{"_id":"58f66bea4f1c1b387447297d","slug":"so-the-police-has-vanished-the-magistrate-s-investigation-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"तो पुलिस ने गायब कर दी मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तो पुलिस ने गायब कर दी मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट
बरेली।
Updated Wed, 19 Apr 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
तो पुलिस ने गायब कर दी मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट
- फोटो : So the police has vanished the Magistrate's investigation report
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सैंजना की चार मौतों का मामला
पुलिस का कहना है कि मीरगंज के सैंजना गांव में हुई चार मौतों के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच नहीं मिली है, लेकिन दिसबंर से अब तक कलेक्ट्रेट से मजिस्ट्रेटी जांच के बाद कार्रवाई की आख्या मांगने को तो चार रिमांडर भेजेे जा चुके हैं। जाहिर है कि अधिकारियों ने अपनी डाक भी ठीक से नहीं देखी। इससे तो यहीं लग रहा है कि फजीहत से बचने के लिए अधिकारी मजिस्ट्रेटी जांच को ही दबाए बैठे हैं, क्योंकि सैंजना की चार मौतें हत्याएं साबित होते ही कई पुलिस कर्मियों का नपना तय है। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ की उम्मीद बढ़ी है।
मीरगंज पुलिस ने पहले ही दिन सेसैंजना गांव की शारदा, प्रीति ,पिंकी और राजू की मौत को बेहद हल्के में लिया। तीनों लड़कियों के परिवार वालों ने जिन पर हत्या का आरोप लगाया उनकी पुलिस से दोस्ती थी। दूसरा चार हत्याओं का मतलब साफ था कि हल्के के दरोगा तक पर कार्रवाई करने से तो काम चलना नहीं था। पंचम तल से यह मामला सीधे देखा जा रहा था। कार्रवाई एसओ के अलावा सीओ और अन्य आला अधिकारियों के खिलाफ भी हो सकती थी। इसलिए पुलिस ने गुनहगारों के साथ खड़े रहने में ही अपनी बेहतरी समझ ली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुलिस को बड़ा सपोर्ट मिल गया। हालांकि तीन लड़कियों की नदी में लाश मिलने के बाद उनमें से एक के प्रेमी की मौत पर सवाल इसके बाद भी खड़े होते रहे। मजिस्ट्रेटी जांच में एसडीएम अर्चना द्विवेदी ने यह साफ कर दिया कि तीन लड़कियों की हत्या हुई है। इसके बाद तो पुलिस की भूमिका ही संदिग्ध हो गई। पुलिस ने जो कसर बची थी, अब पूरी कर दी। कलेक्ट्रेट का रजिस्टर बता रहा है कि दिसंबर में ही मजिस्ट्रेटी जांच को परीक्षण के बाद पुलिस को भेज दिया गया था। पहला रिमांडर 21 दिसंबर को देकर आख्या मांगी गई। इसके बाद एक रिमांडर जनवरी में दूसरा फरवरी में पुलिस को भेजा गया। एडीएम सिटी की तरफ से चौथा रिमांडर 23 मार्च को भेजकर मजिस्ट्रेटी जांच के बाद की गई कार्रवाई की आख्या मांगी है, लेकिन कोई आख्या अभी तक नहीं है।
मजिस्ट्रेटी जांच पता नहीं किसके पास है। हमें तो अभी तक नहीं मिली है। कप्तान साहब से बात करता हूं। मजिस्ट्रेटी जांच मिलेगी तो परीक्षण करके आगे की कार्रवाई कराएंगे- यमुना प्रसाद, एसपी देहात
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस का कहना है कि मीरगंज के सैंजना गांव में हुई चार मौतों के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच नहीं मिली है, लेकिन दिसबंर से अब तक कलेक्ट्रेट से मजिस्ट्रेटी जांच के बाद कार्रवाई की आख्या मांगने को तो चार रिमांडर भेजेे जा चुके हैं। जाहिर है कि अधिकारियों ने अपनी डाक भी ठीक से नहीं देखी। इससे तो यहीं लग रहा है कि फजीहत से बचने के लिए अधिकारी मजिस्ट्रेटी जांच को ही दबाए बैठे हैं, क्योंकि सैंजना की चार मौतें हत्याएं साबित होते ही कई पुलिस कर्मियों का नपना तय है। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ की उम्मीद बढ़ी है।
मीरगंज पुलिस ने पहले ही दिन सेसैंजना गांव की शारदा, प्रीति ,पिंकी और राजू की मौत को बेहद हल्के में लिया। तीनों लड़कियों के परिवार वालों ने जिन पर हत्या का आरोप लगाया उनकी पुलिस से दोस्ती थी। दूसरा चार हत्याओं का मतलब साफ था कि हल्के के दरोगा तक पर कार्रवाई करने से तो काम चलना नहीं था। पंचम तल से यह मामला सीधे देखा जा रहा था। कार्रवाई एसओ के अलावा सीओ और अन्य आला अधिकारियों के खिलाफ भी हो सकती थी। इसलिए पुलिस ने गुनहगारों के साथ खड़े रहने में ही अपनी बेहतरी समझ ली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुलिस को बड़ा सपोर्ट मिल गया। हालांकि तीन लड़कियों की नदी में लाश मिलने के बाद उनमें से एक के प्रेमी की मौत पर सवाल इसके बाद भी खड़े होते रहे। मजिस्ट्रेटी जांच में एसडीएम अर्चना द्विवेदी ने यह साफ कर दिया कि तीन लड़कियों की हत्या हुई है। इसके बाद तो पुलिस की भूमिका ही संदिग्ध हो गई। पुलिस ने जो कसर बची थी, अब पूरी कर दी। कलेक्ट्रेट का रजिस्टर बता रहा है कि दिसंबर में ही मजिस्ट्रेटी जांच को परीक्षण के बाद पुलिस को भेज दिया गया था। पहला रिमांडर 21 दिसंबर को देकर आख्या मांगी गई। इसके बाद एक रिमांडर जनवरी में दूसरा फरवरी में पुलिस को भेजा गया। एडीएम सिटी की तरफ से चौथा रिमांडर 23 मार्च को भेजकर मजिस्ट्रेटी जांच के बाद की गई कार्रवाई की आख्या मांगी है, लेकिन कोई आख्या अभी तक नहीं है।
विज्ञापन
मजिस्ट्रेटी जांच पता नहीं किसके पास है। हमें तो अभी तक नहीं मिली है। कप्तान साहब से बात करता हूं। मजिस्ट्रेटी जांच मिलेगी तो परीक्षण करके आगे की कार्रवाई कराएंगे- यमुना प्रसाद, एसपी देहात
विज्ञापन