2017 02:32 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 10 Sep 2017 02:32 AM IST
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sve life mother
भ्‍ााजपा अध्‍ययक्ष्‍ा
दस दिन से भाजपा जिलाध्यक्ष की गुमशुदगी के साथ बड़ी चर्चा यह भी रही कि वे पूर्व पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर प्रकरण में खुद को अपमानित महसूस करके जिलाध्यक्षी छोड़कर कहीं चले गए हैं। अब पता लगा है कि वे मध्यप्रदेश के रतनगढ़ इलाके में प्राचीन देव स्थान गंगादास देव और मरुला देवी में मनोकामना पूरी होने के लिए अनुष्ठान करा रहे थे और अब लौट रहे हैं। उनके नजदीकी भी खुश हैं कि देवी मां ने  उनकी मनोकामना पूरी कर दी, क्योंकि उनके गायब होते ही शहला प्रकरण में जांच शुरू होने और हिलती कुर्सी संभलने से सम्मान बरक रार रहा। हालांकि चर्चा यह भी है कि गुमशुदगी दर्ज होते ही चर्चाओं से बचने के लिए संबंधित भाजपाई दिग्गजों ने जांच तो शुरू कराई ही, जिलाध्यक्षी की कुर्सी से नजरें भी फेर लीं। यानि मां पूरी तरह से मेहरबान है। जिलाध्यक्ष ने कुछ देर बात करने के बाद फिर अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया।
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शनिवार को शाम आठ बजे भाजपा जिलाध्यक्ष के छोटे भाई हितेंद्र सिंह राठौर उर्फ विक्की के मोबाइल पर किसी का फोन आया कि उनके भाई का पता लग गया है। इस पर हितेंद्र ने भाजपा जिलाध्यक्ष का मोबाइल नंबर 9412293911 मिलाया तो वह व्यस्त मिला। दस दिन से लगातार बंद चल रहे मोबाइल पर बिजी टोन मिलने के बाद हितेंद्र बार-बार मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश करते रहे। आखिर भाजपा जिलाध्यक्ष ने उनकी कॉल रिसीव कर ली और अपनी मां से बात करने की इच्छा जाहिर की। हितेंद्र ने तुरंत मां से उनकी बात कराई। जिलाध्यक्ष ने उन्हें बताया कि वह दतिया से 60 किलोमीटर रतनगढ़ में हैं। यहां देवी मंदिर में अनुष्ठान करा रहे हैं।
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भाजपा जिलाध्यक्ष के दूसरे भाई नीरेंद्र राठौर ने जिलाध्यक्ष से फोन पर बात होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वह स्वस्थ हैं और जल्द ही बरेली लौटेंगे। चिंता की कोई बात नहीं है। जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर ने अपनी पत्नी पुष्पा राठौर और बहन बॉबी से भी बात की। कुछ देर में बातचीत करने के बाद उन्होंने अपना फोन फिर स्विच ऑफ कर लिया।
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रवींद्र सिंह राठौर से बात होने के बाद उनकी मां ने तुरंत ही इसकी सूचना दतिया में ही उनकी तलाश दे रहे मौजूद उनके बेटे विशाल और ओपी राठौर को दी। दोनों वहां से तुरंत रतनगढ़ रवाना हो गए। विशाल ने बताया कि रतनगढ़ बहन-भाई के रूप में देवी-देवता का प्रसिद्ध मदिंर है। वहां उनके पिता पहले से जाते रहे हैं। 
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